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पढ़ने आए नौनिहालों से ढुलाया जा रहा ईंटों का मलबा
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रायबरेली। गांव में मजदूरी, खेती-किसानी करने वाले ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं, ताकि वे पढ़-लिखकर काबिल बन सकें। उनकी तरह मजदूरी न करें। दूसरी तरफ स्कूल में पढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने वाले अध्यापक बच्चों को काबिल बनाने के बजाए मजदूर बना रहे हैं। इस तरह के मामले अक्सर परिषदीय विद्यालयों के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसा ही ईंटो की ढुलाई का वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो रोहनिया विकास क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सरेनी का बताया जा रहा है।
बताया जाता है कि प्राथमिक विद्यालय सरेनी में पुराने निर्माण के एक भाग को गिराया गया था, जिसका मलबा वहीं ढेर था। इस मलबे को हटाने के लिए मजदूरों से काम लेना चाहिए, लेकिन ऐसा न करके उसी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को मजदूरी में लगा दिया गया। इसका वीडियो वायरल हुआ तो हड़कंप मच गया।
लोगों का कहना है कि एक तरफ से खराब मौसम के चलते स्कूल में अक्सर छुट्टी होने से पढ़ाई प्रभावित है, दूसरी तरफ स्कूल खुलते हैं तो पढ़ाने के बजाए बच्चों को इस तरह के काम में लगा दिया जाता है। इस संबंध में रोहनिया के खंड शिक्षा अधिकारी राम ललित का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी भी मामले की जानकारी नहीं है। शिक्षा के मंदिर में बच्चों से मजदूरी कराना कतई उचित नहीं है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
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बताया जाता है कि प्राथमिक विद्यालय सरेनी में पुराने निर्माण के एक भाग को गिराया गया था, जिसका मलबा वहीं ढेर था। इस मलबे को हटाने के लिए मजदूरों से काम लेना चाहिए, लेकिन ऐसा न करके उसी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को मजदूरी में लगा दिया गया। इसका वीडियो वायरल हुआ तो हड़कंप मच गया।
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लोगों का कहना है कि एक तरफ से खराब मौसम के चलते स्कूल में अक्सर छुट्टी होने से पढ़ाई प्रभावित है, दूसरी तरफ स्कूल खुलते हैं तो पढ़ाने के बजाए बच्चों को इस तरह के काम में लगा दिया जाता है। इस संबंध में रोहनिया के खंड शिक्षा अधिकारी राम ललित का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी भी मामले की जानकारी नहीं है। शिक्षा के मंदिर में बच्चों से मजदूरी कराना कतई उचित नहीं है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
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