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एफआईआर दर्ज कराने के लिए वकील ने हाईकोर्ट में दी अर्जी
Updated Sat, 18 Nov 2017 01:02 AM IST
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एफआईआर दर्ज कराने के लिए वकील ने हाईकोर्ट में दी अर्जी
रायबरेली। एनटीपीसी हादसे को हुए 17 दिन बीत गए, लेकिन इस मामले में किसी के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। ये हाल तब है, जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रिपोर्ट दर्ज करने को कहा था। रिपोर्ट दर्ज न होने पर अधिवक्ता शकील अहमद खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले की सुनवाई को अदालत ने 20 नवंबर की तिथि तय की है।
गौरतलब है कि 1 नवंबर को एनटीपीसी में हादसा हो गया था, जिसमें 43 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है तो वहीं कई झुलसे लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए दीवानी कचहरी के अधिवक्ता शकील अहमद खान ने धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
प्रार्थना पत्र सुनवाई के लिए प्रभारी सीजेएम के पास पहुंचा, लेकिन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के कारण मामले में कोई आदेश नहीं हो सका। इस पर अधिवक्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली है। अधिवक्ता शकील अहमद खान ने बताया कि उन्होंने दोषी एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज न होने पर उच्च न्यायालय की शरण ली है, जहां 20 नवंबर को सुनवाई होगी।
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रायबरेली। एनटीपीसी हादसे को हुए 17 दिन बीत गए, लेकिन इस मामले में किसी के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। ये हाल तब है, जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रिपोर्ट दर्ज करने को कहा था। रिपोर्ट दर्ज न होने पर अधिवक्ता शकील अहमद खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले की सुनवाई को अदालत ने 20 नवंबर की तिथि तय की है।
गौरतलब है कि 1 नवंबर को एनटीपीसी में हादसा हो गया था, जिसमें 43 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है तो वहीं कई झुलसे लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए दीवानी कचहरी के अधिवक्ता शकील अहमद खान ने धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
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प्रार्थना पत्र सुनवाई के लिए प्रभारी सीजेएम के पास पहुंचा, लेकिन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अवकाश पर होने के कारण मामले में कोई आदेश नहीं हो सका। इस पर अधिवक्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली है। अधिवक्ता शकील अहमद खान ने बताया कि उन्होंने दोषी एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज न होने पर उच्च न्यायालय की शरण ली है, जहां 20 नवंबर को सुनवाई होगी।
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