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सुधा सिंह का एक और कीतिर्मान, मिला पद्यश्री
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रायबरेली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को गोल्डन गर्ल सुधा सिंह को पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके बाद जिले में खुशी का माहौल है। कुछ उत्साही लोग शिवाजी नगर स्थित सुधा के आवास पर बधाई देने पहुंचे। वहां जानकारी हुई कि सुधा सपरिवार दिल्ली में हैं।
शहरवासी सुधा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। विद्यार्थी जीवन से ही वह खेलों में सफलता अर्जित करती रही हैं। एथलेटिक्स में सबसे कठिन मानी जाने वाली स्टीपल चेज स्पर्धा में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं।
सुधा सिंह ने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के दम पर दुनिया भर में देश का गौरव बढ़ाया है। उनका सपना इस जिले में अकादमी खोलने का है। जिससे जिले की प्रतिभाओं को निखार कर उन्हें आगे बढ़ाया जा सके। सुधा सिंह के पिता हरिनारायण सिंह सेवानिवृत्त आईटीआई कर्मी हैं जबकि मां गृहणी हैं।
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कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
सुधा सिंह ने वर्ष 2003 में स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ ज्वाइन करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2003 में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2004 में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 2007 में नेशनल गेम्स और 2008 में सीनियर ओपन नेशनल में पहला स्थान बनाया।
वर्ष 2009 में एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा। इसके बाद 2010 में हुए एशियन खेल की 3000 मीटर स्टीपल चेज स्पर्धा में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। 2013 में एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीतने वाली सुधा ने 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में रजत पदक जीता। ओलंपिक में भी अपनी प्रतिभा दिखाई।
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शहरवासी सुधा सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। ढेरों पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं। विद्यार्थी जीवन से ही वह खेलों में सफलता अर्जित करती रही हैं। एथलेटिक्स में सबसे कठिन मानी जाने वाली स्टीपल चेज स्पर्धा में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते हैं।
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सुधा सिंह ने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के दम पर दुनिया भर में देश का गौरव बढ़ाया है। उनका सपना इस जिले में अकादमी खोलने का है। जिससे जिले की प्रतिभाओं को निखार कर उन्हें आगे बढ़ाया जा सके। सुधा सिंह के पिता हरिनारायण सिंह सेवानिवृत्त आईटीआई कर्मी हैं जबकि मां गृहणी हैं।
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कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
सुधा सिंह ने वर्ष 2003 में स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ ज्वाइन करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2003 में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2004 में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 2007 में नेशनल गेम्स और 2008 में सीनियर ओपन नेशनल में पहला स्थान बनाया।
वर्ष 2009 में एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर सबका ध्यान खींचा। इसके बाद 2010 में हुए एशियन खेल की 3000 मीटर स्टीपल चेज स्पर्धा में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। 2013 में एशियन चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीतने वाली सुधा ने 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में रजत पदक जीता। ओलंपिक में भी अपनी प्रतिभा दिखाई।