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नसीब नहीं हो रहा हरा चारा, न समय से होता इलाज, जिंदगी मौत से जूझ रहे मवेशी
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गदागंज (रायबरेली)। दीनशाह गौरा ब्लॉक क्षेत्र के हमीरमऊ गांव में बनी गोशाला में अव्यवस्थाएं हावी हैं। मवेशियों को न तो हरा चारा मिल रहा है न ही समय से इलाज हो पा रहा है। इससे में कई मवेशी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इनकी देखरेख के लिए छह कर्मचारी रखे गए हैं। उन्हें भी समय से मानदेय नहीं मिल पा रहा है।
सर्दी शुरू हो गई, लेकिन मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। मवेशी गंदगी के बीच बांधे जा रहे हैं। इससे उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है।
गोशाला में 150 मवेशी रखे जाने की क्षमता है, लेकिन मौजूदा समय में 170 मवेशी हैं। मवेशियों को केवल सूखा भूसा दिया जा रहा है। हरे चारे की व्यवस्था काफी दिनों से नहीं हुई है।
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कीचड़ और गंदगी के बीच मवेशी रखे गए हैं। कुछ मवेशी जमीन पर पड़े कराह रहे हैं। देखरेख में लगे छह कर्मचारियों को दो महीने से मानदेय नहीं मिला है। मवेशियों इलाज के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। कई मवेशी बीमारी के कारण बेहद दुबले हो गए हैं।
चौकीदार राकेश सिंह के अलावा रामबरन पाल, शांती देवी, पवन कुमार पाल, तेजभान, रामबहादुर ने बताया कि दो महीने से मानदेय नहीं मिला है। गोशाला में भूसा है, उसे मवेशियों को खिलाया जा रहा है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि समय-समय पर मवेशियों का चेकअप करके इलाज किया जाता है।
उधर, बीडीओ हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि गोशाला जिला पंचायत की है। रखरखाव किया जा रहा है। सर्दी से बचाने के लिए जिला पंचायत को पत्र लिखा जाएगा।
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सर्दी शुरू हो गई, लेकिन मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। मवेशी गंदगी के बीच बांधे जा रहे हैं। इससे उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है।
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गोशाला में 150 मवेशी रखे जाने की क्षमता है, लेकिन मौजूदा समय में 170 मवेशी हैं। मवेशियों को केवल सूखा भूसा दिया जा रहा है। हरे चारे की व्यवस्था काफी दिनों से नहीं हुई है।
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कीचड़ और गंदगी के बीच मवेशी रखे गए हैं। कुछ मवेशी जमीन पर पड़े कराह रहे हैं। देखरेख में लगे छह कर्मचारियों को दो महीने से मानदेय नहीं मिला है। मवेशियों इलाज के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। कई मवेशी बीमारी के कारण बेहद दुबले हो गए हैं।
चौकीदार राकेश सिंह के अलावा रामबरन पाल, शांती देवी, पवन कुमार पाल, तेजभान, रामबहादुर ने बताया कि दो महीने से मानदेय नहीं मिला है। गोशाला में भूसा है, उसे मवेशियों को खिलाया जा रहा है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि समय-समय पर मवेशियों का चेकअप करके इलाज किया जाता है।
उधर, बीडीओ हरिश्चंद्र गुप्ता ने बताया कि गोशाला जिला पंचायत की है। रखरखाव किया जा रहा है। सर्दी से बचाने के लिए जिला पंचायत को पत्र लिखा जाएगा।