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जहरीला फल खाने से पांच बच्चे बीमार
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डलमऊ (रायबरेली)। जंगल में लकड़ी तोड़ने गए भुरुकुसापुर मजरे जलालपुर धई गांव के पांच बच्चों की जंगली जहरीला फल खाने से हालत बिगड़ गई। बच्चों की हालत बिगड़ने पर उन्हें सीएचसी डलमऊ लाया गया। यहां इलाज के बाद बच्चों की सेहत में सुधार है।
डलमऊ के ग्राम भुरुकुसापुर मजरे जलालपुर धई गांव निवासी कोमल (10) पुत्री होरीलाल, पवन कुमार (8) पुत्र महेश, कामनी (8) पुत्री श्यामलाल, सूरज (5) पुत्र महेश, सपना (11) पुत्री महेश मंगलवार सुबह जंगल में लकड़ियां तोड़ने गए थे।
लकड़ियां काटते समय बच्चों ने जंगल में कोई जहरीला फल खा लिया। जिसकी वजह से उक्त बालकों की एक-एक कर हालत बिगड़ने लगी। परिवारीजन जब तक कुछ समझ पाते, तब तक बच्चे अचेत हो गए।
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घबराए परिवारीजनों द्वारा पहले तो स्थानीय चिकित्सकों को दिखाया गया, लेकिन सेहत में सुधार न आने पर बच्चों को सीएचसी डलमऊ पहुंचाया।
सीएचसी में बच्चों का इलाज जारी है। कोमल, सपना, सूरज की हालत नाजुक बनी है। सीएचसी में बच्चों का इलाज कर रहे डॉ. प्रदीप गुप्ता का कहना है कि बच्चों ने कोई जहरीला फल खाया है। बच्चों का इलाज किया जा रहा है। हालत न सुधरने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा।
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डलमऊ के ग्राम भुरुकुसापुर मजरे जलालपुर धई गांव निवासी कोमल (10) पुत्री होरीलाल, पवन कुमार (8) पुत्र महेश, कामनी (8) पुत्री श्यामलाल, सूरज (5) पुत्र महेश, सपना (11) पुत्री महेश मंगलवार सुबह जंगल में लकड़ियां तोड़ने गए थे।
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लकड़ियां काटते समय बच्चों ने जंगल में कोई जहरीला फल खा लिया। जिसकी वजह से उक्त बालकों की एक-एक कर हालत बिगड़ने लगी। परिवारीजन जब तक कुछ समझ पाते, तब तक बच्चे अचेत हो गए।
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घबराए परिवारीजनों द्वारा पहले तो स्थानीय चिकित्सकों को दिखाया गया, लेकिन सेहत में सुधार न आने पर बच्चों को सीएचसी डलमऊ पहुंचाया।
सीएचसी में बच्चों का इलाज जारी है। कोमल, सपना, सूरज की हालत नाजुक बनी है। सीएचसी में बच्चों का इलाज कर रहे डॉ. प्रदीप गुप्ता का कहना है कि बच्चों ने कोई जहरीला फल खाया है। बच्चों का इलाज किया जा रहा है। हालत न सुधरने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा।