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एसओ के विरोध में आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 07 Apr 2016 12:01 AM IST
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कंधई थानेदार के विरोध में ग्रामीणों ने थाने के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। एसओ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए आर-पार के संघर्ष का एलान किया है। कंधई पुलिस की कार्यप्रणाली व लूट-खसोट के विरोध में पहले भी ग्रामीण प्रदर्शन कर चुके हैं।
कंधई थाना क्षेत्र के रामपुर मुफरिद से क्षेत्र पंचायत सदस्य शुजातउल्ला की अगुवाई में बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण थाने के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गए। उनके साथ प्रधान नौशाद अहमद समेत अन्य ग्रामीण भी बैठे हैं। आमरण अनशन पर बैठे अधिवक्ता व बीडीसी सदस्य शुजातउल्ला का आरोप है कि तैनाती के बाद से ही एसओ सुरैश सैनी सिपाही रिजवान को अपना कारखास बनाकर लूटखसोट में लिप्त हैं।
दर्जन भर से अधिक मामले उनके पास ऐसे हैं जिनमे एसओ ने खुलेआम पैसा लिया है। थानेदार व थाने में तैनात आरक्षी रिजवान के भ्रष्टाचार की जांच अधिकारियों से कराई जाए। ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। तीन सूत्रीय मांग पत्र पहले ही जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को भेजी जा चुकी है। जिसमें एसओ व आरक्षी को निलंबित कर उनके भ्रष्टाचार की जांच करने और निलंबित सिपाही को बहाल कर थाने में तैनात करने की मांग शामिल है। प्रशासन को चेताया है कि यदि उनकी मांगें पूरी न की गई तो वह ग्रामीणों के साथ आरपार की लड़ाई लड़ने का बाध्य होंगे।
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कंधई थाना क्षेत्र के रामपुर मुफरिद से क्षेत्र पंचायत सदस्य शुजातउल्ला की अगुवाई में बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण थाने के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गए। उनके साथ प्रधान नौशाद अहमद समेत अन्य ग्रामीण भी बैठे हैं। आमरण अनशन पर बैठे अधिवक्ता व बीडीसी सदस्य शुजातउल्ला का आरोप है कि तैनाती के बाद से ही एसओ सुरैश सैनी सिपाही रिजवान को अपना कारखास बनाकर लूटखसोट में लिप्त हैं।
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दर्जन भर से अधिक मामले उनके पास ऐसे हैं जिनमे एसओ ने खुलेआम पैसा लिया है। थानेदार व थाने में तैनात आरक्षी रिजवान के भ्रष्टाचार की जांच अधिकारियों से कराई जाए। ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। तीन सूत्रीय मांग पत्र पहले ही जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को भेजी जा चुकी है। जिसमें एसओ व आरक्षी को निलंबित कर उनके भ्रष्टाचार की जांच करने और निलंबित सिपाही को बहाल कर थाने में तैनात करने की मांग शामिल है। प्रशासन को चेताया है कि यदि उनकी मांगें पूरी न की गई तो वह ग्रामीणों के साथ आरपार की लड़ाई लड़ने का बाध्य होंगे।
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