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प्रतापगढ़ जिला अस्पताल : 32 वार्डब्वॉय, फिर भी तीमारदार खींच रहे स्ट्रेचर

Tue, 26 Nov 2019 12:39 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2019 12:39 AM IST
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Pratapgarh District Hospital: 32 Wardboys, Still-stretched stretchers
जिला अस्पताल में मरीज को सहारा देकर वार्ड में ले जाते तीमारदार। - फोटो : PRATAPGARH
जिला अस्पताल में 32 वार्ड ब्वॉय हैं, लेकिन गंभीर हालत में मरीजों को लेकर अस्पताल आने वाले तीमारदारों को स्ट्रेचर खुद खींचना पड़ता है। खुद से चादर बिछानी पड़ती है। वार्डब्वाय इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। डॉक्टरों के कहने पर मरीजों को इंजेक्शन लगाते हैं और दवा लिखते हैं। इससे मरीज और तीमारदार परेशान होते हैं। मगर इस समस्या की ओर सीएमएस और सीएमओ का ध्यान नहीं पड़ता है।
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स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के मुताबिक, जिला अस्पताल में आउटसोर्सिंग के जरिए रखे गए लोगों को मिलाकर कुल 32 वार्ड ब्वॉय की तैनाती है। नौ वार्ड ब्वॉय शासन की ओर से तैनात किए गए हैं तो 23 एक सेवाप्रदाता की ओर से रखे गए हैं। शासन की ओर से इनका काम भी तय किया गया है।
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मरीजों का स्ट्रेचर पर लेकर वार्ड में भर्ती कराना, जांच के लिए लेकर जाने सहित दीवार की पोछाई करने के साथ स्टाफ नर्स का सहयोग करने का शासन ने आदेश दिया है। मगर जिला अस्पताल में तैनात ज्यादातर वार्ड ब्वॉय खुद को अपने को डॉक्टर से कम नहीं समझते हैं।
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इमरजेंसी हो या फिर मेडिकल, सर्जिकल और चिल्ड्रेन वार्ड में तैनात वार्ड ब्वॉय मरीजों को उठाना-बैठाना या फिर जरूरत पड़ने पर उनका स्ट्रेचर खींचना पसंद नहीं करते हैं। वे डॉक्टरों के बगल बैठकर दवा लिखते हैं। वार्ड में नर्स के साथ रहते हैं और बगैर किसी ट्रेनिंग के ही मरीजों को इंजेक्शन भी लगाते हैं।
इससे गंभीर हालत में जिला अस्पताल के इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को परेशान होना पड़ता है। मरीजों को गोद में उठाकर तीमारदार वार्ड में लेकर जाते हैं। स्वास्थ्य कर्मचारियों का यदि ध्यान भी पड़ता है तो वे स्ट्रेचर की ओर इशारा कर अपना पिंड छुड़ा लेते हैं। इमरजेंसी से चिकित्सक यदि मरीजों को किसी वार्ड में भेजते हैं तो तीमारदार स्ट्रेचर पर लेकर मरीज को जाता है। मदद के लिए वार्ड ब्वॉय सामने नहीं आते।
इससे तीमारदार परेशान होते हैं। यही हाल इलाज के दौरान किसी की मौत के बाद होती है। मौत के बाद भी वार्ड ब्वॉय शव को हाथ से नहीं छूते हैं। परेशान परिजन को गोद में या फिर स्ट्रेचर से लेकर अस्पताल परिसर में आना पड़ता है। इसके बाद कहीं जाकर शव वाहन या फिर निजी वाहन से घर ले जाना होता है।
दो वार्ड ब्वॉय बांधते हैं प्लास्टर, दो करते हैं मरहम-पट्टी
जिला अस्पताल में तैनात चार वार्ड ब्वॉय की ड्यूटी स्वास्थ्य विभाग ने फार्मासिस्ट वाले स्थान पर लगा दी है। विभाग के सूत्रों पर यदि विश्वास किया जाए तो दो वार्ड ब्वॉय की तैनाती सीएमएस ने प्लास्टर बांधने के लिए लगा रखी है।
वहीं दो लोगों को ड्रेसिंग कक्ष में आने वाले मरीजों का मरहम पट्टी करने के लिए लगाया गया है। दो वार्ड ब्वाय तो पर्चा काउंटर पर बैठते हैं। पर्चा काटने के अलावा इनकी ड्यूटी तक नहीं बदली जाती है।

वार्ड ब्वॉय की ड्यूटी प्लास्टर रूम में लगाई गई है। वहां उनका काम होता है। किसी का हाथ पैर पकड़ने के लिए डॉक्टर को नहीं लगाया जा सकता है। अन्य वार्ड ब्वॉय यदि मरीजों की मदद में हाथ नहीं बढ़ा रहे हैं तो गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी। काम करने से भागने वाले सेवाप्रदाता के वार्ड ब्वॉय को हटा दिया जाएगा। डॉक्टर पीपी पांडेय, सीएमएस जिला अस्पताल।

जिला अस्पताल में मरीज का स्ट्रेचर खींचकर ले जाते तीमारदार।

जिला अस्पताल में मरीज का स्ट्रेचर खींचकर ले जाते तीमारदार।- फोटो : PRATAPGARH

जिला अस्पताल में मरीज को सहारा देकर वार्ड में ले जाते तीमारदार।

जिला अस्पताल में मरीज को सहारा देकर वार्ड में ले जाते तीमारदार।- फोटो : PRATAPGARH

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