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पहले खिलाती थी नाश्ता और फिर पूछती थी कुशलक्षेम
Updated Tue, 31 Oct 2017 12:20 AM IST
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पहले खिलाती थीं नाश्ता फिर पूछती थी कुशलक्षेम
रायबरेली। आज पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है। वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जिले के वासी आज भी उनके यादें समेेटे है। उन्होंने जो रिश्ता यहां की जनता से बनाया था, वह आज भी कायम है। यहां के लोग जब दिल्ली उनसे मिलने जाते थे तो इंदिरा गांधी पहले उन्हें नाश्ता कराती थीं और फिर उनसे कुशलक्षेम पूछती थीं।
समाजसेवी जगदीश शुक्ल कहते हैं कि एक अवसर पर मैंने प्रधानमंत्री भवन में देखा था कि जनपद के कुछ लोग पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात के लिए आए थे। सबसे पहले स्वागत कक्ष में सम्मान के साथ बैठाया गया। कुछ क्षणों के पश्चात निजी सचिव यशपाल कपूर आए और लोगों को कार्यालय ले गए। कार्यालय में जलेबी का नाश्ता नत्थू लेकर पहुंचा। इसी बीच इंदिरा गांधी का आगमन हुआ था। उन्होंने सबसे पहले नाश्ते की बात की और फिर सभी लोगों का कुशलक्षेम जाना। तत्पश्चात जनपद के विकास कार्यों की चर्चा की। इंदिरा का यह सम्मान स्नेह व प्रेम भाव आज भी जनपदवासियों के जहन में है। हमेशा देखा जाता था कि जनपद आगमन पर कभी भी इंदिरा के सिर से पल्लू नहीं हटता था। जगदीश शुक्ल कहते हैं कि अप्रैल 1984 रायबरेली शहर में इंदिरा गांधी का डाक बंगला में कार्यक्रम था, जिसमें जनपद के पार्टी कार्यकर्ता आए थे। इंदिरा गांधी मंच पर बैठी थीं। यशपाल कपूर ने एक छोटा सा पैकेट इंदिरा जी को दिया। इंदिरा ने पैकेट खोला तो उसमें धोती कुर्ता था। यह कुर्ता उन्होंने गया प्रसाद शुक्ला उर्फ गुरु जी को दिया था। समाजसेवी जगदीश शुक्ला का कहना है कि इंदिरा गांधी जिले के विकास के लिए हमेशा तत्पर रहती थीं। दिल्ली में भी रहकर वे विकास कार्यों पर नजर रखती थी।
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रायबरेली। आज पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है। वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जिले के वासी आज भी उनके यादें समेेटे है। उन्होंने जो रिश्ता यहां की जनता से बनाया था, वह आज भी कायम है। यहां के लोग जब दिल्ली उनसे मिलने जाते थे तो इंदिरा गांधी पहले उन्हें नाश्ता कराती थीं और फिर उनसे कुशलक्षेम पूछती थीं।
समाजसेवी जगदीश शुक्ल कहते हैं कि एक अवसर पर मैंने प्रधानमंत्री भवन में देखा था कि जनपद के कुछ लोग पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात के लिए आए थे। सबसे पहले स्वागत कक्ष में सम्मान के साथ बैठाया गया। कुछ क्षणों के पश्चात निजी सचिव यशपाल कपूर आए और लोगों को कार्यालय ले गए। कार्यालय में जलेबी का नाश्ता नत्थू लेकर पहुंचा। इसी बीच इंदिरा गांधी का आगमन हुआ था। उन्होंने सबसे पहले नाश्ते की बात की और फिर सभी लोगों का कुशलक्षेम जाना। तत्पश्चात जनपद के विकास कार्यों की चर्चा की। इंदिरा का यह सम्मान स्नेह व प्रेम भाव आज भी जनपदवासियों के जहन में है। हमेशा देखा जाता था कि जनपद आगमन पर कभी भी इंदिरा के सिर से पल्लू नहीं हटता था। जगदीश शुक्ल कहते हैं कि अप्रैल 1984 रायबरेली शहर में इंदिरा गांधी का डाक बंगला में कार्यक्रम था, जिसमें जनपद के पार्टी कार्यकर्ता आए थे। इंदिरा गांधी मंच पर बैठी थीं। यशपाल कपूर ने एक छोटा सा पैकेट इंदिरा जी को दिया। इंदिरा ने पैकेट खोला तो उसमें धोती कुर्ता था। यह कुर्ता उन्होंने गया प्रसाद शुक्ला उर्फ गुरु जी को दिया था। समाजसेवी जगदीश शुक्ला का कहना है कि इंदिरा गांधी जिले के विकास के लिए हमेशा तत्पर रहती थीं। दिल्ली में भी रहकर वे विकास कार्यों पर नजर रखती थी।
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