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अवैध निर्माण से पटा शहर, कागजों तक सिमटी कार्रवाई
Updated Wed, 14 Mar 2018 12:32 AM IST
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अवैध निर्माण से पटा शहर, कागजों तक सिमटी कार्रवाई
रायबरेली। आरडीए की लापरवाही के कारण शहर अवैध निर्माण से पट गया है। 80 फीसदी से अधिक आवास और कांप्लेक्स बिना नक्शे के खडे़ हो गए हैं।
भवनों का निर्माण पूरा होने के बाद ही आरडीए कार्रवाई के लिए सामने आता है। इसी का नतीजा है कि 200 से अधिक आवासीय कांप्लेक्स का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है।
नोटिस को बिल्डर दबाए बैठे हैं। यही नहीं डीएम के आदेश पर हुई जांच में 30 कांप्लेक्स में पार्किंग नहीं मिली। संबंधित बिल्डरों को नोटिस भी दिया गया, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
73 आवासों को एक साल पहले ही ध्वस्त करने के आदेश दिए गए, लेकिन अब तक एक को भी ध्वस्त नहीं किया जा सका है।
बिना पार्किंग का इंतजाम किए बने कांप्लेक्स के मामले में मालिकों को नोटिस दिए एक माह हो चुके हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी।
इसके अलावा शहर के आवासीय परिसरों में व्यवसायिक भवन खडे़ हो गए हैं। लेकिन आरडीए के अधिकारियों को खबर नहीं लगी। 200 से अधिक ऐसे आवासीय भवनों का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है।
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रायबरेली। आरडीए की लापरवाही के कारण शहर अवैध निर्माण से पट गया है। 80 फीसदी से अधिक आवास और कांप्लेक्स बिना नक्शे के खडे़ हो गए हैं।
भवनों का निर्माण पूरा होने के बाद ही आरडीए कार्रवाई के लिए सामने आता है। इसी का नतीजा है कि 200 से अधिक आवासीय कांप्लेक्स का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है।
नोटिस को बिल्डर दबाए बैठे हैं। यही नहीं डीएम के आदेश पर हुई जांच में 30 कांप्लेक्स में पार्किंग नहीं मिली। संबंधित बिल्डरों को नोटिस भी दिया गया, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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73 आवासों को एक साल पहले ही ध्वस्त करने के आदेश दिए गए, लेकिन अब तक एक को भी ध्वस्त नहीं किया जा सका है।
बिना पार्किंग का इंतजाम किए बने कांप्लेक्स के मामले में मालिकों को नोटिस दिए एक माह हो चुके हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी।
इसके अलावा शहर के आवासीय परिसरों में व्यवसायिक भवन खडे़ हो गए हैं। लेकिन आरडीए के अधिकारियों को खबर नहीं लगी। 200 से अधिक ऐसे आवासीय भवनों का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है।
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