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माता-पिता, भाई नहीं रहे, अपना गांव-घर भी छूटा
Updated Sun, 14 Oct 2018 12:34 AM IST
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रायबरेली। पहले पिता का साया सिर से उठ गया, फिर ट्रेन हादसे में मां, बड़ा भाई और छोटी बहन की मौत हो गई। हादसे में तीन मासूम घायल हो गए तो उनका इलाज जिला अस्पताल में हुआ और वे स्वस्थ हो गए। तीनों को एक बार फिर झटका लगा, जब उन्हें अपने गांव और घर जाने का मौका नहीं मिला। परिवारीजनों में किसी के आगे न आने के कारण इन बच्चों को नए सरकारी घर, यानी बाल गृह राजकीय शिशु सदन भेज दिया गया।
बिहार के मुंगेर जिले में खड़कपुर थाना क्षेत्र के किशनपुर गांव निवासी स्व. मोहन मांझी की पत्नी सुनीता अपने बच्चों शंभू (25), राकेश (12), रवि (7), जुड़वा बेटियों रीता व सीता (दोनों एक साल) के साथ न्यू फरक्का एक्सप्रेस से जा रही थी। ट्रेन हादसे ने सुनीता, शंभू और रीता की मौत हो गई थी।
बाकी बचे तीन मासूम बच्चे राकेश, रवि और सीता जिला अस्पताल में भर्ती थे। रेलवे के वेलफेयर इंस्पेक्टर और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी का कहना है कि तीनों ही बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर वे लोग काफी गंभीर हैं। इसीलिए उन्हें खास निगरानी में रखा जाएगा। उन्हें मिलने वाले मुआवजे भी बच्चों के नाम एकाउंट खोल कर जमा कर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में उनके काम आ सके।
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सुबह से लेकर शाम तक चली कागजी खानापूरी
वैसे तो शुक्रवार को ही जिला चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. एनके श्रीवास्तव, रेलवे के वेलफेयर इंस्पेक्टर सुधीर तिवारी, सीडब्ल्यूसी के देशराज मौर्य ने बैठक करके बच्चों को बाल गृह भेजने का फैसला ले लिया था। इस बारे में सीडब्ल्यूसी ने आदेश भी बना दिया, ताकि इसी आदेश पर उन्हें राजकीय शिशु सदन प्राग नारायण रोड लखनऊ में प्रवेश मिल जाए। इसके बाद भी शनिवार को सुबह से लेकर शाम तक कागजी खानापूरी करने और अफसरों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा।
वजन
ट्रेन हादसे में अनाथ हुए तीनों मासूमों की उम्र को देखते हुए उनकी सुरक्षा पर खास प्रबंध किए जाएंगे। भले ही राजकीय शिशु सदन में उन्हें भेजा जा रहा है, लेकिन कमेटी की नजर उन पर हमेशा रहेगी। यदि दो महीने के भीतर परिवारीजनों में कोई जिम्मेदार व्यक्ति बच्चों को पालने की जिम्मेदारी लेगा तो कमेटी उस पर विचार करेगी।
-देशराज मौर्य, अध्यक्ष, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी रायबरेली
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बिहार के मुंगेर जिले में खड़कपुर थाना क्षेत्र के किशनपुर गांव निवासी स्व. मोहन मांझी की पत्नी सुनीता अपने बच्चों शंभू (25), राकेश (12), रवि (7), जुड़वा बेटियों रीता व सीता (दोनों एक साल) के साथ न्यू फरक्का एक्सप्रेस से जा रही थी। ट्रेन हादसे ने सुनीता, शंभू और रीता की मौत हो गई थी।
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बाकी बचे तीन मासूम बच्चे राकेश, रवि और सीता जिला अस्पताल में भर्ती थे। रेलवे के वेलफेयर इंस्पेक्टर और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी का कहना है कि तीनों ही बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर वे लोग काफी गंभीर हैं। इसीलिए उन्हें खास निगरानी में रखा जाएगा। उन्हें मिलने वाले मुआवजे भी बच्चों के नाम एकाउंट खोल कर जमा कर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में उनके काम आ सके।
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सुबह से लेकर शाम तक चली कागजी खानापूरी
वैसे तो शुक्रवार को ही जिला चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. एनके श्रीवास्तव, रेलवे के वेलफेयर इंस्पेक्टर सुधीर तिवारी, सीडब्ल्यूसी के देशराज मौर्य ने बैठक करके बच्चों को बाल गृह भेजने का फैसला ले लिया था। इस बारे में सीडब्ल्यूसी ने आदेश भी बना दिया, ताकि इसी आदेश पर उन्हें राजकीय शिशु सदन प्राग नारायण रोड लखनऊ में प्रवेश मिल जाए। इसके बाद भी शनिवार को सुबह से लेकर शाम तक कागजी खानापूरी करने और अफसरों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा।
वजन
ट्रेन हादसे में अनाथ हुए तीनों मासूमों की उम्र को देखते हुए उनकी सुरक्षा पर खास प्रबंध किए जाएंगे। भले ही राजकीय शिशु सदन में उन्हें भेजा जा रहा है, लेकिन कमेटी की नजर उन पर हमेशा रहेगी। यदि दो महीने के भीतर परिवारीजनों में कोई जिम्मेदार व्यक्ति बच्चों को पालने की जिम्मेदारी लेगा तो कमेटी उस पर विचार करेगी।
-देशराज मौर्य, अध्यक्ष, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी रायबरेली