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बच्चों के प्रति लापरवाह न बनें, लक्षणों को न करें नजरअंदाज
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रायबरेली। कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों को सबसे अधिक असर होने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग गंभीर हो गया है। स्वास्थ्य महानिदेशक के निर्देश के बाद जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया गया है।
लोगों से अपील की गई है कि बच्चों के प्रति माता-पिता तनिक भी लापरवाह न बनें। लक्षण नजर आते ही गंभीर होकर ध्यान दें। 27 जून से होने वाली स्क्रीनिंग और दवा किट के वितरण में शत प्रतिशत सहयोग की भी अपील की गई है।
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि तीसरी लहर में बच्चों प्रभावित होने की आशंका जाहिर की जा रही है। ऐसे में हमें पहले से ही सावधानी बरतनी है। जन्म से लेकर 12 माह तक के बच्चों पर सावधानी बरतकर किसी अप्रिय घटना से बच सकते हैं।
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लगातार कई दिनों तक यदि बच्चे को 101 डिग्री से अधिक बुखार या लगातार दस्त आए, अत्यधिक खांसी, पसली का चलना, बच्चा दूध या खुराक लेना बंद कर दे, अत्यधिक रोए तो गंभीर स्थिति हो सकती है।
ऑक्सीजन स्तर 94 से नीचे हो तो बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या एएनएम सेंटर पर लेकर जाएं। लक्षण वाले बच्चों का इलाज जरूरी है। 27 जून से होने वाले स्क्रीनिंग कार्यक्रम में अधिक से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग करवाएं और दवा किट प्राप्त करें।
बिना डॉक्टर की सलाह बच्चों ने न दें दवाएं: अस्थाना
जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना का कहना है कि लक्षण दिखने पर बच्चे को बिना किसी चिकित्सक की सलाह के दवा नहीं देनी है। दस्त होने की स्थिति में बच्चे को जीवन रक्षक घोल देना है।
एक लीटर पानी को उबालकर ठंडा कर लें। इसके बाद एक लीटर पानी में पूरा पैकेट घोलकर एक बर्तन में ढक कर रखें। हर बार दस्त होने के बाद बच्चे को दें। समस्या की जानकारी के लिए राज स्तरीय हेल्पलाइन नंबर 18001805145 या 104 पर कॉल करें। छह माह तक के बच्चे को मल्टी विटामिन नहीं देनी है। चिकित्सक की सलाह लें और डॉक्टर की सलाह पर ही बच्चों को दवा दें।
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लोगों से अपील की गई है कि बच्चों के प्रति माता-पिता तनिक भी लापरवाह न बनें। लक्षण नजर आते ही गंभीर होकर ध्यान दें। 27 जून से होने वाली स्क्रीनिंग और दवा किट के वितरण में शत प्रतिशत सहयोग की भी अपील की गई है।
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सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि तीसरी लहर में बच्चों प्रभावित होने की आशंका जाहिर की जा रही है। ऐसे में हमें पहले से ही सावधानी बरतनी है। जन्म से लेकर 12 माह तक के बच्चों पर सावधानी बरतकर किसी अप्रिय घटना से बच सकते हैं।
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लगातार कई दिनों तक यदि बच्चे को 101 डिग्री से अधिक बुखार या लगातार दस्त आए, अत्यधिक खांसी, पसली का चलना, बच्चा दूध या खुराक लेना बंद कर दे, अत्यधिक रोए तो गंभीर स्थिति हो सकती है।
ऑक्सीजन स्तर 94 से नीचे हो तो बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या एएनएम सेंटर पर लेकर जाएं। लक्षण वाले बच्चों का इलाज जरूरी है। 27 जून से होने वाले स्क्रीनिंग कार्यक्रम में अधिक से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग करवाएं और दवा किट प्राप्त करें।
बिना डॉक्टर की सलाह बच्चों ने न दें दवाएं: अस्थाना
जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना का कहना है कि लक्षण दिखने पर बच्चे को बिना किसी चिकित्सक की सलाह के दवा नहीं देनी है। दस्त होने की स्थिति में बच्चे को जीवन रक्षक घोल देना है।
एक लीटर पानी को उबालकर ठंडा कर लें। इसके बाद एक लीटर पानी में पूरा पैकेट घोलकर एक बर्तन में ढक कर रखें। हर बार दस्त होने के बाद बच्चे को दें। समस्या की जानकारी के लिए राज स्तरीय हेल्पलाइन नंबर 18001805145 या 104 पर कॉल करें। छह माह तक के बच्चे को मल्टी विटामिन नहीं देनी है। चिकित्सक की सलाह लें और डॉक्टर की सलाह पर ही बच्चों को दवा दें।