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वनगमन को निकले भगवान राम, रो पड़े लक्ष्मण व अवधवासी
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लालगंज के समित सराय जगत सिंह आयोजित रामलीला का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : PRATAPGARH
वनगमन को निकले भगवान राम, रो पड़े लक्ष्मण व अवधवासी
श्रीरामलीला समिति के कलाकारों ने राम वनवास व खरदूषण वध का किया बेहतरीन मंचन
प्रतापगढ़। भगवान राम, लक्ष्मण व मां जानकी राजमहल से वल्कल वेश मेें चौदह वर्षों के वनवास के लिए प्रस्थान किए तो हर किसी आंखें भर आईं। सभी भगवान राम से वन न जाने की मिन्नत कर रहे थे। पूरे अवध में सन्नाटा पसर गया। श्रीरामलीला समिति के कलाकारों द्वारा राम वनवास का झांकी मंचन देख हर कोई भावुक हो उठा। शहर के गोपाल मंदिर से दोपहर दो बजे पूजन- अर्चन के बीच झांकी शहर भ्रमण को रवाना हुई। घंटाघर, ठठेरी बाजार सहित शहर का भ्रमण करते हुए झांकी रामलीला मैदान को रवाना हुई। इसके साथ ही कलाकारों ने खरदूषण वध का भी मंचन किया। रामलीला मैदान में भगवान राम के द्वारा खरदूषण मारा गया। खरदूषण का वध होते ही जयकारे गूंजने लगे। इस दौरान संरक्षक रोशन लाल ऊमरवैश्य, अध्यक्ष श्याम शंकर सिंह, मंत्री विपिन गुप्ता, नीतिन शर्मा गंगू आदि मौजूद रहे।
रामलीला मैदान के मुख्यद्वार से लेकर युद्ध स्थल तक दल- दल व जलजमाव से पैदल तक चलना दूभर है। दल- दल व जलजमाव के चलते शनिवार को भगवान राम व खरदूषण का रथ युद्ध स्थल तक नहीं पहुंच सका। आनन- फानन में झूला हटाकर खरदूषण वध का मंचन कराया गया। हालांकि दिनभर नगरपालिका टीम समतलीकरण के कार्य में जुटी रही।
हफ्तेभर की बारिश से रामलीला मैदान मेें जगह- जगह जलजमाव हो गया है। मैदान में जमा कूड़े के ढेर बह कर मैदान में आ गए हैं। बारिश के चलते इससे उत्तरी छोर यानी मुख्यद्वार की तरफ दलदल हो गया। दरअसल इसी छोर से रथों का प्रवेश होता है। शनिवार को मैदान में बने युद्ध स्थल पर खरदूषण वध का मंचन होना था। मार्ग को दुरुस्त करने को लेकर सुबह से ही नगरपालिका की टीम जुटी रही। समतलीकरण करने के लिए ट्रैक्टर से मिट्टी गिराई जा रही थीं। मगर दोपहर दो बजे तक कार्य पूरा नहीं हो सका। जहां मिट्टी गिराई गई थी वहां, सीलन व दलदल अधिक होने से रास्ता दुरुस्त नहीं हो पाया। दोपहर एक बजे के बाद आनन- फानन में संरक्षक रोशन लाल ऊमरवैश्य, अध्यक्ष श्याम शंकर सिंह सहित पदाधिकारियों ने झूला आदि हटाकर खरदूषण वध के लिए स्थान चिह्नित किया। इस तरह दोपहर तीन बजे खरदूषण वध का मंचन हुआ।
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श्रीरामलीला समिति के कलाकारों ने राम वनवास व खरदूषण वध का किया बेहतरीन मंचन
प्रतापगढ़। भगवान राम, लक्ष्मण व मां जानकी राजमहल से वल्कल वेश मेें चौदह वर्षों के वनवास के लिए प्रस्थान किए तो हर किसी आंखें भर आईं। सभी भगवान राम से वन न जाने की मिन्नत कर रहे थे। पूरे अवध में सन्नाटा पसर गया। श्रीरामलीला समिति के कलाकारों द्वारा राम वनवास का झांकी मंचन देख हर कोई भावुक हो उठा। शहर के गोपाल मंदिर से दोपहर दो बजे पूजन- अर्चन के बीच झांकी शहर भ्रमण को रवाना हुई। घंटाघर, ठठेरी बाजार सहित शहर का भ्रमण करते हुए झांकी रामलीला मैदान को रवाना हुई। इसके साथ ही कलाकारों ने खरदूषण वध का भी मंचन किया। रामलीला मैदान में भगवान राम के द्वारा खरदूषण मारा गया। खरदूषण का वध होते ही जयकारे गूंजने लगे। इस दौरान संरक्षक रोशन लाल ऊमरवैश्य, अध्यक्ष श्याम शंकर सिंह, मंत्री विपिन गुप्ता, नीतिन शर्मा गंगू आदि मौजूद रहे।
रामलीला मैदान के मुख्यद्वार से लेकर युद्ध स्थल तक दल- दल व जलजमाव से पैदल तक चलना दूभर है। दल- दल व जलजमाव के चलते शनिवार को भगवान राम व खरदूषण का रथ युद्ध स्थल तक नहीं पहुंच सका। आनन- फानन में झूला हटाकर खरदूषण वध का मंचन कराया गया। हालांकि दिनभर नगरपालिका टीम समतलीकरण के कार्य में जुटी रही।
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हफ्तेभर की बारिश से रामलीला मैदान मेें जगह- जगह जलजमाव हो गया है। मैदान में जमा कूड़े के ढेर बह कर मैदान में आ गए हैं। बारिश के चलते इससे उत्तरी छोर यानी मुख्यद्वार की तरफ दलदल हो गया। दरअसल इसी छोर से रथों का प्रवेश होता है। शनिवार को मैदान में बने युद्ध स्थल पर खरदूषण वध का मंचन होना था। मार्ग को दुरुस्त करने को लेकर सुबह से ही नगरपालिका की टीम जुटी रही। समतलीकरण करने के लिए ट्रैक्टर से मिट्टी गिराई जा रही थीं। मगर दोपहर दो बजे तक कार्य पूरा नहीं हो सका। जहां मिट्टी गिराई गई थी वहां, सीलन व दलदल अधिक होने से रास्ता दुरुस्त नहीं हो पाया। दोपहर एक बजे के बाद आनन- फानन में संरक्षक रोशन लाल ऊमरवैश्य, अध्यक्ष श्याम शंकर सिंह सहित पदाधिकारियों ने झूला आदि हटाकर खरदूषण वध के लिए स्थान चिह्नित किया। इस तरह दोपहर तीन बजे खरदूषण वध का मंचन हुआ।

सदर ब्लाक कोहणा गांव में आयोजित रामलीला में परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन करते कलाकार।- फोटो : PRATAPGARH
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