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Noida News: सर, मैं बैंक से बोल रहा हूं...और खाते से निकल गए 14.30 लाख
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- पहले भरोसा जीता, फिर खाता किया खाल... दो लोगों से 21 लाख की ठगी
-लिंक पर क्लिक करने से खाते से गायब हुई रकम, गूगल पर रीव्यूह करने के बहाने दिया लालच
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में साइबर ठगी के दो चौंकाने वाले मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जालसाजों ने ठगी के अलग-अलग तरीके अपनाकर एक कारोबारी और एक आईटी कर्मचारी को अपना शिकार बनाया और महज कुछ समय में दोनों से कुल 21.30 लाख रुपये ऐंठ लिए। एक मामले में बैंक अधिकारी बनकर 14.30 लाख रुपये ठगे गए, जबकि दूसरे में काम दिलाने का झांसा देकर सात लाख रुपये की ठगी की गई। दोनों मामलों में साइबर थाने की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर 150 निवासी 55 वर्षीय एक कारोबारी ने बताया उन्होंने 1 जुलाई को अपने बैंक के ग्राहक सेवा नंबर की तलाश की थी। दो जुलाई को व्हाट्सएप पर एक कॉल आई। ठग ने स्वयं को बैंक अधिकारी बताते हुए नंबर पर एक लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करते ही एपीके फाइल डाउनलोड हुई जिसमें जरूरी जानकारी भरने की बात कही गई। इसके तुरंत बाद उनके मोबाइल पर लगातार ओटीपी आने लगे। कुछ ही देर में उनके खाते से 14.30 लाख रुपये दूसरे बैंक खाते में चले गए। जानकारी होने पर जब नंबर पर दोबारा कॉल करनी चाही तो नंबर बंद मिला।
टेलीग्राम ग्रुप से जोड़कर बनाया शिकार :
ऐसे ही सेक्टर-79 स्थित एक सोसाइटी के रहने वाले 35 वर्षीय आईटी कंपनी कर्मचारी भी ठगी के शिकार हो गए। बताया कि बीते साल 15 मई को उनके व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया। जिसमें फ्रीलांसिंग करने पर भुगतान करने की बात कही गई। शुरुआत में गूगल मैप पर होटल और रेस्टोरेंट की रीव्यू का कार्य दिया गया। जिससे 2800 रुपये का मुनाफा मिला। बाद में उन्हें टेलीग्राम ग्रुप पर एक चैनल से जोड़ा गया। जहां क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कार्य और वेबसाइट पर रुपये जमा कराने के नाम पर उनसे कुल सात लाख पांच हजार रुपये ठग लिए गए। डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बताया मामलों की जांच की जा रही है।
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-लिंक पर क्लिक करने से खाते से गायब हुई रकम, गूगल पर रीव्यूह करने के बहाने दिया लालच
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में साइबर ठगी के दो चौंकाने वाले मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जालसाजों ने ठगी के अलग-अलग तरीके अपनाकर एक कारोबारी और एक आईटी कर्मचारी को अपना शिकार बनाया और महज कुछ समय में दोनों से कुल 21.30 लाख रुपये ऐंठ लिए। एक मामले में बैंक अधिकारी बनकर 14.30 लाख रुपये ठगे गए, जबकि दूसरे में काम दिलाने का झांसा देकर सात लाख रुपये की ठगी की गई। दोनों मामलों में साइबर थाने की पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर 150 निवासी 55 वर्षीय एक कारोबारी ने बताया उन्होंने 1 जुलाई को अपने बैंक के ग्राहक सेवा नंबर की तलाश की थी। दो जुलाई को व्हाट्सएप पर एक कॉल आई। ठग ने स्वयं को बैंक अधिकारी बताते हुए नंबर पर एक लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करते ही एपीके फाइल डाउनलोड हुई जिसमें जरूरी जानकारी भरने की बात कही गई। इसके तुरंत बाद उनके मोबाइल पर लगातार ओटीपी आने लगे। कुछ ही देर में उनके खाते से 14.30 लाख रुपये दूसरे बैंक खाते में चले गए। जानकारी होने पर जब नंबर पर दोबारा कॉल करनी चाही तो नंबर बंद मिला।
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टेलीग्राम ग्रुप से जोड़कर बनाया शिकार :
ऐसे ही सेक्टर-79 स्थित एक सोसाइटी के रहने वाले 35 वर्षीय आईटी कंपनी कर्मचारी भी ठगी के शिकार हो गए। बताया कि बीते साल 15 मई को उनके व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया। जिसमें फ्रीलांसिंग करने पर भुगतान करने की बात कही गई। शुरुआत में गूगल मैप पर होटल और रेस्टोरेंट की रीव्यू का कार्य दिया गया। जिससे 2800 रुपये का मुनाफा मिला। बाद में उन्हें टेलीग्राम ग्रुप पर एक चैनल से जोड़ा गया। जहां क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कार्य और वेबसाइट पर रुपये जमा कराने के नाम पर उनसे कुल सात लाख पांच हजार रुपये ठग लिए गए। डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बताया मामलों की जांच की जा रही है।
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