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घबराएं नहीं, स्वयं की सुरक्षा को आगे आएं बेटियां

Tue, 19 Feb 2019 12:50 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Feb 2019 12:50 AM IST
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घबराएं नहीं, स्वयं की सुरक्षा को आगे आएं बेटियां
बछरावां (रायबरेली)। बेटियां खुद अपनी सुरक्षा करने का प्रयास करें। जब वह स्वयं जागरूक होंगी तो निश्चित ही देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। बेटियों को कदम से कदम मिलाकर पुरुषों के साथ चलना चाहिए। आज से नहीं, बल्कि प्राचीनकाल से ही बेटियों ने तरक्की की इबारत लिखी है। बेटियां आत्मनिर्भर बनकर तरक्की करें।
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सोमवार को अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत बछरावां कस्बे के गिरीश मेमोरियल पब्लिक स्कूल पटेलनगर में नारी सुरक्षा संवाद पर आयोजित परिचर्चा में कुछ इसी तरह महिलाओं ने अपनी बात रखी। सभी ने कहा कि बेटियां किसी भी समस्या का डटकर मुकाबला करें। कोई परेशान कर रहा है तो पुलिस की मदद लें। हक की लड़ाई के लिए आवाज उठाना सीखें।
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बेटियाें को अपने आप को मजबूत करना होगा और किसी भी समस्या से निपटने का साहस दिखाना होगा। बेटियों से आह्वान है कि आप भी अपने दृढ़ विश्वास को मजबूत कर तरक्की की राह पर आगे बढ़ें। - अंबेश सिंह, प्रबंधक
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बेटियाें की सुरक्षा के लिए सरकार ने 1090 का टोल फ्री नंबर चलाया है, जिससे की महिलाओं की सुरक्षा समय पर हो सके। - शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव, शिक्षक


बेटियों को आज खुद को पहचानने की जरूरत है। बेटियां देश में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता का परचम लहरा रही हैं। खुद को पहचान कर अपनी सफलता का मार्ग चुनें। - मानसी सिंह, शिक्षिका


देश में आज से नहीं, बल्कि प्राचीनकाल से ही बेटियों ने तरक्की की इबारत लिखी है। बेटियों को अपने अधिकारों की जानकारी करनी चाहिए। - प्रीती जायसवाल, शिक्षिका


बेटियों के साथ भेदभाव हो रहा है। उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया जाता। बेटों को शिक्षित किया जाता है, जबकि बेटियों को स्कूल नहीं भेजा जाता है। अभिभावकों को यह सोच बदलनी चाहिए। - प्रीति श्रीवास्तव, शिक्षिका


छात्रा संगीता, आस्था गुप्ता, कृतिका अवस्थी का कहना है कि बेटियों की पढ़ाई के लिए परिवारीजन आगे नहीं आते हैं, यह ठीक नहीं है। बेटियां शिक्षित होंगी, तभी अपने अधिकारों की जानकारी करके स्वयं के पैरों पर खड़ी हो सकेंगी। बेटियों की तरक्की से देश का विकास संभव है। बेटियां अपने को कमजोर न समझें और आत्मनिर्भर बनने के लिए शिक्षित हों।


छात्रा अंशिका वर्मा, शगुन शुक्ला, शिवानी सोनी का कहना है कि बेटियों का सम्मान करने में ही समाज की बेहतरी होगी। बेटियों का अपमान हमें किसी कीमत पर नहीं करना चाहिए। बेटियां आत्मनिर्भर बनें। समाज के निर्माण और देश के विकास में बेटियों का बहुत बड़ा योगदान है। बेटियां आज किसी से पीछे नहीं हैं। बस उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए।


छात्रा जैनब बानो, हिमांशी पटेल, सलमा बानो का कहना है कि बेटियां किसी से कमजोर नहीं हैं। बस उन्हें अपनी शक्ति पहचाननी चाहिए और तरक्की की दिशा में कार्य करना चाहिए। बेटियां अपने आप को कमजोर न समझें। अपने ऊपर होने वाले जुल्म के खिलाफ बिना किसी भय के आवाज उठाएं।



छात्रा सामिया खान, आयुषी सिंह, मुस्कान पांडेय का कहना है कि बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस न करें। कोई भी मुसीबत पड़े तो उसका डटकर मुकाबला करें। कोई परेशान करे तो सख्ती बरतें और पुलिस की मदद लेकर कार्रवाई करे।
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