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बसों का पड़ा टोटा, बेहाल हुए यात्री
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रायबरेली। विधानसभा चुनाव में रायबरेली डिपो की 40 बसें लग जाने से रविवार को पॉकेट रूटों पर बसों का टोटा हो गया। इससे गंतव्य तक पहुंचने में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
यात्रियों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा। यही नहीं प्रमुख रूटों कानपुर, प्रयागराज, लखनऊ आदि पर बसों के फेरे बढ़ा दिए गए हैं, ताकि इन रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
विधानसभा चुनाव कराने के लिए रायबरेली डिपो की 40 बसें रविवार से पुलिस कर्मियों व अन्य मतदान कर्मियों को बूथों तक पहुंचाने के लिए लगा दी गईं।
मेरठ में 10 फरवरी, जबकि शाहजहांपुर जिले में 14 फरवरी को मतदान होना है। इन दोनों तिथियों में मतदान कराने के लिए बसों को लगाया गया है। रायबरेली डिपो में 84 बसें हैं। जबकि अनुबंधित बसों की संख्या करीब 50 है।
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बसों के चुनाव ड्यूटी में लगने के कारण जिले के पॉकेट रूटों सलोन, ऊंचाहार, सरेनी, भोजपुर, सतांव, खीरों, महराजगंज, शिवगढ़, डलमऊ, जायस, तिलोई आदि में बसों का टोटा पड़ गया। बसों के चुनाव में लगा दिए जाने का असर लखनऊ, प्रयागराज, दिल्ली, अयोध्या समेत अन्य प्रमुख रूटों पर पड़ा। ऐसे में डिपो के अधिकारियों ने यात्रियों की सुविधा के लिए प्रमुख रूटों पर बसों के फेरे बढ़ा दिए।
हर दिन सफर करते हैं 25 हजार यात्री
रायबरेली डिपो की बसों से हर दिन करीब 25 हजार यात्री सफर करते हैं। प्रमुख रूटों के अलावा पॉकेट रूटों पर यात्रियों को गंतव्य पर पहुंचाने के लिए सरकारी बसें ही ठीक रहती हैं।
बसों की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खास बात ये है कि चुनाव संपन्न कराने के बाद ही बसों का संचालन फिर से पॉकेट रूटों पर किया जाएगा। ऐसे में चुनाव तक यात्रियों को सफर तय करने में मशक्कत ही करनी पड़ेगी। डग्गामार वाहनों पर सफर करना जोखिम भरा भी रहता है।
विधानसभा चुनाव में रायबरेली डिपो की 40 बसें लगाई गईं हैं। बसों के चुुनाव में लग जाने के कारण पॉकेट रूटों पर असर पड़ा है, जबकि प्रमुख रूटों पर यात्रियों की सुविधा के लिए बसों के फेरे बढ़ा दिए गए हैं। फिलहाल प्रयास किया जा रहा है कि यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
अक्षय कुमार, एआरएम, रायबरेली डिपो
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यात्रियों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा। यही नहीं प्रमुख रूटों कानपुर, प्रयागराज, लखनऊ आदि पर बसों के फेरे बढ़ा दिए गए हैं, ताकि इन रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
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विधानसभा चुनाव कराने के लिए रायबरेली डिपो की 40 बसें रविवार से पुलिस कर्मियों व अन्य मतदान कर्मियों को बूथों तक पहुंचाने के लिए लगा दी गईं।
मेरठ में 10 फरवरी, जबकि शाहजहांपुर जिले में 14 फरवरी को मतदान होना है। इन दोनों तिथियों में मतदान कराने के लिए बसों को लगाया गया है। रायबरेली डिपो में 84 बसें हैं। जबकि अनुबंधित बसों की संख्या करीब 50 है।
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बसों के चुनाव ड्यूटी में लगने के कारण जिले के पॉकेट रूटों सलोन, ऊंचाहार, सरेनी, भोजपुर, सतांव, खीरों, महराजगंज, शिवगढ़, डलमऊ, जायस, तिलोई आदि में बसों का टोटा पड़ गया। बसों के चुनाव में लगा दिए जाने का असर लखनऊ, प्रयागराज, दिल्ली, अयोध्या समेत अन्य प्रमुख रूटों पर पड़ा। ऐसे में डिपो के अधिकारियों ने यात्रियों की सुविधा के लिए प्रमुख रूटों पर बसों के फेरे बढ़ा दिए।
हर दिन सफर करते हैं 25 हजार यात्री
रायबरेली डिपो की बसों से हर दिन करीब 25 हजार यात्री सफर करते हैं। प्रमुख रूटों के अलावा पॉकेट रूटों पर यात्रियों को गंतव्य पर पहुंचाने के लिए सरकारी बसें ही ठीक रहती हैं।
बसों की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। खास बात ये है कि चुनाव संपन्न कराने के बाद ही बसों का संचालन फिर से पॉकेट रूटों पर किया जाएगा। ऐसे में चुनाव तक यात्रियों को सफर तय करने में मशक्कत ही करनी पड़ेगी। डग्गामार वाहनों पर सफर करना जोखिम भरा भी रहता है।
विधानसभा चुनाव में रायबरेली डिपो की 40 बसें लगाई गईं हैं। बसों के चुुनाव में लग जाने के कारण पॉकेट रूटों पर असर पड़ा है, जबकि प्रमुख रूटों पर यात्रियों की सुविधा के लिए बसों के फेरे बढ़ा दिए गए हैं। फिलहाल प्रयास किया जा रहा है कि यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
अक्षय कुमार, एआरएम, रायबरेली डिपो