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बसहा नाले पर निर्माणाधीन पुल में आईं दरारें
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Thu, 14 Jul 2016 11:40 PM IST
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रायबरेली में बुधवार को खीरों ब्लॉक क्षेत्र के बसहा नाले पर बने पुल की दीवार में आई दरारें।
- फोटो : अमर उजाला
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शासन-प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी लोक निर्माण विभाग में अंधेरगर्दी थमने का नाम नहीं ले रही है। समय-समय पर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहने वाले विभागीय अफसरों ने इस बार हद ही पार कर दी। खीरों ब्लॉक क्षेत्र में बसहा नाले पर बन रहे पुल की दीवारों में अभी से दरारें आ गईं है।
इस पुल की लागत भी कम नहीं है। इस पर करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। बावजूद इसके अफसरों ने शासन की मंशा के विपरीत पुल की गुणवत्ता को दांव पर लगा दिया। अब इस पर पर्दा डालने की कोशिशें शुरू हो गईं हैं।
इस पुल से होकर क्षेत्र के लोदीपुर, धुराई, रनापुर पहरौली, बरौंडी, अतरहर, कुसड़ी, खुष्टी, हरदी समेत 12 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीण प्रतिदिन गुजरते हैं। बसहा नाले में बरसात के दिनों में पानी आ जाता है। इससे ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
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इसे देखते हुए शंकरखेड़ा-पोठई गांव के बीच गऊघाट पर पुल का निर्माण कराया जा रहा है। पुल बनवाने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग खंड द्वितीय को दी गई हैै। एक करोड़ से अधिक का कार्य होने पर प्रक्रिया के तहत लखनऊ में हुए टेंडर में रायबरेली की निजी कार्यदायी संस्था मै. गुप्ता बिल्डर को इसका ठेका दिया गया है।
आलम यह है कि निर्माणाधीन पुल की दीवारों में अभी से दरारें आ गईं हैं। वहीं ठेकेदार कमलेश गुप्ता का कहना है कि पुल में मिट्टी की भराई गई थी। बारिश में मिट्टी के फैलने से दरार आई हैं। काम अभी चल रहा है। पुल की दीवारों में आई दरारों को ठीक करा दिया जाएगा।
जानकारों की माने तो पुल के निर्माण में हो रही धांधली को लेकर इलाकाई ग्रामीणों ने पहले भी आवाज उठाई थीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि पुल में निम्न दर्जे के मसाले और पीले ईंटों के प्रयोग किया जा रहा है। पर अफसरों की मिलीभगत से इन शिकायतों को दबा दिया गया।
क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल के निर्माण में बरती जा रही खामियों के चलते ये पुल ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकता। अफसर भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। निर्माण के शुरू होने के पहले भी यह पुल एक बार चर्चा में आया था।
इस पुल को सहारा बनाकर आम जनता का वोट हथियाने के लिए सपा और कांग्रेस में टकराव के हालात बन गए थे। सपाई पुल को अपने द्वारा बनवाया जाना बता रहे थे, जबकि कांग्रेस इसी पुल के सहारे वोटरों को अपने पाले में लाना चाह रही थी। यह मामला थाने तक भी पहुंचा था।
पीडब्ल्यूडी द्वितीय के एक्सईएन जय सिंह का कहना है कि बसहा नाले पर बन रहे पुल की दीवारों में दरारें आने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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इस पुल की लागत भी कम नहीं है। इस पर करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। बावजूद इसके अफसरों ने शासन की मंशा के विपरीत पुल की गुणवत्ता को दांव पर लगा दिया। अब इस पर पर्दा डालने की कोशिशें शुरू हो गईं हैं।
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इस पुल से होकर क्षेत्र के लोदीपुर, धुराई, रनापुर पहरौली, बरौंडी, अतरहर, कुसड़ी, खुष्टी, हरदी समेत 12 से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीण प्रतिदिन गुजरते हैं। बसहा नाले में बरसात के दिनों में पानी आ जाता है। इससे ग्रामीणों को आने-जाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
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इसे देखते हुए शंकरखेड़ा-पोठई गांव के बीच गऊघाट पर पुल का निर्माण कराया जा रहा है। पुल बनवाने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग खंड द्वितीय को दी गई हैै। एक करोड़ से अधिक का कार्य होने पर प्रक्रिया के तहत लखनऊ में हुए टेंडर में रायबरेली की निजी कार्यदायी संस्था मै. गुप्ता बिल्डर को इसका ठेका दिया गया है।
आलम यह है कि निर्माणाधीन पुल की दीवारों में अभी से दरारें आ गईं हैं। वहीं ठेकेदार कमलेश गुप्ता का कहना है कि पुल में मिट्टी की भराई गई थी। बारिश में मिट्टी के फैलने से दरार आई हैं। काम अभी चल रहा है। पुल की दीवारों में आई दरारों को ठीक करा दिया जाएगा।
जानकारों की माने तो पुल के निर्माण में हो रही धांधली को लेकर इलाकाई ग्रामीणों ने पहले भी आवाज उठाई थीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि पुल में निम्न दर्जे के मसाले और पीले ईंटों के प्रयोग किया जा रहा है। पर अफसरों की मिलीभगत से इन शिकायतों को दबा दिया गया।
क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल के निर्माण में बरती जा रही खामियों के चलते ये पुल ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकता। अफसर भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। निर्माण के शुरू होने के पहले भी यह पुल एक बार चर्चा में आया था।
इस पुल को सहारा बनाकर आम जनता का वोट हथियाने के लिए सपा और कांग्रेस में टकराव के हालात बन गए थे। सपाई पुल को अपने द्वारा बनवाया जाना बता रहे थे, जबकि कांग्रेस इसी पुल के सहारे वोटरों को अपने पाले में लाना चाह रही थी। यह मामला थाने तक भी पहुंचा था।
पीडब्ल्यूडी द्वितीय के एक्सईएन जय सिंह का कहना है कि बसहा नाले पर बन रहे पुल की दीवारों में दरारें आने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।