2.65 लाख बच्चों को ड्रेस व किताबों की दरकार
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इतना समय बीत जाने के बावजूद विभाग बच्चों के लिए न तो ड्रेस की व्यवस्था कर सका और न ही किताबें ही उपलब्ध करा पा रहा है। इसका असर नन्हें-मुन्नो के भविष्य पर पड़ रहा है। जिले में करीब 2500 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं।
इनमें दो लाख 65 हजार से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। इनकी पढ़ाई लिखाई के लिए शासन की ओर से पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। बावजूद इसके विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा का माहौल नहीं मिल रहा है। कभी कापी-किताबों तो ड्रेस की समस्या आड़ें आ रही है।
शासन से शिक्षा विभाग को ड्रेस के लिए करीब 6.91 करोड़ रुपये का बजट मिल गया है। सभी विद्यालयों के खातों में 75 प्रतिशत धनराशि भेजी दी गई है। इसके बाद भी बच्चों को पुरानी और फटी ड्रेस से काम चलाना पड़ रहा है।
किताबों की व्यवस्था के नाम पर अब तक महज कक्षा सात की हिंदी की 29,670 और अंग्रेजी की 19,318 किताबें ही आई हैं। शेष कक्षाओं की विभिन्न विषयों की किताबों का आना अभी बाकी है। इन हालातों में बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है, लेकिन अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस निरंजन ने बताया कि एम निर्देश पर ड्रेस वितरण के लिए सभी विद्यालयों के खातों में 75 फीसदी धनराशि भेज दी गई है। ड्रेस खरीद कर वितरण के निर्देश दिए गए हैं।
कक्षा सात की हिंदी व अंग्रेजी की किताबें मिल गई है। इसका सत्यापन कराने के बाद ब्लॉक स्तरों पर भेज दिया जाएगा। ड्रेस और पुस्तक की समीक्षा प्रतिदिन की जा रही है।