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एनटीपीसी हादसा
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:20 AM IST
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एनटीपीसी के दोषी अफसरों पर हो गैर इरादतन हत्या की एफआईआर
रायबरेली। पूर्व मंत्री और ऊंचाहार से सपा विधायक डॉ. मनोज पांडेय ने एनटीपीसी हादसे की उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए क्योंकि यूनिट के इंचार्ज ने तीन दिन पहले ही ऐश पाइप के चोेक होने की सूचना प्रबंधन को दे दी थी। लेकिन प्रबंधन ने उसे नजरअंदाज कर दिया था। चेतावनी दी कि 15 दिन के अंदर कार्रवाई न की गई तो एनटीपीसी के गेट पर बेमियादी धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।
शहर के एक होटल में बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत में डॉ. पांडेय ने कहा कि यूनिट पूरी नहीं थी। इसके बाद भी जबरन उसे शुरू करा दिया गया। समय से पहले यूनिट को शुरू कराने का मुख्य मकसद 80 फीसदी सब्सिडी और एक बडे़ अधिकारी की प्रमोशन की लालसा थी। कहा कि भोपाल में गैस त्रासदी के बाद एनटीपीसी ऊंचाहार में बड़ा हादसा हुआ है। इसकी जांच एनटीपीसी से न कराकर किसी उच्च एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने एनटीपीसी प्रबंधन के लापरवाह सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। कहा कि बचाव के लिए एनटीपीसी में लगाए गए फायर सिस्टम मौके पर काम नहीं आए। जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्था होने के बाद ही बचाव कार्य शुरू हो सका। एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा बरती गई मनमानी पर धारा 304ए के तहत दोषी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए। इसकी जांच होनी चाहिए कि समय से पहले यूनिट को क्यों शुरू कराया गया और स्टीम पाइप के चोक होने की सूचना होने के बाद भी मामले को गंभीरता से क्यों नही लिया गया।
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रायबरेली। पूर्व मंत्री और ऊंचाहार से सपा विधायक डॉ. मनोज पांडेय ने एनटीपीसी हादसे की उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए क्योंकि यूनिट के इंचार्ज ने तीन दिन पहले ही ऐश पाइप के चोेक होने की सूचना प्रबंधन को दे दी थी। लेकिन प्रबंधन ने उसे नजरअंदाज कर दिया था। चेतावनी दी कि 15 दिन के अंदर कार्रवाई न की गई तो एनटीपीसी के गेट पर बेमियादी धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।
शहर के एक होटल में बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत में डॉ. पांडेय ने कहा कि यूनिट पूरी नहीं थी। इसके बाद भी जबरन उसे शुरू करा दिया गया। समय से पहले यूनिट को शुरू कराने का मुख्य मकसद 80 फीसदी सब्सिडी और एक बडे़ अधिकारी की प्रमोशन की लालसा थी। कहा कि भोपाल में गैस त्रासदी के बाद एनटीपीसी ऊंचाहार में बड़ा हादसा हुआ है। इसकी जांच एनटीपीसी से न कराकर किसी उच्च एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने एनटीपीसी प्रबंधन के लापरवाह सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। कहा कि बचाव के लिए एनटीपीसी में लगाए गए फायर सिस्टम मौके पर काम नहीं आए। जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्था होने के बाद ही बचाव कार्य शुरू हो सका। एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा बरती गई मनमानी पर धारा 304ए के तहत दोषी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए। इसकी जांच होनी चाहिए कि समय से पहले यूनिट को क्यों शुरू कराया गया और स्टीम पाइप के चोक होने की सूचना होने के बाद भी मामले को गंभीरता से क्यों नही लिया गया।
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