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अल्प बचत कर स्वावलंबी बन रहे नौनिहाल
Updated Fri, 15 Dec 2017 02:18 AM IST
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अल्प बचत कर स्वावलंबी बन रहे नौनिहाल
हरचंदपुर (रायबरेली)। अल्प बचत कर स्वावलंबी बन रहे नौनिहालों ने समाज में एक अनोखी मिसाल कायम की है। घर से मिलने वाले जेब खर्च के थोड़े से पैसे को जमा करने से बच्चों में जहां बचत के प्रति जागरूकता आई है, वहीं इस छोटी सी बचत से उन बच्चों की ही जरूरतें भी पूरी होती हैं। बच्चों में बढ़ रही बचत की आदत को देखकर माता-पिता भी खुश हैं।
यह अनोखी पहल ब्लॉक क्षेत्र के पूरे मोहारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में देखने को मिली, जहां शिक्षकों की देखरेख में छात्र-छात्राओं के लिए अल्प बचत योजना चलाई जा रही है। इसमें बच्चों ने छोटी-छोटी बचत करके जो रकम जुटाई है, उससे वे अपने खर्चे बखूबी निपटा रहे हैं। इस अल्प बचत योजना की शुरुआत जुलाई 2014 में हुई थी। विद्यालय के तत्कालीन शिक्षक ईश्वरदीन ने कुछ बच्चों को लेकर इस अल्प बचत के लिए छात्र-छात्राओं को प्रेरित किया। नतीजतन आज विद्यालय अनुदेशक सत्य प्रकाश तिवारी की देखरेख में 126 बच्चों ने एक रुपये से पांच रुपये की दैनिक अल्प बचत कर अपने खाते में सैकड़ों रुपये जुटाए हैं।
जमा की गई धनराशि का बाकायदा हिसाब-किताब रखा जाता है। इसके लिए बच्चे जो भी पैसा देते हैं या फिर अपनी जरूरत के लिए निकालते हैं, उसके लिए दैनिक जमा और निकासी रजिस्टर बनाया गया है। बच्चों की इस अल्पबचत योजना से जहां उनकी दैनिक जरूरतें पूरी होती हैं, वही उनके अभिभावक भी खुश हैं। अल्प बचत से छात्र-छात्राएं पढ़ने-लिखने की जरूरत का सामान खरीदने के साथ ही खेलकूद के सामान की खरीदारी भी समय-समय पर करते रहते हैं। आए दिन होने वाली प्रतियोगिताओं में बिना किसी अड़चन के प्रतिभाग करने का मौका भी मिल जाता है।
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स्कूल जाते समय रोज नहीं मांगने पड़ते पैसे
विद्यालय की छात्रा जया वर्मा, पूजा, छात्र रमेश मौर्य, समरपाल सिंह, राजेश कुमार, विमल सिंह का कहना है कि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए रोजाना स्कूल आते समय माता-पिता से पैसा नहीं मांगना पड़ता है। जो भी जेब खर्च के लिए मिलता है, उसका काफी हिस्सा अल्प बचत में जमा कर देते हैं। समय आने पर इसी बचत से पैसा निकाल कर वे कापी, पेंसिल से लेकर खेलकूद के लिए सामान की खरीदारी कर लेते हैं। इससे माता-पिता को भी अलग से कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ती है।
बच्चों की बचत की आदत से परिवार खुश
जूनियर हाईस्कूल पूरे मोहारी में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के अभिभावक राम बहादुर सिंह, राम सनेही, केदारनाथ आदि का कहना है कि घर से बच्चों को जो भी खर्च मिलता है, उसे स्कूल में जमा करके बच्चे अच्छा काम कर रहे हैं। जब भी उन्हें जरूरत होती है, इस बचत से अपने खर्चे निपटा लेते हैं। इससे आए दिन उन पर अतिरिक्त खर्च का बोझ नहीं पड़ता है और परिवार में भी खुशी रहती है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे स्कूल जाते समय किसी न किसी चीज की जरूरत बता देते हैं। उस समय पैसा नहीं होता है तो बच्चे भी नाराज होते हैं और जरूरत पूरी न कर पाने का खुद को भी मलाल रहता है।
छोटी-छोटी बचत करके छात्र-छात्राएं अपनी रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरा कर लेते हैं, जिसके लिए उन्हें किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता है और समय पर उनकी जरूरत भी पूरी हो जाती है।- देवीशंकर यादव, प्रधानाध्यापक।
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हरचंदपुर (रायबरेली)। अल्प बचत कर स्वावलंबी बन रहे नौनिहालों ने समाज में एक अनोखी मिसाल कायम की है। घर से मिलने वाले जेब खर्च के थोड़े से पैसे को जमा करने से बच्चों में जहां बचत के प्रति जागरूकता आई है, वहीं इस छोटी सी बचत से उन बच्चों की ही जरूरतें भी पूरी होती हैं। बच्चों में बढ़ रही बचत की आदत को देखकर माता-पिता भी खुश हैं।
यह अनोखी पहल ब्लॉक क्षेत्र के पूरे मोहारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में देखने को मिली, जहां शिक्षकों की देखरेख में छात्र-छात्राओं के लिए अल्प बचत योजना चलाई जा रही है। इसमें बच्चों ने छोटी-छोटी बचत करके जो रकम जुटाई है, उससे वे अपने खर्चे बखूबी निपटा रहे हैं। इस अल्प बचत योजना की शुरुआत जुलाई 2014 में हुई थी। विद्यालय के तत्कालीन शिक्षक ईश्वरदीन ने कुछ बच्चों को लेकर इस अल्प बचत के लिए छात्र-छात्राओं को प्रेरित किया। नतीजतन आज विद्यालय अनुदेशक सत्य प्रकाश तिवारी की देखरेख में 126 बच्चों ने एक रुपये से पांच रुपये की दैनिक अल्प बचत कर अपने खाते में सैकड़ों रुपये जुटाए हैं।
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जमा की गई धनराशि का बाकायदा हिसाब-किताब रखा जाता है। इसके लिए बच्चे जो भी पैसा देते हैं या फिर अपनी जरूरत के लिए निकालते हैं, उसके लिए दैनिक जमा और निकासी रजिस्टर बनाया गया है। बच्चों की इस अल्पबचत योजना से जहां उनकी दैनिक जरूरतें पूरी होती हैं, वही उनके अभिभावक भी खुश हैं। अल्प बचत से छात्र-छात्राएं पढ़ने-लिखने की जरूरत का सामान खरीदने के साथ ही खेलकूद के सामान की खरीदारी भी समय-समय पर करते रहते हैं। आए दिन होने वाली प्रतियोगिताओं में बिना किसी अड़चन के प्रतिभाग करने का मौका भी मिल जाता है।
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स्कूल जाते समय रोज नहीं मांगने पड़ते पैसे
विद्यालय की छात्रा जया वर्मा, पूजा, छात्र रमेश मौर्य, समरपाल सिंह, राजेश कुमार, विमल सिंह का कहना है कि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए रोजाना स्कूल आते समय माता-पिता से पैसा नहीं मांगना पड़ता है। जो भी जेब खर्च के लिए मिलता है, उसका काफी हिस्सा अल्प बचत में जमा कर देते हैं। समय आने पर इसी बचत से पैसा निकाल कर वे कापी, पेंसिल से लेकर खेलकूद के लिए सामान की खरीदारी कर लेते हैं। इससे माता-पिता को भी अलग से कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ती है।
बच्चों की बचत की आदत से परिवार खुश
जूनियर हाईस्कूल पूरे मोहारी में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के अभिभावक राम बहादुर सिंह, राम सनेही, केदारनाथ आदि का कहना है कि घर से बच्चों को जो भी खर्च मिलता है, उसे स्कूल में जमा करके बच्चे अच्छा काम कर रहे हैं। जब भी उन्हें जरूरत होती है, इस बचत से अपने खर्चे निपटा लेते हैं। इससे आए दिन उन पर अतिरिक्त खर्च का बोझ नहीं पड़ता है और परिवार में भी खुशी रहती है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे स्कूल जाते समय किसी न किसी चीज की जरूरत बता देते हैं। उस समय पैसा नहीं होता है तो बच्चे भी नाराज होते हैं और जरूरत पूरी न कर पाने का खुद को भी मलाल रहता है।
छोटी-छोटी बचत करके छात्र-छात्राएं अपनी रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरा कर लेते हैं, जिसके लिए उन्हें किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता है और समय पर उनकी जरूरत भी पूरी हो जाती है।- देवीशंकर यादव, प्रधानाध्यापक।