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डेंगू का एक और मरीज मिला, सीएचसी में बेड आरक्षित
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रायबरेली। जिला अस्पताल की लैब में हुई जांच में डेंगू का एक और पॉजिटिव केस मिला है। जिले में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़कर अब पांच हो गई है। मलेरिया के भी अब तक दो केस मिले हैं। लगातार मरीजों की संख्या बढ़ने से हड़कंप मच गया है।
सभी 18 सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में नजर रखने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही आशा बहू और एएनएम की टीमों को गांवों में पहुंचकर जांच शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कोरोना के साथ ही जिले में डेंगू, मलेरिया व अन्य संक्रामक रोगों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। शहर के निराला नगर के एक व्यक्ति की डेंगू रिपोर्ट जिला अस्पताल में पॉजिटिव आई है।
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सूचना मिलते ही मलेरिया अधिकारी रितू श्रीवास्तव के निर्देशन में टीम ने मोहल्ले में पहुंचकर परिवार के लोगों के सैंपल लिए। हालांकि सभी लोग स्वस्थ बताए जा रहे हैं। माह भर में करीब 10 हजार लोगों की मलेरिया की जांच के लिए स्लाइड बनाई गई जिनमें से दो लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
लगातार बढ़ते संक्रमण के खतरे को देखते हुए सभी सीएचसी में पांच-पांच बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया है। इसके साथ ही दवाओं की भी व्यवस्था कराई गई है। गांवों में खतरे को बढ़ता देख टीमों को वहां भेजकर स्लाइड बनाने का काम भी शुरू कराया गया है। जिला अस्पताल में भी 15 बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया है। हालांकि अभी किसी को भर्ती नहीं किया गया है।
बुखार का कहर बढ़ने के बाद सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई। एक हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचे। इनमें 200 से अधिक मरीज बुखार से ग्रसित रहे। बच्चा वार्ड भी फुल हो गया। ज्यादातर बच्चे बुखार की चपेट में हैं। जिला अस्पताल में इलाज के समुचित बंदोबस्त न होने के कारण भर्ती मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।
साथ ही ओपीडी में आने वाले मरीजों को पर्चा बनवाने के साथ ही दवा लेने तक लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। ओपीडी कक्षों के बाहर सुबह से ही मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। गर्मी अधिक होने के कारण लोग काफी परेशान हुए। कई मरीज बिना चिकित्सीय सलाह लिए ही मायूस लौट गए और निजी क्लीनिकों में पहुंचकर इलाज करवाया। मरीजों को काउंटर पर पूरी दवाएं भी नहीं मिलीं।
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध हैं। सभी सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। गांवों में टीमें भेजकर मलेरिया के साथ ही अन्य जांचें करवाई जा रही हैं। रैपिड रिस्पांस टीम को भी सक्रिय किया गया है।
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सभी 18 सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में नजर रखने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही आशा बहू और एएनएम की टीमों को गांवों में पहुंचकर जांच शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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कोरोना के साथ ही जिले में डेंगू, मलेरिया व अन्य संक्रामक रोगों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। शहर के निराला नगर के एक व्यक्ति की डेंगू रिपोर्ट जिला अस्पताल में पॉजिटिव आई है।
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सूचना मिलते ही मलेरिया अधिकारी रितू श्रीवास्तव के निर्देशन में टीम ने मोहल्ले में पहुंचकर परिवार के लोगों के सैंपल लिए। हालांकि सभी लोग स्वस्थ बताए जा रहे हैं। माह भर में करीब 10 हजार लोगों की मलेरिया की जांच के लिए स्लाइड बनाई गई जिनमें से दो लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
लगातार बढ़ते संक्रमण के खतरे को देखते हुए सभी सीएचसी में पांच-पांच बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया है। इसके साथ ही दवाओं की भी व्यवस्था कराई गई है। गांवों में खतरे को बढ़ता देख टीमों को वहां भेजकर स्लाइड बनाने का काम भी शुरू कराया गया है। जिला अस्पताल में भी 15 बेड का डेंगू वार्ड बनाया गया है। हालांकि अभी किसी को भर्ती नहीं किया गया है।
बुखार का कहर बढ़ने के बाद सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई। एक हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचे। इनमें 200 से अधिक मरीज बुखार से ग्रसित रहे। बच्चा वार्ड भी फुल हो गया। ज्यादातर बच्चे बुखार की चपेट में हैं। जिला अस्पताल में इलाज के समुचित बंदोबस्त न होने के कारण भर्ती मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।
साथ ही ओपीडी में आने वाले मरीजों को पर्चा बनवाने के साथ ही दवा लेने तक लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। ओपीडी कक्षों के बाहर सुबह से ही मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। गर्मी अधिक होने के कारण लोग काफी परेशान हुए। कई मरीज बिना चिकित्सीय सलाह लिए ही मायूस लौट गए और निजी क्लीनिकों में पहुंचकर इलाज करवाया। मरीजों को काउंटर पर पूरी दवाएं भी नहीं मिलीं।
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध हैं। सभी सीएचसी में पांच-पांच बेड के डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। गांवों में टीमें भेजकर मलेरिया के साथ ही अन्य जांचें करवाई जा रही हैं। रैपिड रिस्पांस टीम को भी सक्रिय किया गया है।