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Pratapgarh News: राज्यपाल ने कुलपति के आदेश को किया निरस्त, ऊषा बनीं विभागाध्यक्ष
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एमडीपीजी में बीएड विभागाध्यक्ष बनने को लेकर चल रहा विरोध आखिरकार राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के आदेश पर समाप्त हो गया। राज्यपाल (कुलाधिपति) ने प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश सिंह के आदेश को निरस्त कर दिया।
वरिष्ठता के आधार पर प्रो. ऊषा दूबे फिर से विभागाध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन हो गईं। बीएड विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रो. मायाशंकर विगत कई वर्षों से संभाल रहे थे। करीब दो साल पहले प्रो. ऊषा दूबे ने वरिष्ठता के आधार पर विभागाध्यक्ष बनने की दावेदारी प्रस्तुत की। तत्कालीन प्राचार्य प्रो. अरविंद मिश्र ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नियमों का हवाला देते हुए प्रो. ऊषा दूबे को वरिष्ठता के आधार पर विभागाध्यक्ष नियुक्त कर दिया।
प्रो. माया शंकर ने प्राचार्य के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट के निर्देश पर आदेश के खिलाफ कुलपति कार्यालय में चुनौती दी। कुलपति प्रो. अखिलेश सिंह ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्राचार्य के आदेश को निरस्त कर दिया। फिर से मायाशंकर को विभागाध्यक्ष की कुर्सी मिल गई। कुलपति के आदेश को प्रो. ऊषा दूबे कुलाधिपति कार्यालय लेकर पहुंचीं।
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कुलाधिपति ने कुलपति के आदेश को निरस्त करते हुए वरिष्ठता के आधार पर प्रो. ऊषा दूबे के पक्ष मेें फैसला सुनाया। नया आदेश आने के बाद प्रो. ऊषा दूबे ने बुधवार को विभागाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर प्रो. शैलेंद्र मिश्र, चीफ प्रॉक्टर प्रो.राधाकृष्ण दूबे, प्रो. अरविंद मौर्य, . निशा सिंह, प्रो. किरण मिश्रा, प्रो. रमेश चंद्र शुक्ल, डॉ. शैलेश पांडेय मौजूद रहे।
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वरिष्ठता के आधार पर प्रो. ऊषा दूबे फिर से विभागाध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन हो गईं। बीएड विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रो. मायाशंकर विगत कई वर्षों से संभाल रहे थे। करीब दो साल पहले प्रो. ऊषा दूबे ने वरिष्ठता के आधार पर विभागाध्यक्ष बनने की दावेदारी प्रस्तुत की। तत्कालीन प्राचार्य प्रो. अरविंद मिश्र ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नियमों का हवाला देते हुए प्रो. ऊषा दूबे को वरिष्ठता के आधार पर विभागाध्यक्ष नियुक्त कर दिया।
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प्रो. माया शंकर ने प्राचार्य के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट के निर्देश पर आदेश के खिलाफ कुलपति कार्यालय में चुनौती दी। कुलपति प्रो. अखिलेश सिंह ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्राचार्य के आदेश को निरस्त कर दिया। फिर से मायाशंकर को विभागाध्यक्ष की कुर्सी मिल गई। कुलपति के आदेश को प्रो. ऊषा दूबे कुलाधिपति कार्यालय लेकर पहुंचीं।
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कुलाधिपति ने कुलपति के आदेश को निरस्त करते हुए वरिष्ठता के आधार पर प्रो. ऊषा दूबे के पक्ष मेें फैसला सुनाया। नया आदेश आने के बाद प्रो. ऊषा दूबे ने बुधवार को विभागाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर प्रो. शैलेंद्र मिश्र, चीफ प्रॉक्टर प्रो.राधाकृष्ण दूबे, प्रो. अरविंद मौर्य, . निशा सिंह, प्रो. किरण मिश्रा, प्रो. रमेश चंद्र शुक्ल, डॉ. शैलेश पांडेय मौजूद रहे।