फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   Action

सलाखों के पीछे पहुंचा एक आरोपी, बाकी की तलाश में पुलिस

Wed, 04 Aug 2021 11:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 11:30 PM IST
विज्ञापन
Action
रायबरेली। रायबरेली-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर उफरामऊ गांव स्थित सरकारी जमीन को लेकर हुए फर्जीवाड़े में बुधवार को पुलिस ने एक आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया। ‘अमर उजाला’ ने इस खबर को सिलसिलेवार प्रकाशित किया तो विवेचना तेजी से आगे बढ़ी।
विज्ञापन

‘अमर उजाला’ की खबर का असर यह हुआ कि महज पांच दिन में ही मामले में गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। हालांकि मामले में नामजद तहसील और कलेक्ट्रेट के अधिकारी-कर्मचारी अब तक पुलिस की पहुंच से दूर हैं।
विज्ञापन

पुलिस का दावा है कि फरार आरोपी भी जल्द गिरफ्त में होंगे। सदर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत रायबरेली-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उफरामऊ गांव स्थित करीब चार बीघा बंजर जमीन में फर्जीवाड़ा हुआ था।
विज्ञापन
विज्ञापन

मामले में तत्कालीन अभिलेखपाल राजस्व व संप्रति प्रशासनिक अधिकारी मंजु लता दीक्षित, कलेक्ट्रेट के एआरके देही अभिलेखागार राजस्व महादेव, तहसीलकर्मी अभिलेखागार जमुना प्रसाद के अलावा उफरामऊ निवासी विद्याकांत, रमाकांत, श्रीकांत, गीता, विष्णुकांत, शिवाकांत, सोनल व पूर्वी अवस्थी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
मामले की विवेचना सदर कोतवाली में तैनात निरीक्षक अरुण कुमार अवस्थी कर रहे हैं। उनके मुताबिक नामजद आरोपी रमाकांत के जमीन के फर्जीवाडे में शामिल होने के साक्ष्य मिले हैं। उसे पकड़ने के बाद जेल भेज दिया गया।
पूछताछ में रमाकांत ने बताया कि उसने नहीं उसके पिता व भाई ने हेराफेरी की। विवेचक का कहना है कि नामजद आरोपियों के भी जमीन फर्जीवाड़े में शामिल होने के साक्ष्य मिले हैं। सभी की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किया जा रहा है। सदर कोतवाल अतुल सिंह का कहना है कि जल्द अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
मास्टर माइंड खुली हवा में ले रहा सांस
उफरामऊ प्रकरण में जिस बाबू ने मास्टर माइंड की भूमिका निभाई, वह आजाद धूम रहा है। करीब दो करोड़ रुपये कीमत की जमीन की हेराफेरी कराने में वह शामिल था। कहा जा रहा है कि उसकी सांठगांठ के जरिए ही फर्जी खतौनी तैयार कराई गई थी। उफरामऊ प्रकरण के तूल पकड़ने पर उस बाबू को सदर तहसील से हटा भी दिया गया था। हालांकि उस बाबू का नाम एफआईआर में शामिल नहीं है। विवेचक के मुताबिक जमीन प्रकरण से जुड़े सभी अभिलेख रिकार्ड रूम से निकाले जा रहे हैं। नामजद आरोपियों के अलावा जिसके खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे उसका नाम भी विवेचना में बढ़ाया जाएगा। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
रिकॉर्ड रूम से गायब हैं कई दस्तावेज
विवेचक की जांच में खुलासा हुआ है कि उफरामऊ प्रकरण से जुड़े कई दस्तावेज रिकार्ड रूम से गायब हैं। इससे मामले की विवेचना की रफ्तार धीमी है। वर्ष 2009 में तैयार कराई गई जमीन की खतौनी फर्जी थी। वह रिकॉर्ड रूम से जारी नहीं की गई थी। विवेचक का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज रिकार्ड रूम से खंगाले जा रहे हैं। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
लेखपाल पर फर्जी जमीन का नापजोख कराने का आरोप
सदर तहसील क्षेत्र के ओनई पहाड़पुर गांव निवासी आनंद कुमार, अनूूप कुमार व कृष्णकुमार आदि ने डीएम को पत्र देकर लेखपाल पर फर्जी तरीके से जमीन का नापजोख कराने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि लेखपाल चंद्र कुमार की गांव में तैनाती भी नहीं है। बावजूद इसके जमीन की नापजोख में गड़बड़ी की है। लेखपाल धमकी दे रहा है कि विरोध करोगे तो मकान व घर गिरवा दूंगा। ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल से लोग आजिज हैं। कार्रवाई नहीं की गई तो धरना दिया जाएगा। डीएम ने एसडीएम सदर को प्रकरण की जांच करके कार्रवाई करने के लिए कहा है। उधर, लेखपाल का कहना है कि उन पर बेवजह के आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले से उनका कोई लेेना देना नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed