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Raebareli News: मृतकों के नाम से ले रहे थे 625 क्विंटल राशन
Sat, 22 Mar 2025 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 22 Mar 2025 12:39 AM IST
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केस-एक
मौत के बाद भी शांति, माया, कामिनी का हिस्सा
लालगंज ब्लॉक के सैंबसी की शांति देवी और माया की मृत्यु हो चुकी है। इनका ऑनलाइन मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनवाया जा चुका है, लेकिन राशन कार्ड संख्या 215820084979 में शांति और राशन कार्ड संख्या 215820271988 में माया के नाम से हर माह राशन लिया जा रहा था। अमावां ब्लॉक के सारीपुर में भी मृत फूलमती और कामिनी के नाम का राशन हर माह लिया जा रहा था।
कसे दो-
गीता, रानी, सुनीता के नाम से मिलता था पांच-पांच किलो अन्न
मृत्यु प्रमाणपत्र बनने के बाद भी सतांव ब्लॉक के पड़रीगणेशपुर की गीता देवी को राशन कार्ड संख्या 215810310257 में और सराय मुबारकपुर की रानी को कार्ड संख्या 215830052041 में राशन मिल रहा था। बछरावां के रामपुर सुदौली में कार्ड संख्या 215840955806 से सुनीता को राशन मिल रहा था। सुनीता की भी मौत होने के बाद प्रमाणपत्र जारी हो चुका है।
रायबरेली। जिले में 12,510 मृतकों के नाम पर हर माह परिवार के लोग मुफ्त राशन ले रहे थे। ये तीन उदाहरण इसकी बानगी हैं। घरवालों ने ऑनलाइन आवेदन कर मृतकों का मृत्यु प्रमाणपत्र तो बनवा लिया, लेकिन राशन कार्ड से उनका नाम नहीं कटवाया। शासन स्तर पर इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट ऑफ पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (आईएमपीडीए) के तहत सर्वे में यह फर्जीवाड़ा सामने आया। ऐसे लोगों की सूची मिलते ही डीएसओ ने संबंधित यूनिटों के राशन पर रोक लगा दी है। साथ ही सात दिन के अंदर मृतकों के नाम राशन से काटने के आदेश दिए हैं।
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अमूमन, परिवार के किसी सदस्य की मौत के बाद राशन कार्डधारक से उसका नाम कटवाने से लोग बचते हैं। सत्यापन न हो पाने के कारण ऐसी यूनिटों को कार्ड से बाहर नहीं किया जाता और संबंधित के नाम से राशन मिलता रहता है। शासन स्तर पर ऑनलाइन जांच करने पर राशन कार्डधारकों की यह चालाकी सामने आ गई। ऑनलाइन मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के कारण यह सच सामने आया। जिले में 12510 ऐसी यूनिटें पकड़ में आईं, जिनमें लोगों की मौत होने के बाद भी उनके नाम से हर माह राशन लिया जा रहा था। हर माह करीब 625 क्विंटल राशन मृतकों के नाम पर बंट रहा था।
ऊंचाहार में सबसे ज्यादा 1462 मृतकों को राशन
जिले में सबसे ज्यादा ऊंचाहार ब्लॉक में 1462 मृतकों का राशन हर माह कोटे की दुकानों से लिया जा रहा था। इसके अलावा हरचंदपुर में 1214, सलोन में 699, सरेनी में 1152, सतांव में 1017, शिवगढ़ में 747, लालगंज में 1119, रोहनियां में 529, राही में 124, महराजगंज में 556, बछरावां में 793, दीनशाह गौरा में 182, डीह में 611, डलमऊ में 847, जगतपुर में 542, छतोह में 183, खीरों में 362, अमावां में 274 मृतकों को राशन मिल रहा था। नगर पालिका क्षेत्र में 161, नगर पंचायतों ऊंचाहार में सात, डलमऊ में 148, परशदेपुर में 40, बछरावां में 25, महराजगंज में 12, लालगंज में 36, सलोन में 50 मृतक राशन पा रहे थे।
राशन कार्डों से काटे जा रहे नाम
शासन स्तर पर जांच में 12510 ऐसी यूनिटें पकड़ में आई हैं, जिसमें लोगों की मौत होने के बाद भी उनकी यूनिटों का राशन लिया जा रहा था। ऑनलाइन मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाए जाने के बाद मामला पकड़ में आया। संबंधित यूनिटों का राशन रोक दिया गया है। सात दिन में यूनिटों को काटने के आदेश दिए गए हैं।
विमल कुमार शुक्ला, जिला पूर्ति अधिकारी रायबरेली
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मौत के बाद भी शांति, माया, कामिनी का हिस्सा
लालगंज ब्लॉक के सैंबसी की शांति देवी और माया की मृत्यु हो चुकी है। इनका ऑनलाइन मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनवाया जा चुका है, लेकिन राशन कार्ड संख्या 215820084979 में शांति और राशन कार्ड संख्या 215820271988 में माया के नाम से हर माह राशन लिया जा रहा था। अमावां ब्लॉक के सारीपुर में भी मृत फूलमती और कामिनी के नाम का राशन हर माह लिया जा रहा था।
कसे दो-
गीता, रानी, सुनीता के नाम से मिलता था पांच-पांच किलो अन्न
मृत्यु प्रमाणपत्र बनने के बाद भी सतांव ब्लॉक के पड़रीगणेशपुर की गीता देवी को राशन कार्ड संख्या 215810310257 में और सराय मुबारकपुर की रानी को कार्ड संख्या 215830052041 में राशन मिल रहा था। बछरावां के रामपुर सुदौली में कार्ड संख्या 215840955806 से सुनीता को राशन मिल रहा था। सुनीता की भी मौत होने के बाद प्रमाणपत्र जारी हो चुका है।
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रायबरेली। जिले में 12,510 मृतकों के नाम पर हर माह परिवार के लोग मुफ्त राशन ले रहे थे। ये तीन उदाहरण इसकी बानगी हैं। घरवालों ने ऑनलाइन आवेदन कर मृतकों का मृत्यु प्रमाणपत्र तो बनवा लिया, लेकिन राशन कार्ड से उनका नाम नहीं कटवाया। शासन स्तर पर इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट ऑफ पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (आईएमपीडीए) के तहत सर्वे में यह फर्जीवाड़ा सामने आया। ऐसे लोगों की सूची मिलते ही डीएसओ ने संबंधित यूनिटों के राशन पर रोक लगा दी है। साथ ही सात दिन के अंदर मृतकों के नाम राशन से काटने के आदेश दिए हैं।
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अमूमन, परिवार के किसी सदस्य की मौत के बाद राशन कार्डधारक से उसका नाम कटवाने से लोग बचते हैं। सत्यापन न हो पाने के कारण ऐसी यूनिटों को कार्ड से बाहर नहीं किया जाता और संबंधित के नाम से राशन मिलता रहता है। शासन स्तर पर ऑनलाइन जांच करने पर राशन कार्डधारकों की यह चालाकी सामने आ गई। ऑनलाइन मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के कारण यह सच सामने आया। जिले में 12510 ऐसी यूनिटें पकड़ में आईं, जिनमें लोगों की मौत होने के बाद भी उनके नाम से हर माह राशन लिया जा रहा था। हर माह करीब 625 क्विंटल राशन मृतकों के नाम पर बंट रहा था।
ऊंचाहार में सबसे ज्यादा 1462 मृतकों को राशन
जिले में सबसे ज्यादा ऊंचाहार ब्लॉक में 1462 मृतकों का राशन हर माह कोटे की दुकानों से लिया जा रहा था। इसके अलावा हरचंदपुर में 1214, सलोन में 699, सरेनी में 1152, सतांव में 1017, शिवगढ़ में 747, लालगंज में 1119, रोहनियां में 529, राही में 124, महराजगंज में 556, बछरावां में 793, दीनशाह गौरा में 182, डीह में 611, डलमऊ में 847, जगतपुर में 542, छतोह में 183, खीरों में 362, अमावां में 274 मृतकों को राशन मिल रहा था। नगर पालिका क्षेत्र में 161, नगर पंचायतों ऊंचाहार में सात, डलमऊ में 148, परशदेपुर में 40, बछरावां में 25, महराजगंज में 12, लालगंज में 36, सलोन में 50 मृतक राशन पा रहे थे।
राशन कार्डों से काटे जा रहे नाम
शासन स्तर पर जांच में 12510 ऐसी यूनिटें पकड़ में आई हैं, जिसमें लोगों की मौत होने के बाद भी उनकी यूनिटों का राशन लिया जा रहा था। ऑनलाइन मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाए जाने के बाद मामला पकड़ में आया। संबंधित यूनिटों का राशन रोक दिया गया है। सात दिन में यूनिटों को काटने के आदेश दिए गए हैं।
विमल कुमार शुक्ला, जिला पूर्ति अधिकारी रायबरेली