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निजी अस्पताल तैयार नहीं, बूस्टर का टीका लगवाने के लिए आने लगा मैजेस
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Private hospital not ready, messages started coming to get booster vaccine
जिले के डेढ़ लाख से अधिक लोगों ने अब तक कोरोना से बचाव के लिए बूस्टर का टीका नहीं लगवाया है। ऐसे लोगों के मोबाइल पर कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज के लिए मोबाइल पर संदेश आने लगा है। टीका लगवाने के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल संचालक टीका लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। जबकि सरकारी में 59 प्लस को छोड़कर बाकी लोगों को बूस्टर का टीका लगाए जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
जिले के करीब ढाई लाख ऐसे लोग हैं जिनके मोबाइल पर लगातार बूस्टर का टीका लगवाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से मैसेज आ रहा है। इनमें 70 हजार के करीब बुजुर्ग भी शामिल हैं। अब उन्हें वैक्सीन की तीसरी खुराक यानी की बूस्टर डोज की दरकार है। सरकारी आदेशानुसार 60 साल से कम आयु वालों को बूस्टर डोज फ्री न देकर निजी अस्पतालों में सुविधा शुल्क जमाकर लगवाने को कहा गया है। मगर जिले के निजी अस्पताल संचालकों ने बूस्टर डोज लगाने में सहयोग देने से इंकार कर दिया।
उनका कहना है कि बूस्टर का डोज खुलने के चार घंटे के अंदर खत्म भी करना होता है। दस मरीज एक साथ यदि नहीं आए तो एक पूरा वायल उनका खराब हो जाएगा। जिसका भुगतान अस्पताल संचालक को अपने जेब से करना होगा। ऐसे में निजी अस्पताल संचालक इससे कतरा रहे हैं, वहीं सरकारी अस्पतालों में बुजुर्गो को छोड़ दिया जाए तो बाकी को कोरोना का तीसरा टीका नहीं लगाया जा रहा है।
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जबकि लगातार उनके मोबाइल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से बूस्टर का टीका लगावाने के लिए जहां फोन आ रहा है वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मैसेज भी भेजा जा रहा है। इससे बूस्टर का टीका लगवाने के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। वे सरकारी या फिर प्राइवेट अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं। मगर बूस्टर का टीका लगाने के लिए अफसर तैयार भी नहीं हो रहे हैं। उधर, पढ़ाई, नौकरी या पर्यटन के लिए विदेश जाने वाले लोग हो या फिर जेल में बंद परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए जाने वाले लोगों को कोरोनारोधी वैक्सीन के तीसरी खुराक का प्रमाण पत्र दिखाना पड़ रहा है।
इससे लोग ज्यादा परेशान हो रहे हैं। जिला सहायक प्रतिरक्षाधिकारी महेश सिंह से भी लोग लगातार संपर्क कर रहे हैं। स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि कई बार निजी अस्पतालों को वैक्सीन की बूस्टर डोज खरीदकर लगाने का निर्देश दिया जा चुका है। मगर अभी तक बूस्टर डोज की वैक्सीन खरीदने से निजी अस्पताल संचालक बच रहे हैं।
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जिले के करीब ढाई लाख ऐसे लोग हैं जिनके मोबाइल पर लगातार बूस्टर का टीका लगवाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से मैसेज आ रहा है। इनमें 70 हजार के करीब बुजुर्ग भी शामिल हैं। अब उन्हें वैक्सीन की तीसरी खुराक यानी की बूस्टर डोज की दरकार है। सरकारी आदेशानुसार 60 साल से कम आयु वालों को बूस्टर डोज फ्री न देकर निजी अस्पतालों में सुविधा शुल्क जमाकर लगवाने को कहा गया है। मगर जिले के निजी अस्पताल संचालकों ने बूस्टर डोज लगाने में सहयोग देने से इंकार कर दिया।
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उनका कहना है कि बूस्टर का डोज खुलने के चार घंटे के अंदर खत्म भी करना होता है। दस मरीज एक साथ यदि नहीं आए तो एक पूरा वायल उनका खराब हो जाएगा। जिसका भुगतान अस्पताल संचालक को अपने जेब से करना होगा। ऐसे में निजी अस्पताल संचालक इससे कतरा रहे हैं, वहीं सरकारी अस्पतालों में बुजुर्गो को छोड़ दिया जाए तो बाकी को कोरोना का तीसरा टीका नहीं लगाया जा रहा है।
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जबकि लगातार उनके मोबाइल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से बूस्टर का टीका लगावाने के लिए जहां फोन आ रहा है वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मैसेज भी भेजा जा रहा है। इससे बूस्टर का टीका लगवाने के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। वे सरकारी या फिर प्राइवेट अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं। मगर बूस्टर का टीका लगाने के लिए अफसर तैयार भी नहीं हो रहे हैं। उधर, पढ़ाई, नौकरी या पर्यटन के लिए विदेश जाने वाले लोग हो या फिर जेल में बंद परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए जाने वाले लोगों को कोरोनारोधी वैक्सीन के तीसरी खुराक का प्रमाण पत्र दिखाना पड़ रहा है।
इससे लोग ज्यादा परेशान हो रहे हैं। जिला सहायक प्रतिरक्षाधिकारी महेश सिंह से भी लोग लगातार संपर्क कर रहे हैं। स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि कई बार निजी अस्पतालों को वैक्सीन की बूस्टर डोज खरीदकर लगाने का निर्देश दिया जा चुका है। मगर अभी तक बूस्टर डोज की वैक्सीन खरीदने से निजी अस्पताल संचालक बच रहे हैं।