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फलों के राजा आम पर मौसम मेहरबान, बागवानों के चेहरे पर छाई मुस्कान
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फलों के राजा आम पर मौसम मेहरबान है। फलपट्टी इलाके में बागों में इस बार पेड़ फलक से लदे हुए हैं। इससे बागवान उत्साहित हैं। फलक से लदे पेड़ देख उन्हें बेहतर पैदावार की उम्मीद है। बागवानों का कहना है कि ऐसे ही मौसम का साथ मिलता रहा तो इस बार आम से अच्छी कमाई होगी। उद्यान विभाग का भी दावा है कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार पैदावार अच्छी होगी।
जनपद में कालाकांकर, कुंडा इलाके में फलपट्टी क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में आम के बाग हैं। उद्यान विभाग के मुताबिक, जिले में पांच हजार प्लस हेक्टेयर आम के बाग हैं। छोटे-बड़े मिलाकर कुल पांच हजार बाग मालिक हैं। सबसे ज्यादा कुंडा, कालाकांकर में 400 से अधिक बाग मालिक हैं। इनकी कमाई आम की पैदावार पर ही निर्भर है। यहां पैदा होने वाले आम की पहचान देश-विदेश तक है। कनाडा, पाकिस्तान, अफगानिस्तान में दशहरी व लंगड़ा आम खूब पसंद किया जाता है।
आम यहां के व्यापारियों का प्रमुख व्यवसाय है। पिछले चार-पांच वर्षों से मौसम खराब होने से आम की फलक को भारी नुकसान हुआ है। इससे बागवानों को तगड़ा झटका लग चुका है, मगर इस बार आम की फसल को मौसम का साथ मिला है। आम के पेड़ों पर बौर लगने के दौरान बारिश नहीं हुई। इससे बौर नष्ट नहीं हुए। अब आम में फलक लगने लगे हैं। बागवान बागों में फलक बचाने के लिए दवाइयों को इस्तेमाल कर रहे है।
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धनगढ़ के रहने वाले बागवान विश्वजीत प्रताप सिंह, बुलाकीपुर के मदनलाल मौर्या का कहना है कि इस बार आम को मौसम का साथ मिला है, यही स्थिति रही तो अच्छी कमाई होगी। आम के फलों के लिए स्टोरेज की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए विभाग को पहल करनी होगी। जिला उद्यान अधिकारी सीमा सिंह राणा ने बताया कि आम के पेड़ों में फल आ रहे हैं। इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद है।
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जनपद में कालाकांकर, कुंडा इलाके में फलपट्टी क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में आम के बाग हैं। उद्यान विभाग के मुताबिक, जिले में पांच हजार प्लस हेक्टेयर आम के बाग हैं। छोटे-बड़े मिलाकर कुल पांच हजार बाग मालिक हैं। सबसे ज्यादा कुंडा, कालाकांकर में 400 से अधिक बाग मालिक हैं। इनकी कमाई आम की पैदावार पर ही निर्भर है। यहां पैदा होने वाले आम की पहचान देश-विदेश तक है। कनाडा, पाकिस्तान, अफगानिस्तान में दशहरी व लंगड़ा आम खूब पसंद किया जाता है।
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आम यहां के व्यापारियों का प्रमुख व्यवसाय है। पिछले चार-पांच वर्षों से मौसम खराब होने से आम की फलक को भारी नुकसान हुआ है। इससे बागवानों को तगड़ा झटका लग चुका है, मगर इस बार आम की फसल को मौसम का साथ मिला है। आम के पेड़ों पर बौर लगने के दौरान बारिश नहीं हुई। इससे बौर नष्ट नहीं हुए। अब आम में फलक लगने लगे हैं। बागवान बागों में फलक बचाने के लिए दवाइयों को इस्तेमाल कर रहे है।
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धनगढ़ के रहने वाले बागवान विश्वजीत प्रताप सिंह, बुलाकीपुर के मदनलाल मौर्या का कहना है कि इस बार आम को मौसम का साथ मिला है, यही स्थिति रही तो अच्छी कमाई होगी। आम के फलों के लिए स्टोरेज की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए विभाग को पहल करनी होगी। जिला उद्यान अधिकारी सीमा सिंह राणा ने बताया कि आम के पेड़ों में फल आ रहे हैं। इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद है।