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गिराए जाएंगे जिला अस्पताल के जर्जर भवन
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जिला अस्पताल में मेडिकल कालेज बनाने को गिराये जायेगें पुराने भवन।
- फोटो : PRATAPGARH
जिला अस्पताल के डॉक्टरों के साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारियों की परेशानी बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए अस्पताल परिसर में बने चिकित्सकों के साथ ही कर्मचारियों के आवास को जेसीबी से ढहा दिया जाएगा। इसके चलते डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी किराए पर कमरा खोज रहे हैं। मगर अस्पताल के करीब में कहीं पर कमरा नहीं मिल रहा है।
जिला अस्पताल परिसर में सीएमएस डॉक्टर पीपी पांडेय, डॉक्टर अनिल गुप्ता, डॉक्टर विवेक त्रिपाठी, डॉक्टर अनुज चौरसिया सहित सात डॉक्टर जहां सरकारी आवास में रहते हैं, वहीं फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और वार्डब्याय के साथ स्वीप को मिलाकर 32 स्वास्थ्य कर्मचारी सरकारी आवास में रहते हैं। जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने का दौर शुरू हो गया है। पुराने भवन को तोड़कर गिराए जाने के लिए गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से टेंडर भी हो गया।
शनिवार से जर्जर आवासों के साथ सरकारी कार्यालयों के भवनों को तोड़कर गिराया जाएगा। इसको लेकर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारी परेशान हैं। अस्पताल के नजदीक में रहने के लिए चिकित्सक और कर्मचारी किराए पर कमरा खोज रहे हैं। मगर आसपास खोजे किराए पर कमरा नहीं मिल रहा है। राजापाल टंकी, सदर मोड़ और अजीत नगर क्षेत्र में किराए पर जो भी कमरा भी मिल रहा है, उसका दाम आसमान छू रहा है। चार से पांच हजार रुपये में बिजली सहित कमरा मिल रहा है। इससे चिकित्सक और कर्मचारी परेशान हैं।
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जिला अस्पताल के चिकित्सकों के साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारी सरकारी आवास खाली करने में व्यस्त हैं। वहीं दूरदराज से इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज परेशान हो रहे हैं। चिकित्सक जहां उन्हें नहीं मिल रहे हैं, वहीं वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी भी ड्यूटी छोड़कर गायब हैं।
जर्जर भवन ढहाने और मलबा हटाने का टेंडर हो रहा है। सभी कर्मचारियों को पहले से ही आवास खाली करने के लिए कहा जा चुका है। अब किसी को कहा नहीं जाएगा। जेसीबी से भवन को तोड़वा दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सरकारी आवास में रहने वाल कर्मचारियों की होगी।
डॉक्टर पीपी पांडेय, सीएमएस जिला अस्पताल।
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जिला अस्पताल परिसर में सीएमएस डॉक्टर पीपी पांडेय, डॉक्टर अनिल गुप्ता, डॉक्टर विवेक त्रिपाठी, डॉक्टर अनुज चौरसिया सहित सात डॉक्टर जहां सरकारी आवास में रहते हैं, वहीं फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और वार्डब्याय के साथ स्वीप को मिलाकर 32 स्वास्थ्य कर्मचारी सरकारी आवास में रहते हैं। जिला अस्पताल को उच्चीकृत कर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने का दौर शुरू हो गया है। पुराने भवन को तोड़कर गिराए जाने के लिए गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से टेंडर भी हो गया।
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शनिवार से जर्जर आवासों के साथ सरकारी कार्यालयों के भवनों को तोड़कर गिराया जाएगा। इसको लेकर चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारी परेशान हैं। अस्पताल के नजदीक में रहने के लिए चिकित्सक और कर्मचारी किराए पर कमरा खोज रहे हैं। मगर आसपास खोजे किराए पर कमरा नहीं मिल रहा है। राजापाल टंकी, सदर मोड़ और अजीत नगर क्षेत्र में किराए पर जो भी कमरा भी मिल रहा है, उसका दाम आसमान छू रहा है। चार से पांच हजार रुपये में बिजली सहित कमरा मिल रहा है। इससे चिकित्सक और कर्मचारी परेशान हैं।
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जिला अस्पताल के चिकित्सकों के साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारी सरकारी आवास खाली करने में व्यस्त हैं। वहीं दूरदराज से इलाज कराने के लिए आने वाले मरीज परेशान हो रहे हैं। चिकित्सक जहां उन्हें नहीं मिल रहे हैं, वहीं वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी भी ड्यूटी छोड़कर गायब हैं।
जर्जर भवन ढहाने और मलबा हटाने का टेंडर हो रहा है। सभी कर्मचारियों को पहले से ही आवास खाली करने के लिए कहा जा चुका है। अब किसी को कहा नहीं जाएगा। जेसीबी से भवन को तोड़वा दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सरकारी आवास में रहने वाल कर्मचारियों की होगी।
डॉक्टर पीपी पांडेय, सीएमएस जिला अस्पताल।