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24 घंटे में प्रतापगढ़ में आठ किसानों की मौत

Mon, 13 Apr 2015 11:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़ Updated Mon, 13 Apr 2015 11:30 PM IST
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Pratapgarh district , killing eight formar in 24 hours
बारिश से बर्बाद हुई फसलों के सदमे से पिछले 24 घंटे में नौ और किसानों की जान चली गई। मरने वालों में आठ किसान प्रतापगढ़ जिले के हैं। यहां जान गंवाने वाले किसानों की संख्या 16 पहुंच गई है। एक किसान की कौशाम्बी में जान चली गई।  
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कुंडा क्षेत्र में दिलेरगंज-बशीरपुर निवासी रामसजीवन (60) के पास दो बिस्वा जमीन है। दस बिस्वा खेत उन्होंने बंटाई पर ले रखा था। एक बीघा खेत गांव के अफरोज से 10 हजार रुपये में पटाऊ पर लिया था। पटाऊ का पैसे उन्होंने एक साहूकार से कर्ज लेकर दिए थे। साहूकार से वादा किया था कि फसल बेच कर वह कर्ज अदा कर देंगे। मगर बेमौसम बरसात ने उनकी उम्मीदों को धो दिया। फसल नष्ट होने के गम में वह बीमार हो गए। पत्नी छिंवकहिन के अनुसार कर्ज उतारने की चिंता ने उनकी जान ले ली। ऊंचे गांव निवासी श्यामलाल ने बेला देवी का खेत अधिया पर ले रखा था। इसी से प्राप्त अनाज उनके जीने का आधार था। बारिश से पूरी फसल नष्ट होने के गम में उनकी मौत हो गई। उनकी बिलखती पत्नी सिटकहिन का रो रोकर बुरा हाल है।
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 बाबागंज विकास खंड के आमीपुर गांव के किसान रामनेवाज (60) की भी आजीविका का साधन एक बीघा जमीन में बोई फसल ही थी। बारिश से फसल सड़ गईं। खेत में खड़े डंठल को देख वे इतने व्यथित हुए कि सीने में दर्द के बाद चल बसे। नवलखाऐंधा निवासी रामसुख की कुल जमा पूजी 16 विस्वा में उगाई गई फसल थी। इसी के सहारे वे साल भर काम चलाते थे। मड़ाई में उन्हें सिर्फ दो बोरी गेहूं ही मिला। इसका सदमा इतना गहरा लगा कि फसल मड़ाई के कुछ ही घंटे बाद चल बसे । यही हाल अकोढ़िया निवासी जमुनाशंकर सिंह (68) केे साथ हुआ। उन्होंने रविवार रात तीन बीघे गेहूं की फसल की मड़ाई की थी। मात्र चार बोरी अनाज निकला। उनकी पत्नी चंद्रावती ने बताया कि मड़ाई में गेहूं न के बराबर निकला। घर आए तो वह काफी चिंतित थे। सोचते सोचते चकरा कर गिर पड़े। इलाज के लिए मानधाता सीएचसी ले जाने पर डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। चंघईपुर निवासी किसान तौफीक (55) फसल में अनाज कम निकलने का सदमा नहीं झेल सके और चल बसे। पति की मौत से बदहवास हुई उनकी पत्नी जैबुन्निशां ने बताया कि करीब तीन बोरी अनाज मिला।
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 थ्रेसर पर ही गेहूं छोड़ वह घर आ गए और चारपाई पर बैठते ही उनकी आंखें भर आई। उनसे वह कुछ पूछपाती कि बैठे-बैठे गिर पड़े और दम निकल गया। कुंडा कोतवाली क्षेत्र के सरियांवा गांव निवासी यशोदा (55) पत्नी श्यामलाल की हालत अचानक खराब हो गई। परिजन उन्हें इलाज के लिए ले जा रहे थे कि रास्ते में मौत हो गई। परिजनों की मानें तो वह शाम को फसल देखने गई थीं। फसल की बर्बादी देखकर उनकी हालत खराब हो गई और सांसें थम गई। उधर, हथिगवां थाना क्षेत्र के मल्ला का पुरवा गांव निवासी सतीश तिवारी की भी हालत फसल देखने से खराब हो गई। इलाहाबाद ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।


उधर, कौशाम्बी जिले में नेवादा ब्लाक क्षेत्र के कोटिया गांव निवासी अशर्फीलाल (48) की जान चली गई। वह जीविकोपार्जन के लिए गांव के ही काश्तकारों से खेत बंटाई पर लेते थे। इस बार गांव के ही बबुल पांडेय का खेत बंटाई पर लेकर गेहूं की फसल तैयार की थी। 21 अप्रैल को उनको दूसरे नंबर की बेटी सीमा देवी की शादी भी करनी थी। अशर्फीलाल की बेटी मीना देवी ने बताया कि बंटाई पर लिए गए खेत की सारी फसल बेमौसम की बारिश में गिरकर बर्बाद हो गई थी। इसके चलते वह हफ्तेभर से परेशान थे। रविवार को फसल देखकर घर लौटते ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और फिर बचाया नहीं जा सका।
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