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करोड़ों की दवाओं की 258 डिमांड खारिज, 50 से अधिक दवाएं खत्म
Updated Mon, 03 Dec 2018 11:48 PM IST
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रायबरेली। जिला अस्पताल व ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों से जुड़ी करीब 30 लाख आबादी के सामने दवा की समस्या हो गई है। अस्पतालों में रोगियों को दी जाने वाली जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति ठप हो गई है। करोड़ों रुपये की दवाओं की आपूर्ति के लिए भेजी गई 258 मांग तक खारिज कर दी गई हैं। ड्रग, वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बिगड़ने का सीधा नुकसान रोगियों को भुगतना पड़ रहा है। दवाएं न मिलने से मरीजों को अस्पतालों से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों में रोगियों में बांटने के लिए सीधे दवाओं की आपूर्ति सीएमएसडी (केंद्रीय दवा भंडार) लखनऊ से होती है। सीएमओ व सीएमएस दवाओं की आपूर्ति के लिए मांग भेजते हैं। दवाएं मिलते ही सीएचसी और पीएचसी को उपलब्ध कराई जाती हैं।
पिछले 45 दिन में जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए तीन सौ से अधिक मांग सीएमएसडी को भेजी गईं, लेकिन आपूर्ति न हो पाने के कारण 258 मांग खारिज कर दी गई हैं। जिले के किसी भी अस्पताल में एंटीबायटिक टैबलेट उपलब्ध नहीं है।
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इसके अलावा पैरासीटामॉल, कैल्सियम, एजिथ्रोमाइसिन, ऑक्सीटोसिन, आयरन आदि सहित 50 प्रकार की दवाओं की किल्लत बढ़ गई है। रोगियों को अस्पतालों में दवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मेंटल व एनसीडी के राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित
दवाओं की आपूर्ति न हो पाने के कारण मानसिक रोग नियंत्रण के लिए संचालित कार्यक्रम पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। मेंटल की सोडियम वाल्प्रेट टैबलेट कई महीने से न होने के कारण कार्यक्रम ठप हो गया है। इसके अलावा जटिल बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए संचालित एनसीडी क्लीनिकें भी प्रभावित हो गई हैं। इन राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए दवाएं शासन ने नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में ये कार्यक्रम कागजों पर ही संचालित हो रहे हैं।
जिला अस्पताल में एआरवी खत्म, सीएमओ से ली उधार
जिला अस्पताल में जरूरी दवाओं के साथ ही एंटी रैबीज वैनम (एआरवी) भी खत्म हो गई है। सोमवार को सीएमओ से 200 एआरवी उधार ली गई हैं। जब व्यवस्था होगी तो एआरवी सीएमओ को वापस करेंगे। कई और दवाएं भी सीएमओ कार्यालय स्थित गोदाम से जिला अस्पताल को उपलब्ध कराई गई हैं।
वर्जन
मांग के 45 दिन में दवाओं की आपूर्ति न हो पाने के कारण डिमांड खारिज हो जाती है। इसी कारण 258 मांग खारिज हो गई हैं। दवाआें की आपूर्ति के लिए दोबारा मांग भेजी जा रही है। जिले के अस्पतालों में दवाआें की समस्या आ रही है। हालांकि रोगियों को दवा के लिए परेशान नहीं होना पडे़गा।
- डॉ. डीके सिंह, सीएमओ
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सरकारी अस्पतालों में रोगियों में बांटने के लिए सीधे दवाओं की आपूर्ति सीएमएसडी (केंद्रीय दवा भंडार) लखनऊ से होती है। सीएमओ व सीएमएस दवाओं की आपूर्ति के लिए मांग भेजते हैं। दवाएं मिलते ही सीएचसी और पीएचसी को उपलब्ध कराई जाती हैं।
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पिछले 45 दिन में जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए तीन सौ से अधिक मांग सीएमएसडी को भेजी गईं, लेकिन आपूर्ति न हो पाने के कारण 258 मांग खारिज कर दी गई हैं। जिले के किसी भी अस्पताल में एंटीबायटिक टैबलेट उपलब्ध नहीं है।
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इसके अलावा पैरासीटामॉल, कैल्सियम, एजिथ्रोमाइसिन, ऑक्सीटोसिन, आयरन आदि सहित 50 प्रकार की दवाओं की किल्लत बढ़ गई है। रोगियों को अस्पतालों में दवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मेंटल व एनसीडी के राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित
दवाओं की आपूर्ति न हो पाने के कारण मानसिक रोग नियंत्रण के लिए संचालित कार्यक्रम पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। मेंटल की सोडियम वाल्प्रेट टैबलेट कई महीने से न होने के कारण कार्यक्रम ठप हो गया है। इसके अलावा जटिल बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए संचालित एनसीडी क्लीनिकें भी प्रभावित हो गई हैं। इन राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए दवाएं शासन ने नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में ये कार्यक्रम कागजों पर ही संचालित हो रहे हैं।
जिला अस्पताल में एआरवी खत्म, सीएमओ से ली उधार
जिला अस्पताल में जरूरी दवाओं के साथ ही एंटी रैबीज वैनम (एआरवी) भी खत्म हो गई है। सोमवार को सीएमओ से 200 एआरवी उधार ली गई हैं। जब व्यवस्था होगी तो एआरवी सीएमओ को वापस करेंगे। कई और दवाएं भी सीएमओ कार्यालय स्थित गोदाम से जिला अस्पताल को उपलब्ध कराई गई हैं।
वर्जन
मांग के 45 दिन में दवाओं की आपूर्ति न हो पाने के कारण डिमांड खारिज हो जाती है। इसी कारण 258 मांग खारिज हो गई हैं। दवाआें की आपूर्ति के लिए दोबारा मांग भेजी जा रही है। जिले के अस्पतालों में दवाआें की समस्या आ रही है। हालांकि रोगियों को दवा के लिए परेशान नहीं होना पडे़गा।
- डॉ. डीके सिंह, सीएमओ