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एशियन गेम्स में सुधा सिंह ने भारत को फिर दिलाया पदक
Updated Tue, 28 Aug 2018 01:05 AM IST
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रायबरेली। जिले की उड़नपरी के नाम से मशहूर एथलेटिक्स खिलाड़ी सुधा सिंह ने एशियन गेम्स में भारत के लिए एक बार फिर पदक झटका। यह उनका 39वां पदक है। सोमवार को महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज मुकाबले में भले ही सुधा सिंह गोल्ड मेडल पाने से चूक गईं, लेकिन उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल करके अपनी श्रेष्ठता साबित की है।
सुधा सिंह के मेडल पाने की खबर मिलते ही परिवार वालों के साथ ही प्रशंसकों और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। बचपन से ही खेल की शौकीन रही सुधा सिंह ने अपनी शिक्षा रायबरेली जिले से ही पूरी की। एथलेटिक्स के क्षेत्र में सुधा की शुरुआत वर्ष 2003 में लखनऊ के स्पोर्ट्स कॉलेज से हुई।
स्टीपलचेज की खिलाड़ी सुधा सिंह ने अपनी कामयाबी के बीच किसी को भी आने नहीं दिया। यही वजह है कि 14 वर्ष में ही उन्होंने पहला पदक जीता। वर्ष 2012 की अर्जुन अवार्ड विजेता एवं देश की जानी-मानी एथलीट सुधा सिंह ने एशियन गेम्स में अपने देश को मेडल दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की थी।
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एशियन गेम्स में रजत पदक हासिल करने के बाद सुधा सिंह ने सबसे पहले अपने घर पर फोन लगाया। उन्होंने अपने पिता हरिनारायण सिंह, मां शिव कुमारी सिंह, भाई प्रवेश सिंह से बातचीत करते हुए इस उपलब्धि पर खुशी जताई। परिवारीजनाें ने भी सुधा को मिली उपलब्धि पर खुशी जताते हुए बधाई दी।
भाई प्रवेश के मुताबिक सुधा ने अपनी उपलब्धि और परफार्मेंस पर खुशी जताई है। उसने कहा कि भले ही वह स्वर्ण पदक पाने से चूक गईं, फिर भी रजत पदक से वह काफी खुश है। भाई का कहना है कि जिस तरह यहां सुविधाओं का अभाव है, उसमें सुधा की अपनी मेहनत ही है कि वह निरंतर उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। एशियन गेम्स में भी पदक हासिल करने के लिए सुधा ने दिन-रात कड़ी मेहनत की थी।
सुधा की सफलता के लिए हवन पूजन
एथलीट सुधा सिंह की जीत के लिए खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने साईं हॉस्टल स्थित हनुमान मंदिर में पूजन-हवन के बाद विशेष प्रार्थना की। साईं हॉस्टल यूथ एक्टिविटी फोरम एवं जिला कबड्डी एसोसिएशन की विशेष प्रार्थना में सुधा के पिता हरिनारायण सिंह, मां शिव कुमारी सिंह, भाई प्रवेश सिंह भी शामिल हुए। पं. संतोष शास्त्री ने मंत्रोच्चार के बीच पूजा कराई।
यजमान रहे साईं के मैनेजर एसके राय ने आरती की। सुशीलचंद्र मिश्रा, स्वतंत्र पांडेय, जेबी सिंह, डॉ. हरीशचंद्र गुप्ता, अंबरीश अग्रवाल, महेश प्रताप सिंह, विनोद शुक्ला, नीलेश मिश्रा, करुणा शंकर मिश्रा, मुन्नालाल साहू, आदि ने आहुतियां अर्पित कीं। सुधा के सिल्वर मेडल जीतने की खबर मिलते ही खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने इस सफलता का जश्न मनाया। जिला एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष मुकेश बहादुर सिंह एवं सचिव लक्ष्मीकांत शुक्ला ने भी सुधा की उपलब्धि पर खुशी जताई है।
इनसेट
सांसद सोनिया गांधी ने सुधा को दी बधाई
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाली एथलीट सुधा सिंह को जकार्ता (इंडोनेशिया) में खेले जा रहे एशियन गेम्स में सफलता मिलने पर जिले की सांसद सोनिया गांधी ने बधाई दी है। सोनिया केनिजी सचिव धीरज श्रीवास्तव ने बताया कि सुधा सिंह और उनके घर वालों को सांसद ने बधाई दी है। सांसद ने आईटीआई कॉलोनी के निकट शिवाजी नगर में रहने वाली सुधा सिंह के परिवार वालों को 22 अगस्त को भी पत्र भेजकर सुधा से मेडल की उम्मीद जताई थी।
सुधा सिंह को मिलीं प्रमुख उपलब्धियां
वर्ष 2003 - शिकागो में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
वर्ष 2004 - कल्लम में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक।
वर्ष 2005 - चीन में जूनियर एशियन क्रॉस कंट्री प्रतियोगिता में चयन।
वर्ष 2007 - नेशनल गेम्स में पहला स्थान।
वर्ष 2008 - सीनियर ओपन नेशनल में पहला स्थान।
वर्ष 2009 - एशियन ट्रैक एंड फील्ड में दूसरा स्थान।
वर्ष 2010 - एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक।
वर्ष 2014 - एशियन गेम्स में कांस्य पदक।
वर्ष 2015 - रियो ओलंपिक में चयन।
वर्ष 2016 - आईएएएफ डायमंड लीग मीट में नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा।
वर्ष 2018 - एशियन गेम्स में रजत पदक।
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सुधा सिंह के मेडल पाने की खबर मिलते ही परिवार वालों के साथ ही प्रशंसकों और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। बचपन से ही खेल की शौकीन रही सुधा सिंह ने अपनी शिक्षा रायबरेली जिले से ही पूरी की। एथलेटिक्स के क्षेत्र में सुधा की शुरुआत वर्ष 2003 में लखनऊ के स्पोर्ट्स कॉलेज से हुई।
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स्टीपलचेज की खिलाड़ी सुधा सिंह ने अपनी कामयाबी के बीच किसी को भी आने नहीं दिया। यही वजह है कि 14 वर्ष में ही उन्होंने पहला पदक जीता। वर्ष 2012 की अर्जुन अवार्ड विजेता एवं देश की जानी-मानी एथलीट सुधा सिंह ने एशियन गेम्स में अपने देश को मेडल दिलाने के लिए कड़ी मेहनत की थी।
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एशियन गेम्स में रजत पदक हासिल करने के बाद सुधा सिंह ने सबसे पहले अपने घर पर फोन लगाया। उन्होंने अपने पिता हरिनारायण सिंह, मां शिव कुमारी सिंह, भाई प्रवेश सिंह से बातचीत करते हुए इस उपलब्धि पर खुशी जताई। परिवारीजनाें ने भी सुधा को मिली उपलब्धि पर खुशी जताते हुए बधाई दी।
भाई प्रवेश के मुताबिक सुधा ने अपनी उपलब्धि और परफार्मेंस पर खुशी जताई है। उसने कहा कि भले ही वह स्वर्ण पदक पाने से चूक गईं, फिर भी रजत पदक से वह काफी खुश है। भाई का कहना है कि जिस तरह यहां सुविधाओं का अभाव है, उसमें सुधा की अपनी मेहनत ही है कि वह निरंतर उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। एशियन गेम्स में भी पदक हासिल करने के लिए सुधा ने दिन-रात कड़ी मेहनत की थी।
सुधा की सफलता के लिए हवन पूजन
एथलीट सुधा सिंह की जीत के लिए खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने साईं हॉस्टल स्थित हनुमान मंदिर में पूजन-हवन के बाद विशेष प्रार्थना की। साईं हॉस्टल यूथ एक्टिविटी फोरम एवं जिला कबड्डी एसोसिएशन की विशेष प्रार्थना में सुधा के पिता हरिनारायण सिंह, मां शिव कुमारी सिंह, भाई प्रवेश सिंह भी शामिल हुए। पं. संतोष शास्त्री ने मंत्रोच्चार के बीच पूजा कराई।
यजमान रहे साईं के मैनेजर एसके राय ने आरती की। सुशीलचंद्र मिश्रा, स्वतंत्र पांडेय, जेबी सिंह, डॉ. हरीशचंद्र गुप्ता, अंबरीश अग्रवाल, महेश प्रताप सिंह, विनोद शुक्ला, नीलेश मिश्रा, करुणा शंकर मिश्रा, मुन्नालाल साहू, आदि ने आहुतियां अर्पित कीं। सुधा के सिल्वर मेडल जीतने की खबर मिलते ही खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने इस सफलता का जश्न मनाया। जिला एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष मुकेश बहादुर सिंह एवं सचिव लक्ष्मीकांत शुक्ला ने भी सुधा की उपलब्धि पर खुशी जताई है।
इनसेट
सांसद सोनिया गांधी ने सुधा को दी बधाई
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाली एथलीट सुधा सिंह को जकार्ता (इंडोनेशिया) में खेले जा रहे एशियन गेम्स में सफलता मिलने पर जिले की सांसद सोनिया गांधी ने बधाई दी है। सोनिया केनिजी सचिव धीरज श्रीवास्तव ने बताया कि सुधा सिंह और उनके घर वालों को सांसद ने बधाई दी है। सांसद ने आईटीआई कॉलोनी के निकट शिवाजी नगर में रहने वाली सुधा सिंह के परिवार वालों को 22 अगस्त को भी पत्र भेजकर सुधा से मेडल की उम्मीद जताई थी।
सुधा सिंह को मिलीं प्रमुख उपलब्धियां
वर्ष 2003 - शिकागो में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
वर्ष 2004 - कल्लम में जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक।
वर्ष 2005 - चीन में जूनियर एशियन क्रॉस कंट्री प्रतियोगिता में चयन।
वर्ष 2007 - नेशनल गेम्स में पहला स्थान।
वर्ष 2008 - सीनियर ओपन नेशनल में पहला स्थान।
वर्ष 2009 - एशियन ट्रैक एंड फील्ड में दूसरा स्थान।
वर्ष 2010 - एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक।
वर्ष 2014 - एशियन गेम्स में कांस्य पदक।
वर्ष 2015 - रियो ओलंपिक में चयन।
वर्ष 2016 - आईएएएफ डायमंड लीग मीट में नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा।
वर्ष 2018 - एशियन गेम्स में रजत पदक।