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हिमाचल: पूर्व पर्यटन मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया नहीं रहे, दिल का दौरा पड़ने से निधन; प्रदेश में शोक की लहर

Tue, 29 Sep 2026 11:20 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 29 Sep 2026 11:20 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश की राजनीति के वरिष्ठ नेता और शाहपुर से पूर्व विधायक एवं पर्यटन मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार सुबह निधन हो गया। बताया जा रहा है कि सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर सामने आते ही शाहपुर सहित कांगड़ा जिले में शोक की लहर दौड़ गई। शाहपुर की राजनीति में मेजर मनकोटिया लंबे समय तक प्रभावशाली चेहरा रहे और प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।

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former himachal tourism minister major vijay singh mankotia dies heart attack
पूर्व पर्यटन मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार सुबह निधन हो गया। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे मनकोटिया की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। परिजन उन्हें उपचार के लिए कांगड़ा के सिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

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उनके निधन की खबर सामने आते ही शाहपुर, कांगड़ा और प्रदेश के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर फैल गई। उनके समर्थक, राजनीतिक सहयोगी और शुभचिंतक उन्हें याद कर रहे हैं। उनका पार्थिव शरीर अस्पताल से उनके तियारा स्थित घर लाया जा रहा है। परिवार के सदस्य विदेश में रहते हैं, इसलिए उनके आने के बाद अंतिम संस्कार को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
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सेना की वर्दी से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का सार्वजनिक जीवन राजनीति से पहले भारतीय सेना से जुड़ा था। सेना में अधिकारी के रूप में सेवाएं देने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। सैन्य जीवन से मिले अनुशासन और स्पष्ट सोच की छाप उनके राजनीतिक व्यक्तित्व में भी दिखाई देती रही। वे अपनी बेबाक राय और मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए जाने जाते थे।
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1982 में पहली बार बने विधायक
मनकोटिया ने 1982 में शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर जीत हासिल की और पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1985, 1990, 1993 और 2003 में भी उन्होंने शाहपुर का प्रतिनिधित्व किया। इस तरह करीब दो दशक से अधिक के चुनावी सफर में वह कुल पांच बार विधायक रहे। राजनीतिक जीवन में उन्होंने कांग्रेस के साथ-साथ जनता दल और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा। शाहपुर की राजनीति में उनकी पकड़ लंबे समय तक बनी रही और कांगड़ा की राजनीति में भी उन्हें प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा।

दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे
मेजर मनकोटिया ने हिमाचल सरकार में दो बार मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनके राजनीतिक सफर के दौरान उन्हें पर्यटन, नागरिक उड्डयन और कानून जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलीं। इसके अलावा वह हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष भी रहे। सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण प्रदेश की राजनीति में उनकी अलग पहचान बनी।

चुनावी राजनीति में कई उतार-चढ़ाव
2003 में पांचवीं बार विधायक बनने के बाद मनकोटिया को अगले चुनाव में सफलता नहीं मिली। वर्ष 2007 में वह शाहपुर से चुनाव हार गए। इसके बाद 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन भाजपा की सरवीण चौधरी से पराजित हुए। वर्ष 2017 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में फिर चुनाव लड़ा। इस बार भी उन्हें सरवीण चौधरी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। हालांकि वह दूसरे स्थान पर रहे और शाहपुर की राजनीति में उनकी सक्रियता बनी रही। बाद के वर्षों में उन्होंने भाजपा का दामन थामा। सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी के बावजूद उनका राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में संपर्क लगातार चर्चा में रहा।

वीरभद्र सिंह के साथ राजनीतिक मतभेद रहे चर्चा में
मेजर मनकोटिया का राजनीतिक जीवन कई चर्चित घटनाओं से भी जुड़ा रहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ उनके राजनीतिक मतभेद कई बार सार्वजनिक चर्चा में आए। दोनों नेताओं के बीच संबंधों में राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कुछ समय बाद परिस्थितियां बदलीं, लेकिन दोनों के बीच राजनीतिक टकराव हिमाचल की सियासत के चर्चित प्रसंगों में शामिल रहा। मनकोटिया अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते थे और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात बिना ज्यादा लाग-लपेट के रखने के लिए उनकी अलग पहचान थी।

निधन पर भाजपा नेताओं ने जताया दुख
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने गहरा शोक व्यक्त किया। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर संवेदना जताई। भाजपा नेताओं ने कहा कि मनकोटिया का जीवन देश और प्रदेश की सेवा से जुड़ा रहा। सेना में अधिकारी के रूप में राष्ट्रसेवा करने के बाद उन्होंने जनप्रतिनिधि के तौर पर लोगों के बीच काम किया।

नड्डा ने बताया सार्वजनिक जीवन के लिए क्षति
जगत प्रकाश नड्डा ने मेजर मनकोटिया के निधन को हिमाचल के सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने उनके सैन्य जीवन और बाद के राजनीतिक योगदान को याद करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति मिलने की कामना की।

बिंदल ने याद की स्पष्टवादिता
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने मनकोटिया को स्पष्टवादी और निर्भीक नेता बताया। उन्होंने कहा कि लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने हिमाचल की राजनीति के कई महत्वपूर्ण दौर देखे और अपनी बात मजबूती के साथ रखने के लिए पहचाने गए। बिंदल ने कहा कि सैनिक से लेकर जनप्रतिनिधि और मंत्री तक का उनका सफर सार्वजनिक सेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

जयराम ठाकुर ने भी जताया शोक
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मेजर मनकोटिया ने सेना और राजनीति दोनों क्षेत्रों में देश तथा प्रदेश की सेवा की। शाहपुर और कांगड़ा से उनका पुराना रिश्ता रहा और क्षेत्र की राजनीति में उनकी भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण रही। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके निधन को प्रदेश के लिए बड़ी क्षति बताया।

कांगड़ा ने खोया अनुभवी राजनीतिक चेहरा
कांगड़ा से विधायक पवन काजल ने भी मेजर मनकोटिया के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि कांगड़ा ने एक अनुभवी और ईमानदार नेता खो दिया है। मेजर मनकोटिया के निधन के बाद शाहपुर और कांगड़ा में उनके राजनीतिक जीवन से जुड़ी यादें एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में हैं। सेना की सेवा से शुरू हुआ उनका सफर विधानसभा, मंत्री पद और लंबे सार्वजनिक जीवन तक पहुंचा। उनका निधन हिमाचल की राजनीति में एक ऐसे दौर का अंत है, जिसमें उन्होंने करीब चार दशक तक किसी न किसी रूप में सार्वजनिक जीवन में अपनी मौजूदगी बनाए रखी।

विदेश में रहते हैं बेटा और बेटी
मेजर विजय सिंह मनकोटिया अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। उनका बेटा अमेरिका में रहता है, जबकि बेटी भी विदेश में रहती हैं। परिवार के सदस्यों के पहुंचने के बाद ही अंतिम संस्कार की तारीख और समय तय किया जाएगा।

मेजर विजय सिंह मनकोटिया का राजनीतिक सफर
1982: पहली बार शाहपुर से निर्दलीय विधायक बने।
1985: दूसरी बार विधानसभा पहुंचे।
1990: तीसरी बार विधायक बने।
1993: चौथी बार शाहपुर का प्रतिनिधित्व किया।
1995: प्रदेश सरकार में मंत्री रहे।
2003: पांचवीं बार विधायक बने और मंत्री पद संभाला।
2007: शाहपुर से चुनाव में हार।
2012: कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन हार मिली।
2017: निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे।
बाद के वर्षों में भाजपा में शामिल हुए।

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