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800 पुल क्षतिग्रस्त, 20 लाख लोगों पर मंडरा रहा खतरा
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800 पुल क्षतिग्रस्त, 20 लाख लोग झेल रहे परेशानी
रायबरेली। जिले में सिंचाई विभाग की करीब 2300 किलोमीटर नहरें हैं। इन नहरों पर 1400 पुल बनवाए गए हैं, ताकि लोगों को आने जाने में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। इसमें से करीब 800 पुल जर्जर हैं, लेकिन इनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। इन पुलों से मौजूदा समय में 20 लाख लोगों का आना जाना है। लोगों का आरोप है कि बावजूद इसके मरम्मत के लिए जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। यह हाल तब है, जब क्षेत्रीय लोगों की ओर से इन पुलों की मरम्मत के लिए अरसे से मांग की जा रही है।
डलमऊ तहसील क्षेत्र के शिवपुरी गांव के पास बना पुल जर्जर हो गया है। छत धंस गई है। दीवारों में दरारें आ गई है। इसके बगल में पुल का निर्माण हो रहा है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। उसी जर्जर पुल से लोग आते-जाते हैं। जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के बेहीखोर गांव के पास जर्जर पुल ढह गया है। यहां पर हृयूम पाइप डालकर आवागमन हो रहा है।
भारी वाहन नहीं निकल पा रहे हैं। इससे इलाकाई लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जगतपुर ब्लॉक के ही पासिन का अड्डा गांव के पास बना पुल ट्रक गुजरने से ढह गया था। दोनों तरफ की रेलिंग टूटी है। मिट्टी डालकर आवागमन बहाल कर दिया गया, लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। इसी तरह अन्य क्षेत्रों में बने पुलों की दशा कमोवेश यही है।
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पुलों की मरम्मत कराने के नाम पर महज खानापूरी की जा रही है। आम आदमी की जिंदगी से अफसरों को कोई सरोकार नहीं रह गया है। यही वजह है कि इन पुलों की मरम्मत कराने के नाम पर ढिलाई बरती जा रही है। विभागीय जानकारों से मिली जानकारी के अनुसार ऊर्जा मंत्री का आदेश कोई मायने रखता।
अक्तूबर 2018 में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने जिले में सभी खंडों के एक्सईएन से जर्जर पुलों की सूची मांगी थी। अब तक केवल सिंचाई खंड दक्षिणी के एक्सईएन ने 200 जर्जर पुलों की सूची एकत्रित की है, जबकि अन्य आठ खंडों के एक्सईएन अपनी रिपोर्ट नहीं भेज रहे हैं। इससे आगे की प्रक्रिया ठप है। यही वजह है कि अब तक जर्जर पुल चिह्नित नहीं किए गए हैं।
जगतपुर। बेहीखोर गांव के रहने शुभेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, रामभरोसे मौर्य, जय प्रकाश, हरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि पुल जर्जर ढहवा गया। हयूम पाइप डालकर आवागमन कराया जा रहा है। इससे दिन में ठीक रहता है, लेकिन रात के वक्त आने जाने में नहर में गिरने की आशंका रहती है। इसको लेकर अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
कई बार पक्का पुल बनवाए जाने की मांग की गई, लेकिन अब तक ध्यान नहीं दिया गया। जल्द इसको लेकर आवाज उठाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा। सिंचाई विभाग के नोडल अधिकारी सिद्धार्थ कुमार का मानना है कि करीब 800 पुल जर्जर है। सिंचाई मंत्री का पत्र आया था, जिसे अन्य खंडों के एक्सईएन को अवगत करा दिया गया है। अभी अन्य खंडों से रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद रिपोर्ट भेजी जाएगी। कुछ पुलों पर निर्माण कार्य भी चल रहा है।
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रायबरेली। जिले में सिंचाई विभाग की करीब 2300 किलोमीटर नहरें हैं। इन नहरों पर 1400 पुल बनवाए गए हैं, ताकि लोगों को आने जाने में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। इसमें से करीब 800 पुल जर्जर हैं, लेकिन इनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। इन पुलों से मौजूदा समय में 20 लाख लोगों का आना जाना है। लोगों का आरोप है कि बावजूद इसके मरम्मत के लिए जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। यह हाल तब है, जब क्षेत्रीय लोगों की ओर से इन पुलों की मरम्मत के लिए अरसे से मांग की जा रही है।
डलमऊ तहसील क्षेत्र के शिवपुरी गांव के पास बना पुल जर्जर हो गया है। छत धंस गई है। दीवारों में दरारें आ गई है। इसके बगल में पुल का निर्माण हो रहा है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। उसी जर्जर पुल से लोग आते-जाते हैं। जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के बेहीखोर गांव के पास जर्जर पुल ढह गया है। यहां पर हृयूम पाइप डालकर आवागमन हो रहा है।
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भारी वाहन नहीं निकल पा रहे हैं। इससे इलाकाई लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जगतपुर ब्लॉक के ही पासिन का अड्डा गांव के पास बना पुल ट्रक गुजरने से ढह गया था। दोनों तरफ की रेलिंग टूटी है। मिट्टी डालकर आवागमन बहाल कर दिया गया, लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। इसी तरह अन्य क्षेत्रों में बने पुलों की दशा कमोवेश यही है।
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पुलों की मरम्मत कराने के नाम पर महज खानापूरी की जा रही है। आम आदमी की जिंदगी से अफसरों को कोई सरोकार नहीं रह गया है। यही वजह है कि इन पुलों की मरम्मत कराने के नाम पर ढिलाई बरती जा रही है। विभागीय जानकारों से मिली जानकारी के अनुसार ऊर्जा मंत्री का आदेश कोई मायने रखता।
अक्तूबर 2018 में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने जिले में सभी खंडों के एक्सईएन से जर्जर पुलों की सूची मांगी थी। अब तक केवल सिंचाई खंड दक्षिणी के एक्सईएन ने 200 जर्जर पुलों की सूची एकत्रित की है, जबकि अन्य आठ खंडों के एक्सईएन अपनी रिपोर्ट नहीं भेज रहे हैं। इससे आगे की प्रक्रिया ठप है। यही वजह है कि अब तक जर्जर पुल चिह्नित नहीं किए गए हैं।
जगतपुर। बेहीखोर गांव के रहने शुभेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, रामभरोसे मौर्य, जय प्रकाश, हरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि पुल जर्जर ढहवा गया। हयूम पाइप डालकर आवागमन कराया जा रहा है। इससे दिन में ठीक रहता है, लेकिन रात के वक्त आने जाने में नहर में गिरने की आशंका रहती है। इसको लेकर अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
कई बार पक्का पुल बनवाए जाने की मांग की गई, लेकिन अब तक ध्यान नहीं दिया गया। जल्द इसको लेकर आवाज उठाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा। सिंचाई विभाग के नोडल अधिकारी सिद्धार्थ कुमार का मानना है कि करीब 800 पुल जर्जर है। सिंचाई मंत्री का पत्र आया था, जिसे अन्य खंडों के एक्सईएन को अवगत करा दिया गया है। अभी अन्य खंडों से रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद रिपोर्ट भेजी जाएगी। कुछ पुलों पर निर्माण कार्य भी चल रहा है।