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प्रतापगढ़: सबसे ज्यादा वोट मिले पर, घट गया जीत का अंतर
Fri, 24 May 2019 12:52 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 24 May 2019 12:52 AM IST
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17वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता को जिले में 4,36,491 लोगों ने पसंद किया। इतना वोट कभी कोई प्रत्याशी नहीं पा सका था। हालांकि सर्वाधिक मतों से जीत के रिकार्ड को वह नहीं तोड़ सके। जीत के अंतर के मामले में वह अब तक हुए चुनावों में तीसरे स्थान पर हैं।
संगमलाल गुप्ता ने 1 लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की है। जबकि इससे पहले 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के राजा दिनेश ने 2,32,505 मतों के साथ सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। हरिवंश सिंह ने भी भाजपा की लहर में बड़ी जीत दर्ज की थी।
जिले की जनता ने चुनाव में एकतरफा लहर पहले भी देखी थी। आजादी के बाद के चुनावों में जनता में पहली बार 1977 में इमरजेंसी का रोष दिखा था। ऐसे में फैसला भी कांग्रेस के विरोध में आया। दो लाख से अधिक वोट पाकर भारतीय लोकदल के रूपनाथ सिंह सांसद बने। कांग्रेस के राजा दिनेश सिंह दूसरे नंबर पर थे लेकिन, वह रूपनाथ के मुकाबले चौथाई मत ही पास सके थे।
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1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के पक्ष में जो लहर चली थी, उसका जिले में भी असर दिखा था। कांग्रेस के पक्ष में जिस तरह से जनता ने एकतरफा फैसला दिया वह जीत का रिकार्ड आज तक नहीं टूट सका है। इसके बाद भी मंडल कमीशन, राममंदिर और बोफोर्स की लहर आई, लेकिन इतना जुनून कभी नहीं दिखा। वर्ष 2014 में भाजपा के सहयोग से अद प्रत्याशी हरिवंश सिंह को 3,75099 मत मिले थे।
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के आसिफ सिद्दीकी को 1,75,799 मतों से शिकस्त दी थी। वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता को 4,36,491 मत मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रत्याशी को 1,17,952 मतों से पराजित कर इतिहास रचा। अब तक हुए चुनाव में सबसे अधिक मत पाने वाले संगमलाल गुप्ता सांसद बने।
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संगमलाल गुप्ता ने 1 लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की है। जबकि इससे पहले 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के राजा दिनेश ने 2,32,505 मतों के साथ सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। हरिवंश सिंह ने भी भाजपा की लहर में बड़ी जीत दर्ज की थी।
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जिले की जनता ने चुनाव में एकतरफा लहर पहले भी देखी थी। आजादी के बाद के चुनावों में जनता में पहली बार 1977 में इमरजेंसी का रोष दिखा था। ऐसे में फैसला भी कांग्रेस के विरोध में आया। दो लाख से अधिक वोट पाकर भारतीय लोकदल के रूपनाथ सिंह सांसद बने। कांग्रेस के राजा दिनेश सिंह दूसरे नंबर पर थे लेकिन, वह रूपनाथ के मुकाबले चौथाई मत ही पास सके थे।
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1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के पक्ष में जो लहर चली थी, उसका जिले में भी असर दिखा था। कांग्रेस के पक्ष में जिस तरह से जनता ने एकतरफा फैसला दिया वह जीत का रिकार्ड आज तक नहीं टूट सका है। इसके बाद भी मंडल कमीशन, राममंदिर और बोफोर्स की लहर आई, लेकिन इतना जुनून कभी नहीं दिखा। वर्ष 2014 में भाजपा के सहयोग से अद प्रत्याशी हरिवंश सिंह को 3,75099 मत मिले थे।
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के आसिफ सिद्दीकी को 1,75,799 मतों से शिकस्त दी थी। वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता को 4,36,491 मत मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रत्याशी को 1,17,952 मतों से पराजित कर इतिहास रचा। अब तक हुए चुनाव में सबसे अधिक मत पाने वाले संगमलाल गुप्ता सांसद बने।