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खाकी की जांच में एनटीपीसी में हो रहे कारनामों की खुल रही कलई
Updated Sun, 20 May 2018 11:48 PM IST
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दो साल से सेंट्रल स्टोर का ऑडिट कराना भूले अफसर
रायबरेली। देश के कई राज्यों को बिजली आपूर्ति करने वाली एनटीपीसी ऊंचाहार इन दिनों सुर्खियों में है। पुलिस की जांच में एनटीपीसी में हो रहे कारनामों की कलई न सिर्फ अब बेपर्दा होने लगी है, बल्कि 1.85 करोड़ के कॉपर निर्मित स्टाटर बाइंडिंग बार गायब होने के मामले में परदे के पीछे-कौन लोग शामिल हैं, उन तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
पुलिस सूत्रों की मानें तो करीब दो साल गुजर गए, एनटीपीसी के सेंट्रल स्टोर की ऑडिट कराना तक अफसर भूल गए। यह हाल तब है, जब हर साल स्टोर में कितना सामान आया, कितने सामान की खपत की गई, इसका पूरा लोखा-जोखा ऑडिट में देखा जाता है।
यदि पहले यह ऐसा हुआ तो शायद स्टाटर बाइडिंग बार गायब होेने के मामले का खुलासा पहले ही हो जाता। जाहिर है कि किसी न किसी अफसर की मिलीभगत के कारण ही ऑडिट नहीं कराया गया होगा।
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एनटीपीसी ऊंचाहार स्थित सेंट्रल स्टोर से जिस तरह करोडो़ं रुपये की निर्मित स्टाटर बाइडिंग गायब की गई, उससे न सिर्फ सीआईएसएफ की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा है, बल्कि एनटीपीसी के अफसरों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
ऊंचाहार थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद ऊंचाहार पुलिस इस मामले की तह तक जानने की कोशिश कर रही है।
यह मामला इतना गंभीर हो गया है कि हर दिन कोई न कोई सीआईएसएफ का या फिर एनटीपीसी के उच्चाधिकारी यहां पहुंचकर मामले की जांच कर रहा है। पहले सीआईएसएफ के डीआईजी एके सिंह और फिर क्षेत्रीय अधिशासी निदेशक एनटीपीसी केके सिंह ने जांच की थी।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि 2016 से एनटीपीसी के सेंट्रल स्टोर के सामान का अंकेक्षण (ऑडिट) नहीं कराया गया। इससे जाहिर है कि अधिकारियों को पहले से ही इसकी भनक थी कि स्टाटर बाइडिंग बार गायब हो गए हैं।
कोई इसका खुलासा करने के लिए आगे नहीं आ रहा था। एक भूमिका के तहत लंबे अरसे बाद इसका खुलासा किया गया। इसको लेकर सीआईएसएफ और एनटीपीसी के अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक से बयान दर्ज हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि गबन को लेकर मजबूतक्लू मिले हैं। पुख्ता साक्ष्य के साथ आरोपियों पर हाथ डाला जाएगा।
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रायबरेली। देश के कई राज्यों को बिजली आपूर्ति करने वाली एनटीपीसी ऊंचाहार इन दिनों सुर्खियों में है। पुलिस की जांच में एनटीपीसी में हो रहे कारनामों की कलई न सिर्फ अब बेपर्दा होने लगी है, बल्कि 1.85 करोड़ के कॉपर निर्मित स्टाटर बाइंडिंग बार गायब होने के मामले में परदे के पीछे-कौन लोग शामिल हैं, उन तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
पुलिस सूत्रों की मानें तो करीब दो साल गुजर गए, एनटीपीसी के सेंट्रल स्टोर की ऑडिट कराना तक अफसर भूल गए। यह हाल तब है, जब हर साल स्टोर में कितना सामान आया, कितने सामान की खपत की गई, इसका पूरा लोखा-जोखा ऑडिट में देखा जाता है।
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यदि पहले यह ऐसा हुआ तो शायद स्टाटर बाइडिंग बार गायब होेने के मामले का खुलासा पहले ही हो जाता। जाहिर है कि किसी न किसी अफसर की मिलीभगत के कारण ही ऑडिट नहीं कराया गया होगा।
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एनटीपीसी ऊंचाहार स्थित सेंट्रल स्टोर से जिस तरह करोडो़ं रुपये की निर्मित स्टाटर बाइडिंग गायब की गई, उससे न सिर्फ सीआईएसएफ की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा है, बल्कि एनटीपीसी के अफसरों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
ऊंचाहार थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद ऊंचाहार पुलिस इस मामले की तह तक जानने की कोशिश कर रही है।
यह मामला इतना गंभीर हो गया है कि हर दिन कोई न कोई सीआईएसएफ का या फिर एनटीपीसी के उच्चाधिकारी यहां पहुंचकर मामले की जांच कर रहा है। पहले सीआईएसएफ के डीआईजी एके सिंह और फिर क्षेत्रीय अधिशासी निदेशक एनटीपीसी केके सिंह ने जांच की थी।
पुलिस सूत्रों का दावा है कि 2016 से एनटीपीसी के सेंट्रल स्टोर के सामान का अंकेक्षण (ऑडिट) नहीं कराया गया। इससे जाहिर है कि अधिकारियों को पहले से ही इसकी भनक थी कि स्टाटर बाइडिंग बार गायब हो गए हैं।
कोई इसका खुलासा करने के लिए आगे नहीं आ रहा था। एक भूमिका के तहत लंबे अरसे बाद इसका खुलासा किया गया। इसको लेकर सीआईएसएफ और एनटीपीसी के अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक से बयान दर्ज हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि गबन को लेकर मजबूतक्लू मिले हैं। पुख्ता साक्ष्य के साथ आरोपियों पर हाथ डाला जाएगा।