{"_id":"5e4edb908ebc3ef2744f3f98","slug":"prime-accused-accused-of-embezzlement-of-rs-6-48-lakh-restored-pratapgarh-news-ald26905902","type":"story","status":"publish","title_hn":"6.48 लाख रुपये के गबन के आरोपी प्रधान को किया बहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
6.48 लाख रुपये के गबन के आरोपी प्रधान को किया बहाल
विज्ञापन
rupees
जिले के शिवगढ़ विकास खंड के चंदीगोविंदपुर ग्राम पंचायत में 6.48 लाख रुपये का घपला करने वाले प्रधान को अफसरों ने क्लीन चिट देते हुए बहाल कर दिया है। 12 सितंबर 2017 में घपले का खुलासा उस समय हुआ था जब तत्कालीन सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह ने मामले की जांच कराई थी। समय बीतने के साथ ही अधिकारी बदले और प्रधान को क्लीन चिट मिल गई।
जिले के शिवगढ़ विकास खंड के चंदीगोविंदपुर ग्राम पंचायत के निवासी अशोक कुमार सिंह ने निदेशक पंचायतीराज और स्वच्छ भारत मिशन किंजल सिंह से शिकायत कर आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में वर्ष 2017 में 54 शौचालयों के निर्माण की धनराशि 6.48 लाख रुपये निकालकर ग्राम प्रधान शीतला प्रसाद पाल और वीडीओ वीरेंद्र सरोज ने बंदरबांट कर ली।
गांव के श्रीप्रकाश की शिकायत पर तत्कालीन सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह ने पूरे मामले की जांच कराई और प्रधान और सचिव पर 6.48 लाख रुपये गबन का खुलासा किया। तत्कालीन डीएम शंभु कुमार ने 12 सितंबर 2017 को प्रधान और सचिव को निलंबित कर दिया था। डीएम का तबादला होने के बाद प्रधान बहाल होने के लिए विकास भवन का चक्कर लगाने लगा।
विज्ञापन
आरोप है कि अफसरों ने क्लीनचिट देते हुए 18 फरवरी 2020 को प्रधान और सचिव को बहाल कर दिया। अशोक ने निदेशक पंचायतीराज और मिशन निदेशक स्वच्छ भारत मिशन से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने की मांग की है। इधर, डीपीआरओ लालचंद्र गुप्ता ने बताया कि प्रधान ने 54 शौचालयों का निर्माण करा दिया था। इसलिए उसे बहाल कर दिया गया है।
विज्ञापन
जिले के शिवगढ़ विकास खंड के चंदीगोविंदपुर ग्राम पंचायत के निवासी अशोक कुमार सिंह ने निदेशक पंचायतीराज और स्वच्छ भारत मिशन किंजल सिंह से शिकायत कर आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में वर्ष 2017 में 54 शौचालयों के निर्माण की धनराशि 6.48 लाख रुपये निकालकर ग्राम प्रधान शीतला प्रसाद पाल और वीडीओ वीरेंद्र सरोज ने बंदरबांट कर ली।
विज्ञापन
गांव के श्रीप्रकाश की शिकायत पर तत्कालीन सीडीओ महेंद्र बहादुर सिंह ने पूरे मामले की जांच कराई और प्रधान और सचिव पर 6.48 लाख रुपये गबन का खुलासा किया। तत्कालीन डीएम शंभु कुमार ने 12 सितंबर 2017 को प्रधान और सचिव को निलंबित कर दिया था। डीएम का तबादला होने के बाद प्रधान बहाल होने के लिए विकास भवन का चक्कर लगाने लगा।
विज्ञापन
आरोप है कि अफसरों ने क्लीनचिट देते हुए 18 फरवरी 2020 को प्रधान और सचिव को बहाल कर दिया। अशोक ने निदेशक पंचायतीराज और मिशन निदेशक स्वच्छ भारत मिशन से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने की मांग की है। इधर, डीपीआरओ लालचंद्र गुप्ता ने बताया कि प्रधान ने 54 शौचालयों का निर्माण करा दिया था। इसलिए उसे बहाल कर दिया गया है।