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Pratapgarh News: कोलकाता के मूर्तिकार बेल्हा में गढ़ रहे मां दुर्गा की मूर्तियां
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शहर के चिलबिला स्थित हनुमान मंदिर में कोलकाता से आए आठ मूर्तिकार मई से दुर्गा उत्सव के लिए मूर्तियां तैयार करने में जुटे हैं। इस बार मूर्तिकारों को 50 मूर्तियां बनाने के ऑर्डर मिले हैं। मां दुर्गा के साथ ही भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी की मूर्तियों के रंग-रोगन में मूर्तिकार जुटे हुए हैं।
तीन से लेकर 30 हजार तक की मूर्तियां तैयार की गई हैं। 20 सितंबर तक मूर्तियां पूजा-पंडालों में पहुंचेंगी। 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। मूर्तिकार एसपी पॉल ने बताया कि प्रतिमाओं के निर्माण में पहले की तुलना में लागत काफी बढ़ गई है। जिस कारण मुनाफा कम हो गया है।
बीते साल हर मूर्तिकार को महज 20 हजार रुपये का फायदा हुआ था। पांच साल पहले तक बांस 100 में मिलता था लेकिन अब 300 रुपये में बांस मिल रहा है। मिट्टी भी 500 की जगह 1000 रुपये प्रति ट्रॉली में मिल रही है। रंगों के दामों में 30 फीसदी का इजाफा हुआ। जिससे मुनाफा कम हो रहा है।
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मूर्तिकार शोभित व सोमेंद्र ने बताया कि चार महीने तक आठ लोग हर दिन 10 से 12 घंटे तक मेहनत कर मूर्तियां तैयार करते हैं। हर मूर्ति पर मेहनत मजदूरी को निकालने पर पांच सौ से हजार रुपये की ही बचत होती है। जबकि पहले एक हजार से लेकर 1500 सौ रुपये की बचत होती थी।
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तीन से लेकर 30 हजार तक की मूर्तियां तैयार की गई हैं। 20 सितंबर तक मूर्तियां पूजा-पंडालों में पहुंचेंगी। 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। मूर्तिकार एसपी पॉल ने बताया कि प्रतिमाओं के निर्माण में पहले की तुलना में लागत काफी बढ़ गई है। जिस कारण मुनाफा कम हो गया है।
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बीते साल हर मूर्तिकार को महज 20 हजार रुपये का फायदा हुआ था। पांच साल पहले तक बांस 100 में मिलता था लेकिन अब 300 रुपये में बांस मिल रहा है। मिट्टी भी 500 की जगह 1000 रुपये प्रति ट्रॉली में मिल रही है। रंगों के दामों में 30 फीसदी का इजाफा हुआ। जिससे मुनाफा कम हो रहा है।
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मूर्तिकार शोभित व सोमेंद्र ने बताया कि चार महीने तक आठ लोग हर दिन 10 से 12 घंटे तक मेहनत कर मूर्तियां तैयार करते हैं। हर मूर्ति पर मेहनत मजदूरी को निकालने पर पांच सौ से हजार रुपये की ही बचत होती है। जबकि पहले एक हजार से लेकर 1500 सौ रुपये की बचत होती थी।