{"_id":"61a7b5678b3d0a7f0376c70f","slug":"bypassing-the-standard-55-nursing-homes-may-be-locked-raibaraily-news-lko606961556","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानक दरकिनार, 55 नर्सिंग होम पर लग सकता है ताला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानक दरकिनार, 55 नर्सिंग होम पर लग सकता है ताला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। जिले में मानकों को ताक पर रखकर चल रहे करीब 55 नर्सिंग होम में जनवरी से ताला पड़ सकता है। कारण, शासन ने क्लीनिक्ल इस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट का कड़ाई से पालन कराने के आदेश दिए हैं।
ऐसे में समय से एक्ट के तहत संसाधन जुटाने वाले नर्सिंग होम ही चल पाएंगे। ऐसा न करने पर वे बंद हो सकते हैं। एक जनवरी से एक्ट का पालन कराने के आदेश हैं। हालांकि पहले चरण में 30 बेड वाले नर्सिंग होम को मानकों को दुरुस्त करना होगा।
जिले में वर्तमान समय में 75 नर्सिंग होम हैं। इसमें पांच नर्सिंग होम में बेडों की संख्या 30 से अधिक है। शासन ने पहले चरण में इन्हीं अस्पतालों में एक्ट के मुताबिक मानकों के अनुपालन के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
एक्ट लागू होने के बाद प्राइवेट अस्पतालों में मूलभूत संसाधन, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती राष्ट्रीय परिषद से तय मानकों के अनुसार होगी।
प्रशासन ने एक्ट को सख्ती से लागू करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। अभी तक मानकों को ताक पर रखकर इनका संचालन हो रहा है। अब आदेश आने के बाद निजी अस्पतालों के संचालकों में हड़कंप मच गया है।
एक्ट के हिसाब से ये संसाधन व मानक करने होंगे पूरे
जिले में 30 से अधिक बेड वाले नर्सिंग होम, निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटरों को नए एक्ट के तहत मानक के अनुसार बिल्डिंग बनानी होगी। अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होगा। वहीं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी लगाना होगा।
बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था होनी जरूरी है। जबकि सच्चाई ये है कि शहर के स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े करीब 70 फीसदी नर्सिंग होम इन मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। इस लिहाज से करीब 55 नर्सिंग होम पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद का पत्र आने के बाद जिले में हड़कंप मच गया है।
जिले में अवैध रूप से चल रहे हैं 20 से अधिक अस्पताल
शहर के अलावा जिले के बछरावां, ऊंचाहार, सलोन, महराजगंज, हरचंदपुर, लालगंज सहित कई कस्बों में अवैध रूप से अस्पताल चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति में लगे हैं। कार्रवाई के नाम पर नोटिस देकर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है। अवैध नर्सिंग होम्स के खिलाफ अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
छोटे अस्पतालों को मिले राहत, करेंगे आंदोलन: डॉ. मनीष
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह चौहान का कहना है कि शासन ने 30 बेड से अधिक क्षमता वाले निजी अस्पतालों में एक्ट के तहत मानक पूरे करने आदेश के आदेश हैं।
एक जनवरी से 31 मार्च तक मानकों को पूरा कराने का मौका दिया जाएगा। ऐसे में छोटे अस्पतालों को राहत दी जाए। एक्ट को दिखाकर किसी भी स्तर पर उत्पीड़न न किया जाए। यदि उत्पीड़न जैसी बात सामने आई तो आईएमए आंदोलन भी कर सकता है।
शासन स्तर से नर्सिंग होम में क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट को लागू करवाने के आदेश मिले हैं। खासकर 30 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों को मानकों को पूरा करना होगा। ऐसा न करने पर अस्पतालों में बंद कराया जाएगा। शासन से मिले आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराया जाएगा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
ऐसे में समय से एक्ट के तहत संसाधन जुटाने वाले नर्सिंग होम ही चल पाएंगे। ऐसा न करने पर वे बंद हो सकते हैं। एक जनवरी से एक्ट का पालन कराने के आदेश हैं। हालांकि पहले चरण में 30 बेड वाले नर्सिंग होम को मानकों को दुरुस्त करना होगा।
विज्ञापन
जिले में वर्तमान समय में 75 नर्सिंग होम हैं। इसमें पांच नर्सिंग होम में बेडों की संख्या 30 से अधिक है। शासन ने पहले चरण में इन्हीं अस्पतालों में एक्ट के मुताबिक मानकों के अनुपालन के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
एक्ट लागू होने के बाद प्राइवेट अस्पतालों में मूलभूत संसाधन, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती राष्ट्रीय परिषद से तय मानकों के अनुसार होगी।
प्रशासन ने एक्ट को सख्ती से लागू करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। अभी तक मानकों को ताक पर रखकर इनका संचालन हो रहा है। अब आदेश आने के बाद निजी अस्पतालों के संचालकों में हड़कंप मच गया है।
एक्ट के हिसाब से ये संसाधन व मानक करने होंगे पूरे
जिले में 30 से अधिक बेड वाले नर्सिंग होम, निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटरों को नए एक्ट के तहत मानक के अनुसार बिल्डिंग बनानी होगी। अग्निशमन विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होगा। वहीं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी लगाना होगा।
बॉयो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था होनी जरूरी है। जबकि सच्चाई ये है कि शहर के स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े करीब 70 फीसदी नर्सिंग होम इन मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। इस लिहाज से करीब 55 नर्सिंग होम पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद का पत्र आने के बाद जिले में हड़कंप मच गया है।
जिले में अवैध रूप से चल रहे हैं 20 से अधिक अस्पताल
शहर के अलावा जिले के बछरावां, ऊंचाहार, सलोन, महराजगंज, हरचंदपुर, लालगंज सहित कई कस्बों में अवैध रूप से अस्पताल चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति में लगे हैं। कार्रवाई के नाम पर नोटिस देकर मामले को रफा-दफा किया जा रहा है। अवैध नर्सिंग होम्स के खिलाफ अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
छोटे अस्पतालों को मिले राहत, करेंगे आंदोलन: डॉ. मनीष
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह चौहान का कहना है कि शासन ने 30 बेड से अधिक क्षमता वाले निजी अस्पतालों में एक्ट के तहत मानक पूरे करने आदेश के आदेश हैं।
एक जनवरी से 31 मार्च तक मानकों को पूरा कराने का मौका दिया जाएगा। ऐसे में छोटे अस्पतालों को राहत दी जाए। एक्ट को दिखाकर किसी भी स्तर पर उत्पीड़न न किया जाए। यदि उत्पीड़न जैसी बात सामने आई तो आईएमए आंदोलन भी कर सकता है।
शासन स्तर से नर्सिंग होम में क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट को लागू करवाने के आदेश मिले हैं। खासकर 30 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों को मानकों को पूरा करना होगा। ऐसा न करने पर अस्पतालों में बंद कराया जाएगा। शासन से मिले आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन कराया जाएगा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ