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जौनपुर ब्रांच से रोका गया पानी
Updated Thu, 21 Dec 2017 01:34 AM IST
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जौनपुर ब्रांच से रोका गया पानी
डीह (रायबरेली)। जिले में फसलों की सिंचाई की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। न ही भरपूर बिजली मिल रही है और न नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। डीह रजबहे में 15 दिन पानी छोड़ा गया। इस रजबहे से जुड़ी माइनरों में पानी पहुंचता, तब तक रजबहे की पानी की आपूर्ति ठप कर दी गई। इससे करीब 60 हजार बीघे क्षेत्रफल में बोई गेहूं की फसल पानी के अभाव में सूख रही है। सिंचाई विभाग के अफसर ऊपर से पानी की आपूर्ति बंद कर दिए जाने का राग अलाप रहे हैं।
भरपूर बिजली नहीं मिलने से किसानों के ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। सिंचाई खंड 45 के अंतर्गत आने वाले डीह रजबहे में एक पखवारे पानी छोड़ा गया। रजबहे की छमता 700 क्यूसेक है, जबकि पानी 300 क्यूसेक ही छोड़ा गया। रजबहे का पानी माइनरों तक पहुंच पाता, तब तक रजबहे की आपूर्ति बंद कर दी। डीह रजबहे से 72 माइनरें निकली है। इन माइनरों से 60 हजार बीघे खेती की सिंचाई होती है। पानी नहीं आने से किसान गेहूं की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। पानी के अभाव में फसल सूख रही है।
रजबहे ही तक सीमित रहा पानी
रजबहे में छोड़ा गया पानी माइनरों तक नहीं पहुंचा। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि प्रत्येक माइनर रजबहे से ऊंची है। इस वजह से माइनर में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ज्यादातर माइनरें सिल्ट और झाड़ियों से पटी है। सुनील कुमार, संतोष कुमार, इदरीस, रामजी शुक्ला किसानों ने बताया कि 30 से 35 दिन पहले बोई गई गेहूं की फसल को पानी की बहुत आवश्यकता है। 22 से 25 दिन के अंदर हर हाल में गेहूं की पहली सिंचाई हो जानी चाहिए, लेकिन 35 दिन बाद भी सिंचाई नहीं हो सकी है। समय से पानी नहीं मिला तो इससे गेहूं का उत्पादन कम हो जाएगा।
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उच्चाधिकारियों को दी जानकारी
सिंचाई खंड 45 के अधिशासी अभियंता हरेंद्र सिंह ने बताया कि डीह रजबहे की क्षमता 700 क्यूसेक की है, लेकिन 300 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। अब फिर पानी की आपूर्ति रोक दी गई है। इस संबंध में डीएम के अलावा उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। इस समय पानी की मांग अधिक है। पूरी क्षमता से नहर में पानी छोड़े जाने की जरूरत है।
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डीह (रायबरेली)। जिले में फसलों की सिंचाई की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। न ही भरपूर बिजली मिल रही है और न नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। डीह रजबहे में 15 दिन पानी छोड़ा गया। इस रजबहे से जुड़ी माइनरों में पानी पहुंचता, तब तक रजबहे की पानी की आपूर्ति ठप कर दी गई। इससे करीब 60 हजार बीघे क्षेत्रफल में बोई गेहूं की फसल पानी के अभाव में सूख रही है। सिंचाई विभाग के अफसर ऊपर से पानी की आपूर्ति बंद कर दिए जाने का राग अलाप रहे हैं।
भरपूर बिजली नहीं मिलने से किसानों के ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। सिंचाई खंड 45 के अंतर्गत आने वाले डीह रजबहे में एक पखवारे पानी छोड़ा गया। रजबहे की छमता 700 क्यूसेक है, जबकि पानी 300 क्यूसेक ही छोड़ा गया। रजबहे का पानी माइनरों तक पहुंच पाता, तब तक रजबहे की आपूर्ति बंद कर दी। डीह रजबहे से 72 माइनरें निकली है। इन माइनरों से 60 हजार बीघे खेती की सिंचाई होती है। पानी नहीं आने से किसान गेहूं की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। पानी के अभाव में फसल सूख रही है।
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रजबहे ही तक सीमित रहा पानी
रजबहे में छोड़ा गया पानी माइनरों तक नहीं पहुंचा। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि प्रत्येक माइनर रजबहे से ऊंची है। इस वजह से माइनर में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ज्यादातर माइनरें सिल्ट और झाड़ियों से पटी है। सुनील कुमार, संतोष कुमार, इदरीस, रामजी शुक्ला किसानों ने बताया कि 30 से 35 दिन पहले बोई गई गेहूं की फसल को पानी की बहुत आवश्यकता है। 22 से 25 दिन के अंदर हर हाल में गेहूं की पहली सिंचाई हो जानी चाहिए, लेकिन 35 दिन बाद भी सिंचाई नहीं हो सकी है। समय से पानी नहीं मिला तो इससे गेहूं का उत्पादन कम हो जाएगा।
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उच्चाधिकारियों को दी जानकारी
सिंचाई खंड 45 के अधिशासी अभियंता हरेंद्र सिंह ने बताया कि डीह रजबहे की क्षमता 700 क्यूसेक की है, लेकिन 300 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। अब फिर पानी की आपूर्ति रोक दी गई है। इस संबंध में डीएम के अलावा उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। इस समय पानी की मांग अधिक है। पूरी क्षमता से नहर में पानी छोड़े जाने की जरूरत है।