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5.98 अरब रुपये के चक्कर में अधूरी पड़ीं 105 परियोजनाएं
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केस एक
राजकीय संप्रेक्षण गृह को बजट का इंतजार
शहर के गोराबाजार में निर्माणाधीन राजकीय संप्रेक्षण गृह बजट के अभाव में अधूरा है। 5.02 करोड़ रुपये की लागत के इस भवन का काम पैकफेड करवा रहा है। चार साल में निर्माण इकाई को 3.50 करोड़ रुपये ही मिले हैं। शासन से डेढ़ करोढ़ रुपये न मिल पाने के कारण काम पूरा नहीं हो पा रहा है। हालांकि निर्माण एजेंसी ने मिले बजट के एवज में काम पूरा करवा दिया है। बजट के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। बजट मिलने के बाद ही यह काम पूरा हो सकेगा।
केस दो
तीन साल से बंद सिटी रिसोर्स सेंटर का काम
शहर के कैनाल रोड पर सिटी रिसोर्स सेंटर पांच साल से निर्माणाधीन है। 12.14 करोड़ की लागत के इस भवन का काम निर्माण एजेंसी सीएंडडीएस को दिया गया है। निर्माण एजेंसी को अब तक 6.01 करोड़ रुपये दिए भी जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी के कारण अब तक पूरा बजट नहीं मिल सका है। स्थिति यह है कि करीब तीन साल से निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप है। निर्माण कार्य में बरती लापरवाही की जांच भी अब तक पूरी नहीं हुई है।
केस तीन
34 करोड़ के फ्लैटों को मिले मात्र 1.68 करोड़
रायबरेली विकास प्राधिकरण की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर के बरखापुर में फ्लैट बनवाए जा रहे हैं। करीब 34 करोड़ की लागत के इन फ्लैटों का काम अब तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन शासन ने अब 1.68 करोड़ रुपये ही मिले हैं।
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हालांकि आरडीए ने अब तक 7.18 करोड़ रुपये खर्च कर दिया है। धनाभाव के कारण यह काम भी ठप हो गया है। कई बार पत्र लिखे जाने के बाद ही बजट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गरीबों को छत नहीं मिल पा रही है।
रायबरेली। जिले में 12.05 अरब की लागत से 117 परियोजनाओं को शुरू तो करा दिया गया, लेकिन उन्हें पूरा करवाना अफसर भूल गए। निर्माण एजेंसियों को 5.98 अरब न मिल पाने के कारण 105 परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। अब तक 12 परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं।
निर्माण कार्यों में कार्यदायी विभागों की मनमानी और शासन से बजट न मिलने के कारण कई परियोजनाएं पांच साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई हैं। बजट के लिए डिमांड के बाद ही धनराशि नहीं मिल पा रही है।
अधूरी परियोजनाओं में सबसे अधिक जल निगम की 33 और लोक निर्माण विभाग की 30 काम शामिल हैं। निर्माण इकाई यूपीपीसीएल को भी 10 काम दिए गए हैं। वे भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
हालांकि दो दिन पहले डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने अधूरी परियोजनाओं की समीक्षा करके शासन से बजट मंगवाने के निर्देश दिए हैं। डिप्टी सीएम के गंभीर होने के बाद परियोजनाओं के पूरी होने की उम्मीद बढ़ गई है।
विभागों को अब तक अवमुक्त धनराशि
कार्यदायी विभाग कार्यों की लागत (करोड़ में) अवमुक्त धनराशि (करोड़ में)
पीडब्ल्यूडी 115.71 27.22
सेतु निगम 30.82 29.14
यूपीआरएनएस 17.13 14.61
यूपी सिडको 59.53 32.38
जल निगम 101.40 53.68
यूपी पीसीसीएल 20.58 16.12
सीएंडडीएस 135.40 74.96
आरईडी 4.22 2.98
आवास विकास 17.75 2.00
पुलिस आवास निगम 19.88 6.87
एचएससीसी 268.84 268.84
पॉवर ट्रांसमिशन 375.28 75.15
यूपीआरएनएन 11.70 11.05
पैकफेड 18.87 8.67
कुल 1205.16 606.20
डिप्टी सीएम ने अधूरी परियोजनाओं की समीक्षा की है। जिन परियोजनाओं के लिए शासन से बजट का डिमांड करना है। उनमें जल्द ही डिमांड भेजी जाएगी। कार्यों के लिए निर्माण इकाइयों को बजट दिलाकर जल्द से जल्द कार्यों को पूरा कराया जाएगा।
वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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राजकीय संप्रेक्षण गृह को बजट का इंतजार
शहर के गोराबाजार में निर्माणाधीन राजकीय संप्रेक्षण गृह बजट के अभाव में अधूरा है। 5.02 करोड़ रुपये की लागत के इस भवन का काम पैकफेड करवा रहा है। चार साल में निर्माण इकाई को 3.50 करोड़ रुपये ही मिले हैं। शासन से डेढ़ करोढ़ रुपये न मिल पाने के कारण काम पूरा नहीं हो पा रहा है। हालांकि निर्माण एजेंसी ने मिले बजट के एवज में काम पूरा करवा दिया है। बजट के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। बजट मिलने के बाद ही यह काम पूरा हो सकेगा।
केस दो
तीन साल से बंद सिटी रिसोर्स सेंटर का काम
शहर के कैनाल रोड पर सिटी रिसोर्स सेंटर पांच साल से निर्माणाधीन है। 12.14 करोड़ की लागत के इस भवन का काम निर्माण एजेंसी सीएंडडीएस को दिया गया है। निर्माण एजेंसी को अब तक 6.01 करोड़ रुपये दिए भी जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी के कारण अब तक पूरा बजट नहीं मिल सका है। स्थिति यह है कि करीब तीन साल से निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप है। निर्माण कार्य में बरती लापरवाही की जांच भी अब तक पूरी नहीं हुई है।
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केस तीन
34 करोड़ के फ्लैटों को मिले मात्र 1.68 करोड़
रायबरेली विकास प्राधिकरण की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर के बरखापुर में फ्लैट बनवाए जा रहे हैं। करीब 34 करोड़ की लागत के इन फ्लैटों का काम अब तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन शासन ने अब 1.68 करोड़ रुपये ही मिले हैं।
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हालांकि आरडीए ने अब तक 7.18 करोड़ रुपये खर्च कर दिया है। धनाभाव के कारण यह काम भी ठप हो गया है। कई बार पत्र लिखे जाने के बाद ही बजट नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गरीबों को छत नहीं मिल पा रही है।
रायबरेली। जिले में 12.05 अरब की लागत से 117 परियोजनाओं को शुरू तो करा दिया गया, लेकिन उन्हें पूरा करवाना अफसर भूल गए। निर्माण एजेंसियों को 5.98 अरब न मिल पाने के कारण 105 परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। अब तक 12 परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं।
निर्माण कार्यों में कार्यदायी विभागों की मनमानी और शासन से बजट न मिलने के कारण कई परियोजनाएं पांच साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई हैं। बजट के लिए डिमांड के बाद ही धनराशि नहीं मिल पा रही है।
अधूरी परियोजनाओं में सबसे अधिक जल निगम की 33 और लोक निर्माण विभाग की 30 काम शामिल हैं। निर्माण इकाई यूपीपीसीएल को भी 10 काम दिए गए हैं। वे भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
हालांकि दो दिन पहले डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने अधूरी परियोजनाओं की समीक्षा करके शासन से बजट मंगवाने के निर्देश दिए हैं। डिप्टी सीएम के गंभीर होने के बाद परियोजनाओं के पूरी होने की उम्मीद बढ़ गई है।
विभागों को अब तक अवमुक्त धनराशि
कार्यदायी विभाग कार्यों की लागत (करोड़ में) अवमुक्त धनराशि (करोड़ में)
पीडब्ल्यूडी 115.71 27.22
सेतु निगम 30.82 29.14
यूपीआरएनएस 17.13 14.61
यूपी सिडको 59.53 32.38
जल निगम 101.40 53.68
यूपी पीसीसीएल 20.58 16.12
सीएंडडीएस 135.40 74.96
आरईडी 4.22 2.98
आवास विकास 17.75 2.00
पुलिस आवास निगम 19.88 6.87
एचएससीसी 268.84 268.84
पॉवर ट्रांसमिशन 375.28 75.15
यूपीआरएनएन 11.70 11.05
पैकफेड 18.87 8.67
कुल 1205.16 606.20
डिप्टी सीएम ने अधूरी परियोजनाओं की समीक्षा की है। जिन परियोजनाओं के लिए शासन से बजट का डिमांड करना है। उनमें जल्द ही डिमांड भेजी जाएगी। कार्यों के लिए निर्माण इकाइयों को बजट दिलाकर जल्द से जल्द कार्यों को पूरा कराया जाएगा।
वैभव श्रीवास्तव, डीएम