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अधूरे पड़े विद्युत उपकेंद्र, नहीं मिली उपभोक्ताओं की राहत
Updated Tue, 19 Sep 2017 01:16 AM IST
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एक साल से अधूरे पड़े सात विद्युत उपकेंद्र
रायबरेली। ग्रामीण अंचलों को भरपूर बिजली देने के लिए सात नए सब स्टेशनों का निर्माण एक साल बार भी पूरा नहीं हो सका है। इन उपकेंद्रों के निर्माण कराने में एजेंसियां और ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। यही वजह है कि अब तक एक भी सब स्टेशन बनकर तैयार नहीं हो सका है। इसका खामियाजा ग्रामीण अंचलों के करीब तीन लाख उपभोक्ता भुगत रहे हैं।
ग्रामीण अंचलों में विद्युत उपकेंद्र ओवरलोड हैं और लाइनें जर्जर होने के चलते आए दिन फॉल्ट बना रहता है। उपकेंद्र के निर्माण में हो रही हीलाहवाली से आम जनता परेशान हैं। जिले में बिजली आपूर्ति के लिए 35 उपकेंद्र हैं। ग्रामीण अंचलों के ज्यादातर उपकेंद्र ओवर लोड है। इसके चलते उपभोक्ताओं को लो-वोल्ट्रेज, ट्रिपिंग की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसी समस्या से निजात दिलाने के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत सात बिजली उपकेंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। कोई भी उपकेंद्र अब तक बनकर तैयार नहीं हो सका है। विभागीय अभियंता केवल राजस्व वसूली तक सीमित हैं। उपकेंद्र की मॉनीटरिंग रामभरोसे हैं। निर्माण कराने वाले ठेकेदार भी जैसे तैसे काम कर रहे हैं।
इन गांवों में चल रहा है उपकेंद्रों का निर्माण
योजना के तहत उन गांवों का चयन किया गया है, जहां आसपास कोई बिजली घर नहीं है। भुएमऊ, ओसाह, करहिया, कालुवा खेड़ा, कोंसा, भोजपुर, बरस में नए उपकेंद्र बनाए जाने हैं। कार्य धीमी गति से होने के चलते कहीं पर बाउंड्रीवाल बनी है तो कहीं पर बिजली घर की मशीनें रखने के लिए कमरा बनकर तैयार हुआ है।
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केंद्र सरकार की दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सात उपकेंद्रों का निर्माण होना है। भोजपुर, करहिया, कलुवाखेड़ा में निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है। इन तीनों उपकेंद्रों को जल्द चलाने का प्रयास किया जाएगा।-पंकज कुमार, अधीक्षण अभियंता पावर कॉर्पोरेशन
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रायबरेली। ग्रामीण अंचलों को भरपूर बिजली देने के लिए सात नए सब स्टेशनों का निर्माण एक साल बार भी पूरा नहीं हो सका है। इन उपकेंद्रों के निर्माण कराने में एजेंसियां और ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। यही वजह है कि अब तक एक भी सब स्टेशन बनकर तैयार नहीं हो सका है। इसका खामियाजा ग्रामीण अंचलों के करीब तीन लाख उपभोक्ता भुगत रहे हैं।
ग्रामीण अंचलों में विद्युत उपकेंद्र ओवरलोड हैं और लाइनें जर्जर होने के चलते आए दिन फॉल्ट बना रहता है। उपकेंद्र के निर्माण में हो रही हीलाहवाली से आम जनता परेशान हैं। जिले में बिजली आपूर्ति के लिए 35 उपकेंद्र हैं। ग्रामीण अंचलों के ज्यादातर उपकेंद्र ओवर लोड है। इसके चलते उपभोक्ताओं को लो-वोल्ट्रेज, ट्रिपिंग की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसी समस्या से निजात दिलाने के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत सात बिजली उपकेंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। कोई भी उपकेंद्र अब तक बनकर तैयार नहीं हो सका है। विभागीय अभियंता केवल राजस्व वसूली तक सीमित हैं। उपकेंद्र की मॉनीटरिंग रामभरोसे हैं। निर्माण कराने वाले ठेकेदार भी जैसे तैसे काम कर रहे हैं।
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इन गांवों में चल रहा है उपकेंद्रों का निर्माण
योजना के तहत उन गांवों का चयन किया गया है, जहां आसपास कोई बिजली घर नहीं है। भुएमऊ, ओसाह, करहिया, कालुवा खेड़ा, कोंसा, भोजपुर, बरस में नए उपकेंद्र बनाए जाने हैं। कार्य धीमी गति से होने के चलते कहीं पर बाउंड्रीवाल बनी है तो कहीं पर बिजली घर की मशीनें रखने के लिए कमरा बनकर तैयार हुआ है।
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केंद्र सरकार की दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सात उपकेंद्रों का निर्माण होना है। भोजपुर, करहिया, कलुवाखेड़ा में निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है। इन तीनों उपकेंद्रों को जल्द चलाने का प्रयास किया जाएगा।-पंकज कुमार, अधीक्षण अभियंता पावर कॉर्पोरेशन