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गांव में चीर रहा सन्नाटा, हर तरफ खाकी का पहरा
Updated Wed, 28 Jun 2017 05:03 AM IST
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अप्टा ने देखा नहीं कभी ऐसा खौफनाक मंजर
गांव में चीर रहा सन्नाटा, हर तरफ खाकी का पहरा
- जिन चेहरों पर हंसी ठिठौली दिखती थी, उनमें दिख रहा खौफ
- जिधर नजर घूमती उधर नजर आती पुलिस अफसरों की गाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। सुबह, दोपहर और शाम के वक्त हंसी-खुशी से लबरेज अप्टा गांव के ग्रामीणों ने शायद ऐसा खौफनाक मंजर कभी देखा हो। गांव में जहां सन्नाटा चीर रहा है, वहीं हर तरफ खाकी का पहरा दिख रहा है। दहशत के चलते लोगों पर खौफ दिख रहा है। जिधर नजर घूमती, उधर पुलिस के जवान और उनकी गाड़ियां नजर आती हैं। कोई भी घटना की बाबत बोलने को तैयार नहीं है। बस दबी जुबान उनके मुंह से यही निकल रहा है कि आखिर हमारे गांव पर किसी की नजर लग गई।
अप्टा मजरे इटौरा बुजुर्ग गांव में सोमवार रात फिल्मी अंदाज में जो कुछ हुआ, शायद उसके जख्म जल्दी भरने वाले नहीं हैं। चुनावी वर्चस्व कायम करने के लिए जिस तरह खून बहाया गया, उससे यह रार अभी थमती नहीं दिख रही है। दोनों खेमे में जहां प्रतिशोध की ज्वाला दिख रही है, वहीं दो गुटों के टकराव ने पूरे गांव की शांति को छीन लिया है। मंगलवार को गांव का नजारा बदला था। गलियां सूनी पड़ी थी। वहां पर लोग नहीं दिखाई पड़ रहे थे। बस दिख रहा तो उनके कच्चे-पक्के मकान या फिर पुलिस-पीएसी के जवान और उनकी गाड़ियां।
क्या बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और युवा घर के अंदर ही दुबके रहे। सभी के चेहरे पर दिख रहा खौफ और मायूसी साफ बयां कर रही थी कि घटना को लेकर सभी में नाराजगी है। दबी जुबान से एक बुजुर्ग का कहना था कि 70 साल की उम्र पूरी हो गई है। कभी ऐसा वक्त नहीं आया कि गांव में ऐसा माहौल हुआ हो। उम्र के इस पड़ाव में पहुंचने पर दुख लगता है कि हमारे अप्टा गांव में क्या हुआ, जिसकी हम कभी कल्पना नहीं की थी।
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हम सब तो एक साथ रहने, बैठने और खानपान वाले थे। आखिर यह नफरत की आग कैसे जल उठी। यह आग फिर न जले, इसको लेकर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। यही दर्द अपटा के हर व्यक्ति का है, जो इस घटना से खफा और गमगीन है। सीओ डलमऊ एसपी उपाध्याय का कहना है कि गांव में कई थानों की पुलिस तैनात की गई है, जो हर व्यक्ति पर पैनी नजर रख रही है। फिलहाल गांव का माहौल पूरी तरह से शांत है।
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गांव में चीर रहा सन्नाटा, हर तरफ खाकी का पहरा
- जिन चेहरों पर हंसी ठिठौली दिखती थी, उनमें दिख रहा खौफ
- जिधर नजर घूमती उधर नजर आती पुलिस अफसरों की गाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। सुबह, दोपहर और शाम के वक्त हंसी-खुशी से लबरेज अप्टा गांव के ग्रामीणों ने शायद ऐसा खौफनाक मंजर कभी देखा हो। गांव में जहां सन्नाटा चीर रहा है, वहीं हर तरफ खाकी का पहरा दिख रहा है। दहशत के चलते लोगों पर खौफ दिख रहा है। जिधर नजर घूमती, उधर पुलिस के जवान और उनकी गाड़ियां नजर आती हैं। कोई भी घटना की बाबत बोलने को तैयार नहीं है। बस दबी जुबान उनके मुंह से यही निकल रहा है कि आखिर हमारे गांव पर किसी की नजर लग गई।
अप्टा मजरे इटौरा बुजुर्ग गांव में सोमवार रात फिल्मी अंदाज में जो कुछ हुआ, शायद उसके जख्म जल्दी भरने वाले नहीं हैं। चुनावी वर्चस्व कायम करने के लिए जिस तरह खून बहाया गया, उससे यह रार अभी थमती नहीं दिख रही है। दोनों खेमे में जहां प्रतिशोध की ज्वाला दिख रही है, वहीं दो गुटों के टकराव ने पूरे गांव की शांति को छीन लिया है। मंगलवार को गांव का नजारा बदला था। गलियां सूनी पड़ी थी। वहां पर लोग नहीं दिखाई पड़ रहे थे। बस दिख रहा तो उनके कच्चे-पक्के मकान या फिर पुलिस-पीएसी के जवान और उनकी गाड़ियां।
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क्या बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और युवा घर के अंदर ही दुबके रहे। सभी के चेहरे पर दिख रहा खौफ और मायूसी साफ बयां कर रही थी कि घटना को लेकर सभी में नाराजगी है। दबी जुबान से एक बुजुर्ग का कहना था कि 70 साल की उम्र पूरी हो गई है। कभी ऐसा वक्त नहीं आया कि गांव में ऐसा माहौल हुआ हो। उम्र के इस पड़ाव में पहुंचने पर दुख लगता है कि हमारे अप्टा गांव में क्या हुआ, जिसकी हम कभी कल्पना नहीं की थी।
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हम सब तो एक साथ रहने, बैठने और खानपान वाले थे। आखिर यह नफरत की आग कैसे जल उठी। यह आग फिर न जले, इसको लेकर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। यही दर्द अपटा के हर व्यक्ति का है, जो इस घटना से खफा और गमगीन है। सीओ डलमऊ एसपी उपाध्याय का कहना है कि गांव में कई थानों की पुलिस तैनात की गई है, जो हर व्यक्ति पर पैनी नजर रख रही है। फिलहाल गांव का माहौल पूरी तरह से शांत है।