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अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर लॉडलों को मिलेगा पका-पकाया भोजन
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रायबरेली। जिले में परिषदीय स्कूलों में एमडीएम की तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले करीब 1.93 लाख बच्चों को पका-पकाया भोजन देने की मंशा चार महीने बाद परवान चढ़ने जा रही है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी को कई महीने पहले ही 4.93 करोड़ रुपये हॉट कुक्ड प्लान (एचकेपी) शुरू कराने के लिए मिल गए थे, लेकिन शासन से गाइडलाइन न आने के कारण योजना शुरू नहीं हो सकी।
बीते 10 अगस्त से ये योजना शुरू होनी थी। कुछ स्कूलों में भोजन पकवाना शुरू भी करा दिया गया था, मगर बजट न मिलने के कारण एचकेपी संचालित नहीं हो सका।
जिले में 2833 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर आने वाले तीन से छह साल की उम्र के बच्चों को पका पकाया भोजन देने की मंशा है।
पिछले अगस्त महीने में हॉट कुक्ड प्लान संचालित कराने के लिए जिले को 4.93 करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे। शासन की मंशा पर हॉट कुक्ड प्लान के तहत भोजन प्राथमिक स्कूलों में एमडीएम की तर्ज पर भोजन बनवाने का लक्ष्य था।
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इसके लिए प्रधानों को प्रति बच्चा साढे़ चार रुपये के हिसाब से जिले को बजट दिया गया, लेकिन गाइडलाइन न आने के कारण योजना शुरू नहीं हो सकी।
शासन ने ये तय नहीं किया था कि बच्चों के भोजन के लिए राशन की व्यवस्था कहां सेे होगी। अब शासन की गाइडलाइन आ गई है। कोटेदारों को ही राशन की व्यवस्था करानी है।
इसके बदले में सीधे विभाग को राशन का भुगतान होगा। गाइडलाइन आने के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी ने योजना को शुरू कराने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रधानों के लाखों रुपये फंसे
बीती 10 अगस्त को योजना शुरू कराकर प्रधानों ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए एचकेपी बनवाना शुरू कर दिया था। करीब एक महीने तक भोजन मुहैया कराने के बाद प्रधानों ने योजना बंद करा दी। प्रधानों को उम्मीद थी कि बजट मिल जाएगा, लेकिन अब तक उन्हें भुगतान नहीं हो सका।
एमडीएम के साथ ही एचकेपी बनवाया जाएगा। शासन से गाइडलाइन आने के बाद जल्द ही हॉट कुक्ड प्लान शुरू कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन से 4.93 करोड़ रुपये बजट पहले ही मिल चुका है।
कन्हैयालाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिला कार्यक्रम अधिकारी को कई महीने पहले ही 4.93 करोड़ रुपये हॉट कुक्ड प्लान (एचकेपी) शुरू कराने के लिए मिल गए थे, लेकिन शासन से गाइडलाइन न आने के कारण योजना शुरू नहीं हो सकी।
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बीते 10 अगस्त से ये योजना शुरू होनी थी। कुछ स्कूलों में भोजन पकवाना शुरू भी करा दिया गया था, मगर बजट न मिलने के कारण एचकेपी संचालित नहीं हो सका।
जिले में 2833 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर आने वाले तीन से छह साल की उम्र के बच्चों को पका पकाया भोजन देने की मंशा है।
पिछले अगस्त महीने में हॉट कुक्ड प्लान संचालित कराने के लिए जिले को 4.93 करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे। शासन की मंशा पर हॉट कुक्ड प्लान के तहत भोजन प्राथमिक स्कूलों में एमडीएम की तर्ज पर भोजन बनवाने का लक्ष्य था।
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इसके लिए प्रधानों को प्रति बच्चा साढे़ चार रुपये के हिसाब से जिले को बजट दिया गया, लेकिन गाइडलाइन न आने के कारण योजना शुरू नहीं हो सकी।
शासन ने ये तय नहीं किया था कि बच्चों के भोजन के लिए राशन की व्यवस्था कहां सेे होगी। अब शासन की गाइडलाइन आ गई है। कोटेदारों को ही राशन की व्यवस्था करानी है।
इसके बदले में सीधे विभाग को राशन का भुगतान होगा। गाइडलाइन आने के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी ने योजना को शुरू कराने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्रधानों के लाखों रुपये फंसे
बीती 10 अगस्त को योजना शुरू कराकर प्रधानों ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए एचकेपी बनवाना शुरू कर दिया था। करीब एक महीने तक भोजन मुहैया कराने के बाद प्रधानों ने योजना बंद करा दी। प्रधानों को उम्मीद थी कि बजट मिल जाएगा, लेकिन अब तक उन्हें भुगतान नहीं हो सका।
एमडीएम के साथ ही एचकेपी बनवाया जाएगा। शासन से गाइडलाइन आने के बाद जल्द ही हॉट कुक्ड प्लान शुरू कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन से 4.93 करोड़ रुपये बजट पहले ही मिल चुका है।
कन्हैयालाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी