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पांच साल बाद कलेजे के टुकड़ों
Updated Tue, 05 Dec 2017 12:19 AM IST
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पांच साल बाद कलेजे के टुकड़ों
से मिली मां तो छलक पड़ा प्यार
रायबरेली। पांच साल के लंबे फासले के बाद एक मां सोमवार को अपने बच्चों से मिली तो उसका प्यार छलक पड़ा। मां व बच्चों की दूरी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने खत्म की और उन्हें मिला दिया। पति-पत्नी के पारिवारिक विवाद के चलते मां व बच्चे एक दूसरे से दूर हो गए थे। अपने बच्चों से मिलकर खुशी से लबरेज महिला का कहना था कि उसे भरोसा था कि विधिक सेवा प्राधिकरण उसकी यह इच्छा जरूर पूरी करेगा।
प्राधिकरण के सचिव अभिषेक उपाध्याय ने बताया कि लालगंज कस्बे की रहने वाली शालिनी का विवाह फतेहपुर जिले के बाबूगंज निवासी सत्यराम के साथ वर्ष 2000 में हुआ था। कुछ सालों बाद पति-पत्नी में विवाद हो गया, जिसके चलते शालिनी अपने मायके आ गई। बच्चे उसके पति के ही साथ ही रहे। शालिनी ने 2012 में रायबरेली की अदालत में दहेज उत्पीड़न व भरण पोेषण के लिए मुकदमा दाखिल कर दिया। इस दौरान मां ने अपने पुत्र व पुत्री से मिलने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन पति ने बच्चों से मिलने नहीं दिया। इस पर महिला ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद मांगी। इस पर प्राधिकरण ने दोनों पक्षों में मध्यस्थता प्रक्रिया चलाई और पति को बच्चों के साथ आने का निर्देश दिया। इस पर मां व उसके दो बच्चों को मिलाया गया।
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से मिली मां तो छलक पड़ा प्यार
रायबरेली। पांच साल के लंबे फासले के बाद एक मां सोमवार को अपने बच्चों से मिली तो उसका प्यार छलक पड़ा। मां व बच्चों की दूरी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने खत्म की और उन्हें मिला दिया। पति-पत्नी के पारिवारिक विवाद के चलते मां व बच्चे एक दूसरे से दूर हो गए थे। अपने बच्चों से मिलकर खुशी से लबरेज महिला का कहना था कि उसे भरोसा था कि विधिक सेवा प्राधिकरण उसकी यह इच्छा जरूर पूरी करेगा।
प्राधिकरण के सचिव अभिषेक उपाध्याय ने बताया कि लालगंज कस्बे की रहने वाली शालिनी का विवाह फतेहपुर जिले के बाबूगंज निवासी सत्यराम के साथ वर्ष 2000 में हुआ था। कुछ सालों बाद पति-पत्नी में विवाद हो गया, जिसके चलते शालिनी अपने मायके आ गई। बच्चे उसके पति के ही साथ ही रहे। शालिनी ने 2012 में रायबरेली की अदालत में दहेज उत्पीड़न व भरण पोेषण के लिए मुकदमा दाखिल कर दिया। इस दौरान मां ने अपने पुत्र व पुत्री से मिलने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन पति ने बच्चों से मिलने नहीं दिया। इस पर महिला ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद मांगी। इस पर प्राधिकरण ने दोनों पक्षों में मध्यस्थता प्रक्रिया चलाई और पति को बच्चों के साथ आने का निर्देश दिया। इस पर मां व उसके दो बच्चों को मिलाया गया।
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