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सात सौ रुपये के लिए पति को लोहे की राड
Updated Sat, 29 Sep 2018 12:36 AM IST
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रायबरेली। महज 700 रुपये के लिए एक महिला ने अपने पति की इमाम दस्ते से पीट-पीटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को कुएं में फेंक दिया।
वारदात के समय मौके पर मौजूद बेटे को भी कुछ न बताने की धमकी दी। हालांकि ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने गुरुवार रात कुएं से शव को बरामद कर लिया।
युवक के भाई मनोज कुमार की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है। मामला अमेठी जिले के जायस कोतवाली क्षेत्र के अबदूमऊ गांव का है। वारदात से गांव में दहशत का माहौल है।
बताते हैं कि दंपती में शादी के बाद से ही अनबन चल रही थी। महिला 20 दिन पहले ही काफी मान-मनौव्वल के बाद ससुराल लौटी थी।
नसीराबाद थाना क्षेत्र के तारापुर निवासी सुनीता की शादी जायस के अबदूमऊनिवासी मुकेश (40) के साथ हुई थी। दोनों में काफी सालों से अनबन चल रही थी।
करीब 20 दिन पहले ही सुनीता ससुराल आई थी। बताते हैं कि बुधवार रात सात सौ रुपये न मिलने से गुस्साई सुनीता ने पति को लोहे के इमाम दस्ते पीट-पीटकर मार डाला।
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इसके बाद शव को छुपाने के लिए घर के बाहर कुएं में फेंक दिया। बेटे अंशू (13) ने मां के इस कारनामे को अपनी आंखों से देख लिया तो सुनीता ने उसे भी जान से मार देने की धमकी दी, जिससे बेटे ने मुंह नहीं खोला।
इधर, 27 सितंबर को दिनभर मुकेश नजर नहीं आया तो पड़ोसियों ने अनहोनी की आशंका पर दिल्ली में रहने वाले उसके भाई मनोज को खबर दे दी।
मनोज से सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ की तो मामला खुल गया। इसके बाद पुलिस ने कुएं से शव को बरामद कर लिया। पुलिस की सख्ती के आगे सुनीता ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया।
पुलिस की मानें तो बड़े बेटे अंशू के मुताबिक पापा ने 16 हजार रुपये निकाले थे, जिसमें 5500 किसी को दे दिए थे। 700 रुपये की शराब पी थी।
शराब में इतना रुपया खर्च कर दिया। इसी बात को लेकर मम्मी-पापा में कहासुनी हुई। पापा ने मां को पीट दिया। इसी झगड़े में मां ने पापा को मार डाला।
एसओ रविंद्र सिंह का कहना है कि रुपये किसी बैंक से और कितने निकाले गए। इसके बारे में छानबीन की जा रही है। सुनीता अपने मायके में आशाबहू थी।
पांच साल तक मायके में रही आरोेपी आशा बहू
शादी के बाद अंशू व मंथन का जन्म हुआ। इसके कुछ समय बाद आशा बहू सुनीता व मुकेश में मनमुटाव हो गया। वह छोटे बेटे मंथन को लेकर अपने मायके तारापुर चली गई थी, जबकि बड़ा बेटा अंशू पिता के साथ रह रहा था।
पांच साल बाद लोगों व रिश्तेदारों के प्रयास से दोनों में सुलह हुई और सुनीता अपनी ससुराल आकर रहने लगी, लेकिन सुलह होने के बाद भी सुनीता के दिल में पति के लिए प्रेम नहीं जागा और उसने 20 दिन में ही अपने हाथों से ही अपना सुहाग उजाड़ दिया।
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वारदात के समय मौके पर मौजूद बेटे को भी कुछ न बताने की धमकी दी। हालांकि ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने गुरुवार रात कुएं से शव को बरामद कर लिया।
युवक के भाई मनोज कुमार की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है। मामला अमेठी जिले के जायस कोतवाली क्षेत्र के अबदूमऊ गांव का है। वारदात से गांव में दहशत का माहौल है।
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बताते हैं कि दंपती में शादी के बाद से ही अनबन चल रही थी। महिला 20 दिन पहले ही काफी मान-मनौव्वल के बाद ससुराल लौटी थी।
नसीराबाद थाना क्षेत्र के तारापुर निवासी सुनीता की शादी जायस के अबदूमऊनिवासी मुकेश (40) के साथ हुई थी। दोनों में काफी सालों से अनबन चल रही थी।
करीब 20 दिन पहले ही सुनीता ससुराल आई थी। बताते हैं कि बुधवार रात सात सौ रुपये न मिलने से गुस्साई सुनीता ने पति को लोहे के इमाम दस्ते पीट-पीटकर मार डाला।
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इसके बाद शव को छुपाने के लिए घर के बाहर कुएं में फेंक दिया। बेटे अंशू (13) ने मां के इस कारनामे को अपनी आंखों से देख लिया तो सुनीता ने उसे भी जान से मार देने की धमकी दी, जिससे बेटे ने मुंह नहीं खोला।
इधर, 27 सितंबर को दिनभर मुकेश नजर नहीं आया तो पड़ोसियों ने अनहोनी की आशंका पर दिल्ली में रहने वाले उसके भाई मनोज को खबर दे दी।
मनोज से सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ की तो मामला खुल गया। इसके बाद पुलिस ने कुएं से शव को बरामद कर लिया। पुलिस की सख्ती के आगे सुनीता ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया।
पुलिस की मानें तो बड़े बेटे अंशू के मुताबिक पापा ने 16 हजार रुपये निकाले थे, जिसमें 5500 किसी को दे दिए थे। 700 रुपये की शराब पी थी।
शराब में इतना रुपया खर्च कर दिया। इसी बात को लेकर मम्मी-पापा में कहासुनी हुई। पापा ने मां को पीट दिया। इसी झगड़े में मां ने पापा को मार डाला।
एसओ रविंद्र सिंह का कहना है कि रुपये किसी बैंक से और कितने निकाले गए। इसके बारे में छानबीन की जा रही है। सुनीता अपने मायके में आशाबहू थी।
पांच साल तक मायके में रही आरोेपी आशा बहू
शादी के बाद अंशू व मंथन का जन्म हुआ। इसके कुछ समय बाद आशा बहू सुनीता व मुकेश में मनमुटाव हो गया। वह छोटे बेटे मंथन को लेकर अपने मायके तारापुर चली गई थी, जबकि बड़ा बेटा अंशू पिता के साथ रह रहा था।
पांच साल बाद लोगों व रिश्तेदारों के प्रयास से दोनों में सुलह हुई और सुनीता अपनी ससुराल आकर रहने लगी, लेकिन सुलह होने के बाद भी सुनीता के दिल में पति के लिए प्रेम नहीं जागा और उसने 20 दिन में ही अपने हाथों से ही अपना सुहाग उजाड़ दिया।