{"_id":"59496a9d4f1c1b243d8b47d5","slug":"181497983645-raebareli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चतुरपुर में कराए गए कार्यों में मिला गड़बड़झाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चतुरपुर में कराए गए कार्यों में मिला गड़बड़झाला
Updated Wed, 21 Jun 2017 02:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चतुरपुर में कराए गए कार्यों में मिला घपला
परशदेपुर (रायबरेली)। विकासखंड छतोह के चतुरपुर में हुए कार्यों में घपला किया गया है। मंगलवार को जन सूचना अधिनियम की शिकायत पर आरईएस विभाग के जेई पीके पांडेय जांच करने गांव पहुंचे। जेई ने वर्ष 2010 से 2016 तक आवास, मनरेगा, राशन कार्ड, प्रसाधन समेत अन्य बिंंदुओं की जांच की। जांच में गांव के ही दुर्गा प्रसाद पाठक की जमीन का समतलीकरण में गड़बड़झाला मिला। जांच में पता चला कि दुर्गा प्रसाद की जमीन का जो समतलीकरण हुआ, वह छतोह ग्रामसभा की जमीन है, जबकि दुर्गा प्रसाद चतुरपुर गांव के निवासी हैं। वर्ष 2014-15 में लगभग तीन सौ मीटर खड़ंजा सद्दू के घर से शब्बीर के घर तक करीब तीन लाख चार हजार 200 रुपये की लागत से बनवाया गया, जिसके दस्तावेज में जेई के हस्ताक्षर नहीं है। गांव के ही सुखराम की कॉलोनी बनी नहीं और कागज पर कॉलोनी बनी दिखा दी गई। जेई का कहना है कि जांच में काफी कमियां मिली हैं। जांच करके रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
विज्ञापन
परशदेपुर (रायबरेली)। विकासखंड छतोह के चतुरपुर में हुए कार्यों में घपला किया गया है। मंगलवार को जन सूचना अधिनियम की शिकायत पर आरईएस विभाग के जेई पीके पांडेय जांच करने गांव पहुंचे। जेई ने वर्ष 2010 से 2016 तक आवास, मनरेगा, राशन कार्ड, प्रसाधन समेत अन्य बिंंदुओं की जांच की। जांच में गांव के ही दुर्गा प्रसाद पाठक की जमीन का समतलीकरण में गड़बड़झाला मिला। जांच में पता चला कि दुर्गा प्रसाद की जमीन का जो समतलीकरण हुआ, वह छतोह ग्रामसभा की जमीन है, जबकि दुर्गा प्रसाद चतुरपुर गांव के निवासी हैं। वर्ष 2014-15 में लगभग तीन सौ मीटर खड़ंजा सद्दू के घर से शब्बीर के घर तक करीब तीन लाख चार हजार 200 रुपये की लागत से बनवाया गया, जिसके दस्तावेज में जेई के हस्ताक्षर नहीं है। गांव के ही सुखराम की कॉलोनी बनी नहीं और कागज पर कॉलोनी बनी दिखा दी गई। जेई का कहना है कि जांच में काफी कमियां मिली हैं। जांच करके रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।