फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   गोरखपुर की घटना के बाद भी नहीं सबक, हावी लापरवाही

गोरखपुर की घटना के बाद भी नहीं सबक, हावी लापरवाही

Sun, 13 Aug 2017 12:32 AM IST
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:32 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर की घटना के बाद भी नहीं सबक, हावी लापरवाही
जिला अस्पताल में 85 में से 25 ऑक्सीजन सिलेंडर खाली
विज्ञापन

रायबरेली। गोरखपुर की घटना के बाद भी सबक नहीं लिया जा रहा और लापरवाही हावी है। जिला अस्पताल हो या फिर देहात क्षेत्र की सीएचसी। ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हैं। खासकर सीएचसी में तो अधिकतर ऑक्सीजन सिलेंडर खाली रहते हैं। यदि रोगियों को एक साथ ऑक्सीजन की जरूरत पड़ जाए तो उपलब्ध नहीं होे सकती। बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अफसर यही दावा कर रहे हैं कि यहां पर सब कुछ ठीकठाक है।
मौजूदा समय की बात करें तो जिला अस्पताल में 85 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। इसमें से 25 सिलेंडर खाली हैं। यह हाल तब है, जब जिला अस्पताल में प्रतिदिन 200 से ज्यादा रोगी भर्ती किए जाते हैं। फिर भी पूरे सिलेंडर भरकर नहीं रखे जाते। इसके अलावा जिला अस्पताल के वार्ड नंबर दो व तीन में पाइप लाइन बिछा दी गई है। इसमें स्टोर से गैस प्रवाहित की जाती है। डॉक्टर आवश्यकतानुसार रोगी को ऑक्सजीन देते हैं। खासकर यहां पर देहात क्षेत्रों की 16 सीएचसी की हालत अधिक पतली है। शिवगढ़ सीएचसी में कुल 16 सिलेंडर स्वीकृत हैं। वर्तमान में केवल सात भरे हुए और नौ खाली पड़े सिलेंडर हैं। यदि एक साथ कई रोगी पहुंच जाएं तो रोगियों की जान पर संकट आ सकता है। सीएचसी के अंतर्गत आने वाली दो न्यू पीएचसी देहली में डॉक्टर प्रदीप गुप्ता ने बताया कि सिलेंडर की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। यही हाल न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नेरथुवा का है, जहां पर ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं है।
विज्ञापन

हरचंदपुर सीएचसी में कुल 20 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। इसमें से 14 खाली हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि गोरखपुर की घटना के बाद भी इस तरह की ढिलाई बरती जा रही है। सीएचसी सिंहपुर में महज दो ही ऑक्सीजन सिलेंडर मौजूद हैं। डीह सीएचसी में सिर्फ एक ही भरा ऑक्सीजन सिलेंडर है। तिलोई सीएचसी में तीन सिलेंडर भरे हैं, जबकि चार ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हैं। यही हाल कमोवेश हर सीएचसी का है, जहां पर ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हैं। मुंशीगंज की रहने वाली ज्योेति अग्रहरि, अगई कैथौला की रहने वाली ज्योति गौतम, गल्ला मंडी की सुमन सोनकर और रीना शुक्ला कहती हैं कि परिवारीजन बीमार होने पर भर्ती किए गए हैं। यहां पर ऑक्सीजन की व्यवस्था तो है, लेकिन रोगियों की देखरेख में ढिलाई बरती जाती है। डॉक्टर के रोगियों को देखने का समय निर्धारित नहीं है। आक्सीजन लगाकर चले जाते हैं, फिर देखने नहीं आते हैं। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां पर ऑक्सीजन सिलेंडरों की भरपूर संख्या है। ऑक्सीजन का कोई पेमेंट बकाया नहीं है। बाराबंकी से सिलेंडरों में ऑक्सीजन भराई जाती है। दो वार्ड में पाइप लाइन से रोगियों को ऑक्सीजन दी जाती है। सबकुछ ठीकठाक है।- डॉ. एनके श्रीवास्तव, सीएमएस, जिला अस्पताल


गोरखपुर की घटना के बाद सीएचसी अधीक्षकों को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। बाराबंकी से ऑक्सीजन सिलेडरों में भराई जाती है। कोई पेमेंट बकाया नहीं है। जो खाली सिलेंडर हैं, उन्हें भी भराने की बात कही गई है। यदि कहीं लापरवाही सामने आएगी तो कार्रवाई होगी। रोगियों की जिंदगानी बचाना पहली प्राथमिकता है।- डॉ. डीके सिंह,सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed