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जिले की विद्युत उपलब्धता में कटौती से हाहाकार
Updated Thu, 20 Jul 2017 12:19 AM IST
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मांग 170 की, मिल रही मात्र 60 मेगावाट ही बिजली
रायबरेली। जिले की विद्युत उपलब्धता में कटौती कर दी गई है। मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिलने से पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता परेशान हैं। जिले को लगभग 170 मेगावाट बिजली की जरूरत है, लेकिन मौजूदा समय में 60 मेगावाट ही बिजली मिल पा रही है। इससे शहर में भी घंटों बिजली कटौती हो रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों का और भी हाल बेहाल है। बमुश्किल चार से पांच घंटे ही बिजली मिल रही है। इसके चलते लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। किसानों को धान की रोपाई के लिए बिजली की सख्त जरूरत है, लेकिन उन्हें भी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार केंद्र सरकार की जल विद्युत परियोजनाओं नाफ्था, झाकरी, करछम वाग्च्यू आदि में 18 जुलाई को सिल्ट आ जाने के कारण प्रदेश को 500 मेगावाट बिजली मिलना बंद होने के अलावा पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन की चंपा कुरुक्षेत्र लाइन के ट्रिप करने से करीब 1200 मेगावाट की बिजली कटौती शुरू हो गई। इसका असर जिले में भी दिखने लगा है। इसी के चलते संकट खड़ा हुआ है और मांग 170 मेगावाट के सापेक्ष कुल 60 से 70 मेगावाट ही बिजली मिल रही है।
ग्रामीण फीडरों को एक साथ चलाने से खड़े किए हाथ
रायबरेली। मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिलने से पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं ने ग्रामीण क्षेत्र के सभी फीडरों को एक साथ बिजली आपूर्ति करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि इस समय मांग अधिक होने के चलते ग्रामीण क्षेत्र के सभी फीडर ओवरलोड हैं और सभी को एक साथ बिजली आपूर्ति करने के निर्देश हैं। ऐसे में पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से सभी फीडरों को चलाने से समस्या आ रही है। इससे जहां उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज मिल रहा है, वहीं ट्रांसफार्मर और किसानों की मोटरें भी फुंक रही है। इस बाबत पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं ने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर सभी 33 केवीए उपकेंद्रों को 24 घंटे बिजली दिए जाने का अनुरोध किया है। साथ दो चरणों में ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति करने की बात कही है।
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सूख रहीं फसलें, माथे पर चिंता की लकीरें
रायबरेली। शिवगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार बिजली की अघोषित और लो-वोल्टेज की समस्या से किसानों की धान की फसल सूख रही है। किसान शिवली निवासी शिवमूर्ति सिंह का कहना है कि जब धान के लिए पानी लगाना हो तो बिजली गुल हो जाती है। गोविंदपुर पूर्व प्रधान राजकुमार सिंह का कहना है कि कहने को 18 घंटे बिजली देनेे का निर्देश है। लेकिन मिलती है 8 घंटे भी नहीं। उसमें भी 20 बार ट्रिपिंग। जानकी शरण जायसवाल व राजन सिंह का कहना है कि खेतों में दिनभर काम करने के बाद रात में जब थके हारे बिस्तर पर जाओ तो इस तरह की भीषण गर्मी में रात भर मच्छर सोने नहीं देते। अमावां प्रतिनिधि के मुताबिक ब्लॉक क्षेत्र में रोपित की गई धान की फसल बिजली के अभाव में पानी न मिलने से सूख रही है। किसान शिव प्रसाद मौर्या का कहना है कि आपूर्ति के नाम पर मजाक किया जाता है। विजय चंद्र सिंह का कहना है कि मात्र 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश नहीं हुई तो फसल सूख जाएगी। बछरावां प्रतिनिधि के अनुसार ब्लॉक क्षेत्र में बिजली की किल्लत से लोग परेशान है। एडवोकेट अंशुल चतुर्वेदी कहते हैं कि क्षेत्र में बिजली आने और जाने का कोई समय निर्धारित नहीं। व्यवसायी पंकज भदौरिया व सभासद वीरभान सिंह ने कहा कि बिजली सप्लाई को लेकर बछरावां के साथ प्रदेश सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। हरीश चौरसिया, जयकरण पाल, सुधीर मिश्रा आदि ने मुख्यमंत्री से क्षेत्र में निर्बाध विद्युत सप्लाई की मांग की है। हरचंदपुर प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में बेपटरी हुई विद्युत से आपूर्ति कस्बे से लेकर गांव तक उपभोक्ताओं में आक्रोश है। व्यापार मंडल मिश्रा गुट के नगर अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि इस समय बिजली आपूर्ति व्यवस्था बेपटरी हो गई है। रात-दिन मिलाकर छह से सात घंटे ही बिजली मिल रही है। किसान अजय सिंह ने बताया कि इधर एक हफ्ते से बारिश ना होने से पानी का अभाव है। बिजली ना मिलने से ज्यादातर किसान धान की रोपाई नहीं करा पा रहे हैं।
कमी के चलते मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिल रही है। इस वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती हो रही है। जैसे ही बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। बारिश न होने के चलते बिजली की मांग अधिक है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को दो चरणों में बिजली की आपूर्ति किए जाने का भी अनुरोध उच्चाधिकारियों से किया गया है।-पंकज कुमार, अधीक्षण अभियंता पावर कॉर्पोरेशन
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रायबरेली। जिले की विद्युत उपलब्धता में कटौती कर दी गई है। मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिलने से पावर कॉर्पोरेशन के अभियंता परेशान हैं। जिले को लगभग 170 मेगावाट बिजली की जरूरत है, लेकिन मौजूदा समय में 60 मेगावाट ही बिजली मिल पा रही है। इससे शहर में भी घंटों बिजली कटौती हो रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों का और भी हाल बेहाल है। बमुश्किल चार से पांच घंटे ही बिजली मिल रही है। इसके चलते लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। किसानों को धान की रोपाई के लिए बिजली की सख्त जरूरत है, लेकिन उन्हें भी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार केंद्र सरकार की जल विद्युत परियोजनाओं नाफ्था, झाकरी, करछम वाग्च्यू आदि में 18 जुलाई को सिल्ट आ जाने के कारण प्रदेश को 500 मेगावाट बिजली मिलना बंद होने के अलावा पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन की चंपा कुरुक्षेत्र लाइन के ट्रिप करने से करीब 1200 मेगावाट की बिजली कटौती शुरू हो गई। इसका असर जिले में भी दिखने लगा है। इसी के चलते संकट खड़ा हुआ है और मांग 170 मेगावाट के सापेक्ष कुल 60 से 70 मेगावाट ही बिजली मिल रही है।
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ग्रामीण फीडरों को एक साथ चलाने से खड़े किए हाथ
रायबरेली। मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिलने से पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं ने ग्रामीण क्षेत्र के सभी फीडरों को एक साथ बिजली आपूर्ति करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि इस समय मांग अधिक होने के चलते ग्रामीण क्षेत्र के सभी फीडर ओवरलोड हैं और सभी को एक साथ बिजली आपूर्ति करने के निर्देश हैं। ऐसे में पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से सभी फीडरों को चलाने से समस्या आ रही है। इससे जहां उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज मिल रहा है, वहीं ट्रांसफार्मर और किसानों की मोटरें भी फुंक रही है। इस बाबत पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं ने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर सभी 33 केवीए उपकेंद्रों को 24 घंटे बिजली दिए जाने का अनुरोध किया है। साथ दो चरणों में ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति करने की बात कही है।
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सूख रहीं फसलें, माथे पर चिंता की लकीरें
रायबरेली। शिवगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार बिजली की अघोषित और लो-वोल्टेज की समस्या से किसानों की धान की फसल सूख रही है। किसान शिवली निवासी शिवमूर्ति सिंह का कहना है कि जब धान के लिए पानी लगाना हो तो बिजली गुल हो जाती है। गोविंदपुर पूर्व प्रधान राजकुमार सिंह का कहना है कि कहने को 18 घंटे बिजली देनेे का निर्देश है। लेकिन मिलती है 8 घंटे भी नहीं। उसमें भी 20 बार ट्रिपिंग। जानकी शरण जायसवाल व राजन सिंह का कहना है कि खेतों में दिनभर काम करने के बाद रात में जब थके हारे बिस्तर पर जाओ तो इस तरह की भीषण गर्मी में रात भर मच्छर सोने नहीं देते। अमावां प्रतिनिधि के मुताबिक ब्लॉक क्षेत्र में रोपित की गई धान की फसल बिजली के अभाव में पानी न मिलने से सूख रही है। किसान शिव प्रसाद मौर्या का कहना है कि आपूर्ति के नाम पर मजाक किया जाता है। विजय चंद्र सिंह का कहना है कि मात्र 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश नहीं हुई तो फसल सूख जाएगी। बछरावां प्रतिनिधि के अनुसार ब्लॉक क्षेत्र में बिजली की किल्लत से लोग परेशान है। एडवोकेट अंशुल चतुर्वेदी कहते हैं कि क्षेत्र में बिजली आने और जाने का कोई समय निर्धारित नहीं। व्यवसायी पंकज भदौरिया व सभासद वीरभान सिंह ने कहा कि बिजली सप्लाई को लेकर बछरावां के साथ प्रदेश सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। हरीश चौरसिया, जयकरण पाल, सुधीर मिश्रा आदि ने मुख्यमंत्री से क्षेत्र में निर्बाध विद्युत सप्लाई की मांग की है। हरचंदपुर प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में बेपटरी हुई विद्युत से आपूर्ति कस्बे से लेकर गांव तक उपभोक्ताओं में आक्रोश है। व्यापार मंडल मिश्रा गुट के नगर अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि इस समय बिजली आपूर्ति व्यवस्था बेपटरी हो गई है। रात-दिन मिलाकर छह से सात घंटे ही बिजली मिल रही है। किसान अजय सिंह ने बताया कि इधर एक हफ्ते से बारिश ना होने से पानी का अभाव है। बिजली ना मिलने से ज्यादातर किसान धान की रोपाई नहीं करा पा रहे हैं।
कमी के चलते मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिल रही है। इस वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित कटौती हो रही है। जैसे ही बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। बारिश न होने के चलते बिजली की मांग अधिक है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को दो चरणों में बिजली की आपूर्ति किए जाने का भी अनुरोध उच्चाधिकारियों से किया गया है।-पंकज कुमार, अधीक्षण अभियंता पावर कॉर्पोरेशन