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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   2.63 million children gave lousy books

2.63 लाख बच्चों को दीं घटिया किताबें

Tue, 22 Mar 2016 09:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली Updated Tue, 22 Mar 2016 09:21 AM IST
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शासन की मंशा पर जिले के परिषदीय स्कूलों के दो लाख 63 हजार बच्चों में बांटी गईं निशुल्क किताबें मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। नेशनल टेस्ट हाउस (एनटीएच) गाजियाबाद की जांच में इसका खुलासा हुआ है।
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वर्ष 2015-16 में जिले आईं किताबों के कागजों की गुणवत्ता, ब्राइटनेस और ब्रेकिंग लेंथ में गड़बड़ी पाई गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रकाशकों के भुगतान में 20 फीसदी तक कटौती के आदेश दिए गए हैं। जिले में इलाहाबाद व झांसी के तीन प्रकाशकों ने करीब दो करोड़ की किताबों की आपूर्ति की है।
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परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों को हर साल प्रदेश सरकार मुफ्त किताबें देती है। कक्षा एक से कक्षा आठ तक बच्चों में करीब 22 प्रकार की किताबों का वितरण वर्ष 2014-15 में भी किया गया।
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मेसर्स काजमी एवं एसोसिएट्स इलाहाबाद, मेसर्स राजीव प्रकाशन इलाहाबाद और पीतांबरा बुक्स झांसी ने जिले के दो लाख 63 हजार बच्चों में वितरण के लिए किताबों की आपूर्ति की थी।

शासन की मंशा पर प्रदेश सरकार ने किताबों के वितरण से पहले 44 नमूने की नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलीवरेशन लेबोरेटरीज नई दिल्ली से प्रमाणित राजकीय संस्था नेशनल टेस्ट हाउस कमला नेहरू नगर गाजियाबाद से नमूनों की जांच कराई।

जांच में किताबों की गुणवत्ता ठीक नहीं मिली। मेसर्स काजमी एवं एसोसिएट्स इलाहाबाद की किताबों में ब्राइटनेस नहीं मिली। जबकि मेसर्स राजीव प्रकाशन इलाहाबाद की किताबों में कागजों की गुणवत्ता ठीक न मिलने के साथ ही ब्राइटनेस व ब्रेकिंग लेंथ की कमी मिली।

पीतांबरा बुक्स झांसी की किताबों में कागजों की गुणवत्ता के साथ ही वन वियर काव टेस्ट, ब्राइटनेस व ब्रेकिंग लेंथ में कमी मिली। इस पर मेसर्स काजमी एवं एसोसिएट्स इलाहाबाद के भुगतान में पांच प्रतिशत, मेसर्स राजीव प्रकाशन इलाहाबाद के भुगतान में 15 प्रतिशत और पीतांबरा बुक्स झांसी के भुगतान में 20 प्रतिशत की कटौती के आदेश दिए गए हैं।

इसके अलावा पहले से छूट के रूप में तय 7.50 प्रतिशत की अलग से कटौती की जाएगी। कई वर्षों से लगातार परिषदीय स्कूलों के बच्चों में किताबों का वितरण होता रहा है। टेंडर प्रक्रिया के समय ही साढे़ सात प्रतिशत छूट के रूप में कटौती की ही व्यवस्था थी। लेकिन पहली बार प्रकाशकों के भुगतान में इतने अधिक धन की कटौती की गई है।


बेसिक शिक्षा विभाग एएओ धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में बांटी गई किताबों की गुणवत्ता जांच में ठीक नहीं पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद बेसिक शिक्षा सचिव ने 5 से 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त कटौती करके भुगतान करने के आदेश दिए हैं। भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 31 मार्च से पहले भुगतान कर दिया जाएगा।
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