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200 स्कूलों में फिर पठन-पाठन का कार्य ठप
Updated Thu, 07 Sep 2017 12:17 AM IST
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200 स्कूलों में पठन-पाठन ठप
रायबरेली। जिले के 2200 शिक्षामित्र बुधवार को फिर आंदोलन की राह पर चल पड़े। विकास भवन गेट पर ताला जड़ दिया और अफसरों और कर्मचारियों को अंदर घुसने से रोक दिया। इससे वहां पर अफरातफरी मच गई। शिक्षामित्र सरकार के 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। रोडवेज कर्मी भी शिक्षामित्रों के समर्थन में कूद पड़े और आंदोलन में साथ का एलान किया। शिक्षामित्रों की हड़ताल से एक बार फिर 200 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन ठप हो गया। बच्चों को घरों को लौटना पड़ा।
आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की अगुवाई में शिक्षामित्रों ने बुधवार सुबह विकास भवन में धरना देकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सभी ने विकास भवन के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इससे लोग न तो विकास भवन के अंदर जा पा रहे थे और न ही बाहर। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ किसी न किसी काम से आने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। रोडवेज संयुक्त कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों ने भी धरने में शिरकत की। परिषद के महामंत्री राजकुमार ने कहा कि शिक्षामित्रों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बसों का चक्का जाम कर दिया जाएगा। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि कैबिनेट से 10 हजार रुपये मानदेय शिक्षामित्रों को स्वीकार नहीं है। जिला प्रभारी अजय प्रताप सिंह ने कहा कि वार्ता मुख्यमंत्री से होती है, लेकिन सचिव मानदेय का प्रस्ताव तैयार करता है, जिसका सभी घोर विरोध करते हैं।
राही ब्लॉक अध्यक्ष संकठा प्रसाद, डीह अध्यक्ष अशोक मौर्य ने कहा कि 10 हजार रुपये का मानदेय कतई मंजूर नहीं है। सुमन सिंह व जया त्रिपाठी ने कहा कि सहायक अध्यापक पद के लिए पुरजोर संघर्ष किया जाएगा। सिटी मजिस्ट्रेट आलोक कुमार ने समझा-बुझाकर शिक्षामित्रों को शांत कराया तो उन्होंने विकास भवन का गेट खोला। शिक्षामित्रों की हड़ताल से 200 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन ठप हो गया। इसके चलते करीब 10 हजार बच्चों को स्कूल से लौटना पड़ा। धरना-प्रदर्शन का संचालन राज बहादुर ने किया। इस मौके पर अनिल मौर्य, रामधनी, सुशील शुक्ल, रामबरन सिंह, शीला यादव, आरती मिश्रा, शिव कुमारी, रश्मि द्विवेदी, प्रतिमा सिंह, सविता सिंह, रीता सिंह, शिवदेवी आदि मौैजूद रहे।
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रायबरेली। जिले के 2200 शिक्षामित्र बुधवार को फिर आंदोलन की राह पर चल पड़े। विकास भवन गेट पर ताला जड़ दिया और अफसरों और कर्मचारियों को अंदर घुसने से रोक दिया। इससे वहां पर अफरातफरी मच गई। शिक्षामित्र सरकार के 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। रोडवेज कर्मी भी शिक्षामित्रों के समर्थन में कूद पड़े और आंदोलन में साथ का एलान किया। शिक्षामित्रों की हड़ताल से एक बार फिर 200 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन ठप हो गया। बच्चों को घरों को लौटना पड़ा।
आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की अगुवाई में शिक्षामित्रों ने बुधवार सुबह विकास भवन में धरना देकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सभी ने विकास भवन के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इससे लोग न तो विकास भवन के अंदर जा पा रहे थे और न ही बाहर। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ किसी न किसी काम से आने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। रोडवेज संयुक्त कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों ने भी धरने में शिरकत की। परिषद के महामंत्री राजकुमार ने कहा कि शिक्षामित्रों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बसों का चक्का जाम कर दिया जाएगा। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि कैबिनेट से 10 हजार रुपये मानदेय शिक्षामित्रों को स्वीकार नहीं है। जिला प्रभारी अजय प्रताप सिंह ने कहा कि वार्ता मुख्यमंत्री से होती है, लेकिन सचिव मानदेय का प्रस्ताव तैयार करता है, जिसका सभी घोर विरोध करते हैं।
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राही ब्लॉक अध्यक्ष संकठा प्रसाद, डीह अध्यक्ष अशोक मौर्य ने कहा कि 10 हजार रुपये का मानदेय कतई मंजूर नहीं है। सुमन सिंह व जया त्रिपाठी ने कहा कि सहायक अध्यापक पद के लिए पुरजोर संघर्ष किया जाएगा। सिटी मजिस्ट्रेट आलोक कुमार ने समझा-बुझाकर शिक्षामित्रों को शांत कराया तो उन्होंने विकास भवन का गेट खोला। शिक्षामित्रों की हड़ताल से 200 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में पठन-पाठन ठप हो गया। इसके चलते करीब 10 हजार बच्चों को स्कूल से लौटना पड़ा। धरना-प्रदर्शन का संचालन राज बहादुर ने किया। इस मौके पर अनिल मौर्य, रामधनी, सुशील शुक्ल, रामबरन सिंह, शीला यादव, आरती मिश्रा, शिव कुमारी, रश्मि द्विवेदी, प्रतिमा सिंह, सविता सिंह, रीता सिंह, शिवदेवी आदि मौैजूद रहे।
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