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ब्लैक फंगस का बढ़ने लगा खतरा, एक महिला मरीज मिली, केजीएमयू में भर्ती
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रायबरेली। जिले में ब्लैक फंगस का एक और मरीज मिला है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में कार्यरत बड़े बाबू की पत्नी भी चपेट में आ गईं हैं। जिले के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई जांच में हुई पुष्टि के बाद मरीज को लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया गया है। कर्मचारी की पत्नी के नाक और आंख में समस्या बढ़ी है।
जिले में अब तक ब्लैक फंगस के छह केस सामने आ चुके हैं। इसमें से दो मरीजों की मौत हो चुकी है। कोरोना की चपेट में आने के बाद बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के बड़े बाबू की पत्नी को शहर के एक निजी कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
कई दिनों तक चले इलाज के दौरान ही ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दिए। मामले की जांच कराई गई तो ब्लैक फंगस के पुष्टि हो गई। इसके बाद मरीज को लखनऊ रेफर किया गया है। मरीज का केजीएमयू में इलाज चल रहा है। बताते हैं कि महिला की नाक और आंख में काफी इंफेक्शन हो चुका है।
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जिले में ब्लैक फंगस के इलाज के बंदोबस्त नहीं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि जिले में ब्लैक फंगस के इलाज के पर्याप्त बंदोबस्त नहीं हैं। जांच में फंगस कंफर्म होने के बाद मरीजों को लखनऊ रेफर कराया जा रहा है।
उनका कहना है कि नाक में दर्द, खून आना या नाक बंद होना, नाक में सूजन, दांत या जबड़े में दर्द या दांतों का गिरना, आंखों के सामने धुंधलापन या दर्द, न दिखना या दो-दो लोगों दिखाई देना, बुखार, सीने में दर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टियां आदि लक्षण हो तो मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए। इसमें लापरवाही कतई न करें। हल्के लक्षण दिखने पर भी जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।
बाजार में भी दवाओं का टोटा खतरा बढ़ा
ब्लैक फंगस वाले जिले में आना शुरू हो गया है, लेकिन इलाज के लिए निजी अस्पतालों में भी बंदोबस्त नहीं हैं। मेडिकल स्टोरों पर इंजेक्शन व अन्य दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि दवा की समस्या को लेकर जिले के लोग काफी भयभीत हैं। बाजार में इंजेक्शन कहीं भी नहीं मिल पा रहा है।
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जिले में अब तक ब्लैक फंगस के छह केस सामने आ चुके हैं। इसमें से दो मरीजों की मौत हो चुकी है। कोरोना की चपेट में आने के बाद बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के बड़े बाबू की पत्नी को शहर के एक निजी कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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कई दिनों तक चले इलाज के दौरान ही ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दिए। मामले की जांच कराई गई तो ब्लैक फंगस के पुष्टि हो गई। इसके बाद मरीज को लखनऊ रेफर किया गया है। मरीज का केजीएमयू में इलाज चल रहा है। बताते हैं कि महिला की नाक और आंख में काफी इंफेक्शन हो चुका है।
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जिले में ब्लैक फंगस के इलाज के बंदोबस्त नहीं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि जिले में ब्लैक फंगस के इलाज के पर्याप्त बंदोबस्त नहीं हैं। जांच में फंगस कंफर्म होने के बाद मरीजों को लखनऊ रेफर कराया जा रहा है।
उनका कहना है कि नाक में दर्द, खून आना या नाक बंद होना, नाक में सूजन, दांत या जबड़े में दर्द या दांतों का गिरना, आंखों के सामने धुंधलापन या दर्द, न दिखना या दो-दो लोगों दिखाई देना, बुखार, सीने में दर्द, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टियां आदि लक्षण हो तो मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जाए। इसमें लापरवाही कतई न करें। हल्के लक्षण दिखने पर भी जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।
बाजार में भी दवाओं का टोटा खतरा बढ़ा
ब्लैक फंगस वाले जिले में आना शुरू हो गया है, लेकिन इलाज के लिए निजी अस्पतालों में भी बंदोबस्त नहीं हैं। मेडिकल स्टोरों पर इंजेक्शन व अन्य दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि दवा की समस्या को लेकर जिले के लोग काफी भयभीत हैं। बाजार में इंजेक्शन कहीं भी नहीं मिल पा रहा है।