फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   जिले के कस्तूरबा बालिका आावासीय विद्यालय की हालत पतली

जिले के कस्तूरबा बालिका आावासीय विद्यालय की हालत पतली

Tue, 25 Jul 2017 01:30 AM IST
Updated Tue, 25 Jul 2017 01:30 AM IST
विज्ञापन
जिले के कस्तूरबा बालिका आावासीय विद्यालय की हालत पतली
जान हथेली पर रखकर शिक्षा ग्रहण कर रही 1400 बच्चियां
विज्ञापन


सीन एक : 100 बालिकाओं को किसी तरह मिलता भोजन
जगतपुर। कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय जगतपुर में मौजूूदा समय में 100 बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। वैसे तो इस स्कूल की बिल्डिंग ठीक है, लेकिन खिड़कियों के शीशे टूट गए हैं, जो सुरक्षा में चूक साबित हो सकते हैं। इसके अलावा जरूरत के हिसाब से स्कूल में राशन नहीं मिल पा रहा है। किसी तरह बालिकाओं को भोजन दिया जा रहा है। वॉर्डन कुसुमा देवी कहती हैं कि यहां पर राशन कम मिल पाता है। यही दिक्कत है। मेन्यू के तहत भोजन दिया जा रहा है। खिड़कियां जल्द सही कराई जाएंगी। हम लोगों को समय से सैलरी नहीं मिल पाती।

सीन दो : बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा विद्यालय
बछरावां। ब्लॉक क्षेत्र के गोझवामनाखेड़ा गांव स्थित कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है। स्कूल में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। परिसर में पानी भरा रहता है। काफी दिनों से आरओ सिस्टम भी गड़बड़ है। गीजर काम नहीं करता। बालिकाओं को खेलने के लिए ग्राउंड नहीं है। जहां पर बालिकाएं रहती हैं, वह कमरे जर्जर हैं। बारिश में पानी टपकता रहता है। बच्चे बीमार हो जाएं तो चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए कोई साधन नही है। वॉर्डेन राधा सोनकर कहती हैं कि 88 बालिकाओं को अव्यवस्था से जूझना पड़ रहा है। मेन्यू के तहत भोजन दिया जाता है।
विज्ञापन


सीन तीन : 92 बालिकाओं के लिए मात्र 10 तख्त
डलमऊ। कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालय चंद्रभूषणगंज घुरवारा की स्थिति भी ठीक नहीं है। यहां पर 92 बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं, जिन्हें अव्यवस्था से दो-चार होना पड़ रहा है। यहां पर सोने के लिए महज 10 तख्त हैं। चारपाई नहीं है। इससे बालिकाओं को जमीन पर रात के वक्त लेटना पड़ता है। आवास जर्जर है। आवासीय परिसर में पानी भरा रहता है। वॉर्डेन गीता यादव कहती हैं कि समस्याओं के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रायबरेली। ये सीन साफ बयां कर रहे हैं कि यहां के 16 कस्तूरबा बालिका आवासीय विद्यालयों की हालत पतली है। जान हथेली पर रखकर 1400 बालिकाएं शिक्षा का ताना-बाना बुन रही हैं। कमोवेश सभी स्कूल जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं, जो बारिश में टपकते हैं। अब तक पुरानी किताबें व ड्रेस ही बालिकाओं को उपलब्ध कराई गई हैं। कई ऐसे स्कूल हैं, जहां पर सोने तक के लिए पर्याप्त चारपाई तक की व्यवस्था नहीं है। राशन कम दिया जा रहा है। मेन्यू के तहत भोजन देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत और कुछ कर रही बयां कर रही हैं। जो मीनू बनाया गया है, नहीं लगता है कि उस तरह भोजन मिल पाता हो।
वैसे तो इन स्कूलों में भोजन के लिए राशन कोटे की दुकानों से मिल जाता है, लेकिन दूध, फल, सिलेंडर, सब्जी खरीदने के लिए नकद धन की जरूरत होती है। इसके लिए विभाग की तरफ से एडवांस के तौर पर 25 हजार रुपये दिए जाते हैं, लेकिन खर्च करीब 50 हजार रुपये आता है। वॉर्डेन को एडवांस के तौर पर मिलने वाली धनराशि नहीं मिल पा रही है। नतीजतन उन्हें ये खरीदारी उधार में करनी पड़ रही है।

समय से नहीं मिल पाता वेतन
जिले में संचालित 16 स्कूलों में वॉर्डेनों को मिलाकर करीब 250 स्टाफ की तैनाती है। स्टाफ का दर्द है कि उन्हें समय से वेतन नहीं मिल पाता है। इससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बावजूद कार्रवाई के डर के चलते वह अपना मुंह नहीं खोल पाते हैं।


कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। मेन्यू के तहत ही भोजन दिया जाता है। स्कूलों में जो समस्याएं हैं, जल्द उन्हें दूर कराया जाएगा। स्कूलों की मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।- संजय कुमार शुक्ला, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed